सुभाष चन्द्र
कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता “सेकुलरिज्म के कोढ़” से इस तरह ग्रस्त हैं कि दिमाग का संतुलन खो चुके है जो हर जगह हिंदुओं की बर्बादी पर जश्न मनाते हैं और मुसलमानों के साथ खड़े हो जाते है। अब समय आ गया है कि हिन्दुओं को सेकुलरिज्म की चादर को उतार कर फेंक देना चाहिए। इसने हिन्दुओं का जरुरत से ज्यादा गुमराह कर रखा है और हिन्दू लोलीपॉप समझ पागल बना हुआ है। मुसलमानों को भी समझना होगा कि जो सत्ता के लालच में अपने धर्म का नहीं हो सकता किसी के मजहब का भी नहीं हो सकता। दुनिया भर में हिंदू और यहूदी मुस्लिमों के शत्रु हैं और कांग्रेस उनके साथ खड़ी मिलती है। मुस्लिम तो आपस में भी मुस्लिमों के शत्रु है जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश में।
बिहार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा एक मुस्लिम महिला का नकाब खींचने पर कितना शोर मचा, लेकिन जैसे ही उस महिला के बांग्लादेशी होने की सच्चाई सामने आते ही सारे पाखंडी सेक्युलरिस्ट्स में मातम छा गया।
ममता मतलब ही नहीं है बांग्लादेश के हिंदुओं के नरसंहार से। उसके नेता शत्रुघ्न सिन्हा को कहते हुए लाज नहीं आई कि “जब तक हमारे पास कोई पुख्ता सबूत न हो, हमें दूसरे देश के बारे में बोलने से पहले सोचना चाहिए। जो ख़बरें आ रही हैं वो केवल सोशल मीडिया का प्रचार भर है”।
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राशिद अल्वी, दिग्विजय सिंह और उदित राज खुल कर कह रहे है कि जो बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहा है वह भारत में अल्पसंख्यकों के साथ हो रही कार्रवाई की वजह से हो रहा है, वो कौन सी “क्रिया की प्रतिक्रिया है” राशिद अल्वी ने यह भी कहा है कि “चर्चा है हादी की हत्या भारत ने करवाई”। यह कहना बिलकुल वैसे है जैसे मनमोहन सिंह ने कहा था “बलूचिस्तान के विद्रोह के पीछे भारत का हाथ है”। ये लोग बताएं कि आए दिन जो भारत में मुस्लिम हिंदुओं के क़त्ल करते हैं “सर तन से जुदा” कह कर और हिंदू लडकियों और बच्चियों का बलात्कार करते हैं वह कौन सी।
“क्रिया की प्रतिक्रिया है”। बस इमरान मसूद ने हिंदुओं की सुरक्षा की बात की है।
ये कांग्रेस के नेता भूल जाते हैं कि इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या भी “क्रिया की प्रतिक्रिया” कही जा सकती है। भिंडरावाले ने स्वर्ण मंदिर में इंदिरा गांधी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया कर उसकी हत्या करवाई और राजीव गांधी के श्रीलंका में लिट्टे से निपटने के लिए जो 5000 भारतीय सैनिक भेजे, उस पर प्रतिक्रिया हुई और राजीव गांधी की हत्या हुई।
हमास का इजरायल पर त्यौहार के दिन हमला करके 1200 लोगों का खून बहाना किस बात की प्रतिक्रिया थी जो सोनिया गांधी गाज़ा के लिए आंसू बहाती है, प्रियंका वाड्रा फिलिस्तीन का बैग लेकर चलती है और ओवैसी “जय फिलिस्तीन” बोलता है। ऑस्ट्रेलिया में 2000 यहूदियों पर त्योहार के समय मुस्लिमों का हमला किस बात की प्रतिक्रिया थी। इज़रायल का गाज़ा को तबाह करना भी एक “प्रतिक्रिया” क्यों न मानी जाए।
पाकिस्तान के आतंकी हमले में पहलगाम में 22 लोगों का नरसंहार हुए लेकिन कांग्रेस ने उसमें पाकिस्तान का नहीं दिखा। पाकिस्तान की “क्रिया की प्रतिक्रिया” जब भारत ने ऑपरेशन सिंदूर से की तो उसके सबूत मांगते फिर।
कांग्रेस सरकार में 12 लाख करोड़ के घोटाले हुए। सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर हेराल्ड में और अन्य पर अगर कानूनी कार्रवाई हुई है तो वह “क्रिया की प्रतिक्रिया”।
कांग्रेस और विपक्ष के लोग मोदी और भाजपा के विरोध में हिंदू दमन का समर्थन कर रहे हैं और देश विरोध का घोर पाप कर रहे है। ये कारण है जो कांग्रेस हारते हारते मरणासन्न हो गई वोट चोरी की वजह से नहीं। संविधान के अनुच्छेद 21(बोलने की आज़ादी) का लाभ उठाते हुए कांग्रेस और विपक्ष ने रसातल में जाने के लिए देशद्रोह का मार्ग पकड़ लिया है।

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