ममता बनर्जी ने पिछले 15 वर्षों में केवल मुस्लिमों के पक्ष में खड़े हो कर बंगाल में हिंदुओं का दमन ही किया है। अभी SIR से खतरा लग रहा है ममता को कि मुस्लिम वोट बैंक बांग्लादेश चला जाएगा तो इसलिए हिंदुओं को पुचकारने के लिए “बाबरी” के नाम पर हुमायूँ कबीर को पार्टी से निकाल दिया लेकिन उसने फिर भी “बाबरी” का शिलान्यास कर दिया जिसका मतलब है अपनी पार्टी में ही “भाईचारा और गंगा जमुनी तहजीब” ख़त्म कर दी। हुमायूँ कबीर तो नाम से ही बाबर की औलाद है फिर अपना नाम “बाबर” ही क्यों नहीं रख लेता।
कोई इन जेहादियों से पूछने वाला नहीं कि मस्जिद के लिए अयोध्या में जो जमीन मिली थी उसका क्या हुआ? दूसरे यह कि बाबरी नाम रखने का मतलब है ये लोग बाबर के वंशज है।
कांग्रेस का इमरान मसूद सुशांत सिन्हा को कह रहा था कि मुसलमान लोकसभा में सबसे कम रह गए है क्योंकि उन्हें “अछूत” बना दिया गया है। प्रश्न ये है कि उसके लिए जिम्मेदार कौन है? वो यह भी कह रहा था कि जिन्ना ने देश को तोड़ कर सबसे ज्यादा नुकसान मुसलमानों का किया। लेकिन सच यह भी है कि 95% मुसलमानों ने पाकिस्तान मांगा था लेकिन पाकिस्तान गए नहीं। भारत छोड़ पाकिस्तान भागा वो मुसलमान जो पाकिस्तान नहीं चाहता था।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
पाकिस्तान में आज क्या हो रहा है। वहां मुसलमानों पर कौन जुल्म कर रहा है, वहां तो कोई मोदी नहीं है और जब पाकिस्तान के मुसलमान आपस में “भाईचारा” और गंगा जमुनी तहजीब नहीं निभा पा रहे तो ये गाना भारत में क्यों गाते हो? जहां इस्लाम पैदा हुआ उस सऊदी अरब समेत करीब 20 मुल्क ऐसे हैं जिनमें गंगा और जमुना तो छोड़ो, कोई भी नदी नहीं है और इनमें अधिकांश इस्लामिक मुल्क है, फिर गंगा जमुनी तहजीब का पाठ भारत में हिंदुओं को क्यों पढ़ाया जाता है। हिन्दुओं को समझना होगा कि गंगा जमुनी तहजीब का रोना रोने वाले हिन्दुओं के गुप्त दुश्मन है। यह ध्यान रखना चाहिए कि जमुना नाम की कोई नदी नहीं नदी है यम महाराज की बहन यमुना। जालिमों ने यमुना माता को जमुना बना दिया।
इमरान मसूद और बड़े बड़े मुस्लिम नेता फिर “अछूत” बनाए जाने की बात क्यों करते हैं जब आज भी भारत के मुसलमान इस्लामिक लुटेरों और मुग़लों को अपना पूर्वज मानते हैं और मुस्लिम लीडर्स उन्हें ऐसा करने के लिए उकसाते हैं। अछूत तो मुस्लिम खुद को कर रहे हैं। उन्हें शिकायत रहती है कि भाजपा उन्हें विधानसभा और लोकसभा के लिए टिकट नहीं देती और न मुस्लिम मंत्री बनाती है, इस शिकायत का क्या आधार है जब मुस्लिम भाजपा को वोट ही नहीं देते तो वो टिकट क्यों दे और क्यों मंत्री बनाए लेकिन फिर हर योजना के लाभ से मुसलमानों को वंचित भी नहीं किया जाता पर वोट मुसलमानों का केवल कांग्रेस और पाखंडी सेकुलर दलों को जाता है।
मुस्लिम खुद को अछूत बना रहे हैं। दिल्ली में मुस्लिम डॉक्टरों द्वारा किए आतंकी हमले की किसी मुस्लिम लीडर द्वारा निंदा करना तो छोड़िए, अनेक उनके समर्थन में खड़े हो गए यह कहते हुए कि इतने पढ़े लिखे लोग आतंकी क्यों बन रहे हैं। हर कौम के पढ़े लिखे लोग तो आतंकी नहीं बन रहे केवल मुस्लिम ही क्यों बन रहे हैं?
अवलोकन करें:-
अल्लामा इक़बाल ने “हिंदी हैं हम वतन हैं, हिन्दोस्तां हमारा” लाइन पाकिस्तान बनने के बाद बदल दी थी “मुस्लिम हैं हम वतन हैं, सारा जहाँ हमारा” लेकिन आज उस पाकिस्तान का अस्तित्व ही खतरे में है जहाँ की तो बात छोड़िए। भारत में तो जुल्म होने का बहाना बना देते हैं मुस्लिम लेकिन दुनिया भर में इस्लामिक देशो में और जहां मुस्लिमों ने घुसपैठ की है या शरणार्थी बन कर गए, वहां उन पर कौन जुल्म करता है?

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