तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर पिछले 45 साल से वामपंथियों का कब्ज़ा रहा है लेकिन अबकी बार भाजपा ने 101 में से 50 सीट जीत कर उनके गढ़ के किले को ध्वस्त कर दिया। पिछले 2020 के चुनाव में LDF को 52 सीट मिली थी कांग्रेस को 10 और भाजपा को 6 मिली थी लेकिन अबकी बार LDF को केवल 29 और कांग्रेस को 19 सीट मिली।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले निकायों के चुनाव नतीजों ने आगे की रूपरेखा कुछ हद तक स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस ने 6 में से 4 निकाय जीते हैं जिनमें से 3 पिछले चुनाव में LDF के पास थे और एक कांग्रेस के पास था, इसके अलावा LDF ने एक निकाय पर अपना कब्ज़ा बरक़रार रखा है और एक भाजपा से हार गया।
Kollam, Kochi, Thrissur और Kannur निकाय कांग्रेस के UDF ने वामपंथियों से छीने बस, एक Kozhikode LDF के पास गया।
इसके अलावा Tripunithura Municipality पर LDF का कुल मिला कर 42 वर्ष कब्ज़ा रहा और कांग्रेस का 5 वर्ष लेकिन अबकी बार उस पर भी भाजपा ने जीत दर्ज की है।
Palakkad Municipality पर भाजपा ने 53 में से 25 सीट जीत कर तीसरी बार कब्ज़ा बरक़रार रखा है। सबसे बड़ी जीत तो त्रिशूर नगर निगम में हिंदू बहुल इलाके, कन्ननकुलंगरा वार्ड में भाजपा की मुस्लिम प्रत्याशी मुमताज़ की हुई है जिसने कांग्रेस को हरा दिया। यहां एक बात ध्यान देने की है कि हिंदू बहुल सीट पर मुस्लिम तो जीत सकता है लेकिन मुस्लिम बहुल सीट पर भाजपा का हिंदू नहीं जीत सकता बशर्ते मुस्लिम वोट पूरी तरह विभाजित न हो जाएं, वहां की सीट पर सेकुलर दल का हिंदू जीत सकता है बस।
तिरुवनंतपुरम निकाय पर LDF के कब्जे से साथ एक बात और ध्यान देने वाली है कि वह शशि थरूर का भी गढ़ है जहां भाजपा जीती है और भाजपा से विजई उम्मीदवार पूर्व DGP आर श्रीलेखा मेयर बनी हैं।
वामपंथी दल पूरे देश में ख़त्म हो रहे है और अब उनकी वैल्यू Nuisance के बराबर ही रह गई है जो दंगा फसाद और अराजकता के सहारे पब्लिक में बने रहने की कोशिश करते हैं। उनकी नाजायज़ औलाद, नक्सली कुछ ही जिलों में बचे है जिन्हें मार्च, 2026 तक समाप्त करने के लिए अमित शाह ने प्रण किया है और वह प्रण पूरा कर भी लेंगे।
लोकसभा में मात्र 5-6 वामपंथी सदस्य ही रह गए है और वे भी तमिलनाडु और केरल से हैं। बंगाल से बहुत पहले साफ़ हो गए ममता के हाथों और अब ममता की जगह भाजपा लेगी लेकिन सी.पी.एम. के हाथ कुछ नहीं लगेगा।
जिस तरह कांग्रेस की 4 निकायों में जीत हुई है, उससे क्या अब राहुल गांधी कह सकता है कि कांग्रेस ने “वोट चोरी” से निकायों पर कब्ज़ा किया है या अब भी कहेगा भाजपा ने वोट चोरी की है।

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