क्या मुसलमानों ने उद्धव को सहारा दिया जिसके लिए उसने हिंदुत्व को लात मार दी और भाजपा को अपना दुश्मन बना लिया? ओवैसी भी “हिज़ाब” वाली मेयर नहीं बना सका

सुभाष चन्द्र

महाराष्ट्र के निकायों के कुछ परिणामों का मैंने कुछ विश्लेषण किया है जिससे मुझे तो नहीं लगा कि मुसलमानों से यारी से कुछ लाभ उद्धव को हुआ है। उद्धव की पार्टी और अन्य दलों के कुल उम्मीदवारों की संख्या और उसमें से मुसलमानों के संख्या(ब्रैकेट में) नीचे दे रहा हूं -

उद्धव - 153 (10);

मनसे - 49 (10);

कांग्रेस -97 (36);

NCP - 75 (22);

शिंदे -84 (12);

भाजपा -93 (0)

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जो लोग शिकायत करते हैं कि भाजपा किसी मुस्लिम टिकट नहीं देती, उन्हें यह भी देखना चाहिए कि ओवैसी भी किसी हिंदू को टिकट नहीं देता अगर ओवैसी की पार्टी केवल मुस्लिमों की पार्टी हो सकती है तो कोई हिंदुओं की पार्टी क्यों नहीं हो सकती

उद्धव के हिंदुत्व को छोड़ कर और मुस्लिमों का दामन थामने के बाद भी उसकी पार्टी का BMC में शायद कोई मुस्लिम नहीं जीता और कांग्रेस के शायद कुछ उम्मीदवार जरूर जीते हैं ओवैसी के 6 लोग जीते है

AIMIM ओवैसी की पार्टी के कुल मिला कर 114 उम्मीदवार जीते हैं जिन निकायों में वे जीते, उस नगर की कुल सीट, ओवैसी को मिली सीट और शहर में मुस्लिम आबादी (%age) मैंने  उसके आगे दी है और उसके बाद उद्धव/मनसे को मिली सीटों की संख्या है 

संभाजीनगर - 115 (33 ) (30%) - उद्धव / मनसे (6 / 0);

मालेगांव - 84 (21) (79%) - उद्धव/मनसे (0 /0);

अमरावती - 98 (15) (15%) - उद्धव/मनसे (2 / 0);

नांदेड़ - 80 (13) (14%) - उद्धव/मनसे (0 / 0);

धुले – 74 (10) (32%) - उद्धव/मनसे (0 / 0);

सोलापुर - 102 (8) (21%) - उद्धव/मनसे (0 / 0);

ठाणे - 131 (5) (18 %) - उद्धव/मनसे (1 / 0);

जलगांव (75) (2) (18%) - उद्धव/मनसे (5 / 0);

चंद्रपुर (66) (1)  (4%) - उद्धव/मनसे (6 / 0);

BMC - 227(8)  (21%) - उद्धव/मनसे) (65 / 6)-

अब आंकड़े रोचक हैं क्योंकि ये बता रहे हैं कि इन 10 में 9 नगरों में मुसलमानों की संख्या करीब 15% या उससे ज्यादा होते हुए भी उद्धव/मनसे गठबंधन बुरी तरह हारा है, कुछ हद तक BMC को छोड़ कर लेकिन वहां भी कोई मुस्लिम नहीं जीता इसका मतलब यह भी साफ़ निकलता है कि उद्धव को कोई मुस्लिमों का कोई विशेष समर्थन नहीं मिला

ओवैसी को भी मालेगांव में 79% मुस्लिम होते हुए भी बहुत बड़ी सफलता नहीं मिली जबकि वहां पूर्व NCP विधायक आसिफ शेख के बनाई हुई नई पार्टी “इसलाम पार्टी” को 35 सीट मिली जबकि ओवैसी को केवल 21; (इसलाम -Indian Secular Largest Assembly of Maharashtra);

धुले में 32% मुस्लिम होते हुए भी ओवैसी को केवल 10 सीट मिली; 

अमरावती और नांदेड़ में 14 - 15 % मुस्लिम होते हुए 15 और 13 सीट मिली;

सोलापुर और मुंबई में 21% मुस्लिम होते हुए केवल 8 और 6 सीट मिली;

ठाणे में 18% मुस्लिम पर केवल 5 सीट, जलगांव में 18% मुस्लिमों पर केवल 2 सीट मिली और चंद्रपुर में  4% मुस्लिमों के साथ 1 सीट मिली है

लेकिन इन शहरों में मुसलमानों की भरपूर आबादी होते हुए भी भाजपा को अमरावती और चंद्रपुर को छोड़ कर बाकी सभी निकायों में पूर्ण बहुमत मिला है ये सेकुलर कीड़ों के लिए जरूर चिंता का विषय होगा लेकिन उद्धव का एक मिथक टूट जाना चाहिए कि केवल मुस्लिम वोटों से बेड़ापार हो सकता है और हिंदुओं को जूते की नोक पर रखा जा सकता है

कुछ लोगों का मत है कि ओवैसी को मिली सीटें चिंता का विषय है लेकिन 114 सीट मिलने के बाद भी उसे हर जगह मुस्लिमों के होते हुए भी सफलता नहीं मिली और मुंबई में तो वो “हिजाब वाली” को मेयर बना रहा था लेकिन मात्र 6 पार्षदों से तो यह संभव नहीं हो सका

मुस्लिम सीटों से याद आया, एक मौलाना केजरीवाल भी है, उसने तो गज़ब ढहा दिया, उसकी “आप” ने 75 सीट लड़ीं और एक सीट पर औसत 6.4 वोट के हिसाब से कुल मिलकर 481 वोट मिले, सभी सीटों की जमानत जब्त करा दी, गिनीज बुक में नाम दर्ज होना चाहिए

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