सनातन धर्म को ख़त्म करने की बात करना धर्म संहार करने जैसा; मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस श्रीमथी को साधुवाद

सुभाष चन्द्र

उदयनिधि स्टालिन को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता ने फटकार जरूर लगाई लेकिन साथ ही उनके खिलाफ और कोई केस दर्ज होने पर रोक लगा दी, लेकिन जस्टिस बेला त्रिवेदी और प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने उसके खिलाफ FIR दर्ज कराने की अनुमति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया केवल इसलिए कि वह हाई कोर्ट में दायर होनी चाहिए पीठ ने कहा सुप्रीम कोर्ट पुलिस स्टेशन नहीं बनाना चाहिए मैडम त्रिवेदी भूल गई कि उदयनिधि ने 2023 में केवल तमिलनाडु में सनातन धर्म को ख़त्म करने की बात नहीं की थी जो याचिका केवल हाई कोर्ट में दायर होती, उसके सनातन धर्म को ख़त्म करने का मतलब वैश्विक स्तर पर था और इसलिए सुप्रीम कोर्ट को वह याचिका सुननी चाहिए थी लेकिन जनवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के लिए दायर 3 याचिकाएं खारिज कर दी - ये सुप्रीम कोर्ट का प्रेम था सनातन धर्म को ख़त्म करने की सनक से। 

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तमिलनाडु सरकार ने भाजपा नेता अमित मालवीय के खिलाफ उनके X पर पोस्ट किए गए ट्वीट पर आपराधिक केस दर्ज किया जिसमें उन्होंने उदयनिधि स्टालिन के बयान पर प्रतिक्रिया दी थी मद्रास हाई कोर्ट की जस्टिस श्रीमथी ने कठोर शब्दों में कहा - “पिछले 100 वर्षों से DMK लगातार हिंदू धर्म पर हमला कर रही है और उदयनिधि भी उसी विचारधारा से आते है”

जस्टिस श्रीमथी ने कहा कि - “याचिकाकर्ता, अमित मालवीय ने उदयनिधि के बयानों में छुपे हुए अर्थों की तरफ ध्यान आकृष्ट कराया था” “ माननीय जस्टिस श्रीमती ने कहा -

“यह न्यायालय पीड़ा के साथ वर्तमान स्थिति को दर्ज करता है कि जो व्यक्ति (उदय निधि की ओर संकेत करते हुए) HATE SPEECH  की शुरुआत करते हैं, उन्हें खुला छोड़ दिया जाता है, जबकि ऐसे घृणास्पद भाषण पर प्रतिक्रिया देने वालों को कानून की सख्ती का सामना करना पड़ता है न्यायालय उन लोगों से प्रश्न कर रहे हैं जो प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन उन व्यक्तियों के विरुद्ध क़ानून को सक्रिय नहीं कर रहे हैं जिन्होंने HATE SPEECH की शुरुआत की

उच्च न्यायालय ने यह भी इंगित किया कि तमिलनाडु में मंत्री द्वारा दिए गए घृणास्पद भाषण के लिए उनके विरुद्ध कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है, जबकि अन्य राज्यों में कुछ मामले दर्ज किए गए हैं

उच्च न्यायालय ने कहा कि उदयनिधि स्टालिन द्वारा प्रयुक्त शब्दावली वास्तव में नरसंहार (Genocide) का संकेत देती है और HATE SPEECH की श्रेणी में आती है

“यदि सनातन धर्म का पालन करने वाले लोगों का कोई समूह अस्तित्व में नहीं होना चाहिए, तो इसके लिए उपयुक्त शब्द ‘नरसंहार (Genocide)’ है यदि सनातन धर्म को एक धर्म माना जाए, तो यह ‘धर्मसंहार (Religicide)’ होगा इसका अर्थ किसी भी तरीके से या विभिन्न तरीकों से लोगों का उन्मूलन करना भी है, जिनमें पर्यावरण-संहार (Ecocide), तथ्य-संहार (Factocide) और संस्कृति-संहार (Culturicide / सांस्कृतिक नरसंहार) शामिल हैं अतः तमिल वाक्यांश ‘सनातन ओझिप्पु’ का स्पष्ट अर्थ नरसंहार या संस्कृति-संहार होगा ऐसी परिस्थितियों में, याचिकाकर्ता अमित मालवीय द्वारा मंत्री के भाषण पर प्रश्न उठाते हुए किया गया पोस्ट घृणास्पद भाषण नहीं माना जाएगा”

माननीय जज साहिबान के शब्दों को अगर गौर से देखा जाए तो पता चलेगा कि नूपुर शर्मा कैसे हिंदू धर्म और भगवान भोले शंकर के खिलाफ  टीवी चैनल पर “Hate Speech” देने वाले तस्लीम रहमानी के बयान पर प्रतिक्रिया देने के लिए शिकार बनी और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेबी परदीवाला और जस्टिस सूर्यकांत (आज के CJI) ने उसका भयंकर और असहनीय मानसिक शोषण किया

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