यह अत्यंत दुख की बात है कि महाराष्ट्र के दिग्गज नेता अजित पवार की प्लेन क्रैश में मृत्यु हुई है लेकिन अभी उनकी चिता को अग्नि भी नहीं दी गई और विपक्ष ने राजनीति का खेल शुरू कर दिया जिसमें अग्रणी हैं ममता बनर्जी। ममता कह रही हैं कि मीडिया में पढ़ा था कि अजित पवार भाजपा छोड़कर वापस शरद पवार के साथ जाने वाले हैं, ऐसे में हादसा संदिग्ध लगता है जिसकी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में होनी चाहिए क्योंकि हमें उसी पर विश्वास है। ममता ने यह भी कहा है कि देश में कोई भी सुरक्षित नहीं है जिसका मतलब साफ है वो केंद्र पर प्लेन क्रैश का ठीकरा फोड़ रही है।
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दूसरी बात महाराष्ट्र विधानसभा में भाजपा के 132 सदस्य हैं, शिवसेना के 57 और अजित पवार के 41; बहुत तो भाजपा और शिवसेना का भी हो जाता है तो फिर अजित पवार के साथ छोड़ने से फडणवीस सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ता था। ऐसे में ममता की भाजपा द्वारा उन्हें मरवाने की थ्योरी में कुछ दम नहीं है - वैसे भी निकाय चुनाव तो भाजपा से अलग ही लड़े थे।
अगर किसी को प्लेन क्रैश में कुछ गड़बड़ का अंदेशा होना चाहिए था तो वह शरद पवार को होना चाहिए था लेकिन उन्होंने कहा है कि यह एक दुर्घटना थी और इसमें किसी तरह का कोई षड़यंत्र नहीं है।
लालू यादव, अखिलेश यादव और उमर अब्दुल्ला और खड़गे ने भी जांच की मांग की है जबकि जांच तुरंत शुरू हो गई है।
दिग्विजय सिंह कह रहे हैं कि “सवाल यह है कि हादसा क्यों हुआ? शुरुआती जानकारी के मुताबिक, इसी कंपनी का एक विमान तीन साल पहले मुंबई में भी इसी तरह दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। यह घटना कम विजिबिलिटी के कारण हुई। DGCA को इस घटना की पूरी जांच करनी चाहिए। जिस कंपनी का विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ, उस कंपनी के विमानों का मेंटेनेंस कौन कर रहा है?
तीन साल पहले की दुर्घटना कह कर दिग्विजय प्लेन में गड़बड़ी कहना चाहते हैं लेकिन यह बात तो अजित पवार को भी पता होगी कि उस कंपनी का प्लेन कितना सुरक्षित है यात्रा के लिए। अगर उन्हें उसमे कुछ खरभि लगती तो वह उसमें यात्रा करने से मना कर सकते थे लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
दिग्विजय सिंह उंगली उठाने से पहले बताएं कि 11 जून, 2000 को हुए प्लेन क्रैश की जांच के लिए कांग्रेस ने क्यों नहीं कहा जिसमें राजेश पायलट की मृत्यु हुयी थी। क्या माधवराव सिंधिया की 30 सितंबर, 2001 को हुई हवाई दुर्घटना में कुछ गड़बड़ नहीं हो सकती थी लेकिन जांच में पाया गया कि मौसम की खराबी के कारण प्लेन क्रैश हो गया। कांग्रेस के अपने राज में तो अनेक दुर्घटनाएं हुई है जिनका हिसाब कांग्रेस के पास होगा।
अभी अजित पवार का अंतिम संस्कार भी नहीं हुआ है और विपक्ष का विधवा विलाप ऐसा शुरू हुआ है जो आसानी से ख़त्म नहीं होगा।

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