यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ भारत की फ्री ट्रेड डील; Mother of All Deals ही नहीं भारत के व्यापार संबंधों में एक मील का पत्थर साबित होगी

सुभाष चन्द्र

कल यूरोपियन यूनियन (EU) के साथ भारत की फ्री ट्रेड डील साइन होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपार प्रसन्नता प्रकट की है और इस डील के जरिए 100 बिलियन डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा गया है EU की अध्यक्ष Ursula von der Leyen के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस डील को Mother of All Deals कहा और यह भी कहा कि वैश्विक बाजार में इस समय व्यापारिक उथल पुथल को रोकने में यह डील मदद करेगी Madam Ursula के साथ EU कौंसिल के अध्यक्ष Antonio Costa की भी इस डील में बड़ी भूमिका रही है। Antonio Costa गोवा में पैदा हुए और पूरी पढाई वहीँ की अपनी MBBS और MD भी पणजी मेडिकल कॉलेज से पूरी की

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प्रधानमंत्री ने कहा कि समझौते का लाभ हर वर्ग को मिलेगा इससे ट्रेड और ग्लोबल सप्लाई को गति मिलेगी  यह समझौता वैश्विक जीडीपी का 25% है और भारत/EU के 200 करोड़ लोगों को इसका लाभ होगा 

-इस डील से आयल सेक्टर में निवेश होगा

-EU के Chemical Products पर टैरिफ कम होगा कारों से टैरिफ 110% से घटाकर 10% किया गया:

- वाइन पर कम करके 20% किया गया और शराब पर 40%;

-भारत के Textile, Apparel & Clothing पर EU टैरिफ 12% से 0% हुआ;

-Leather & Footwear पर टैरिफ 17% से 0% हुआ;

-भारत के EU को निर्यात होने वाले 99.6% इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों पर टैरिफ 14% से 0% हुआ;

-Gems & jewellery पर टैरिफ 4% से 0% हुआ;

-भारत से EU को निर्यात होने वाले Chemical Exports के 97.5% प्रोडक्ट्स पर टैरिफ 12.8% से 0% हुआ;

-Rail Products, ships पर टैरिफ 7% से 0% हुआ;

-Marine, Seafood को Preferential Access मिलेगा और टैरिफ 26% से 0% हुआ

एक ट्रेड डील से भारत के राज्यों को 6.4 लाख करोड़ के सामान का 27 देशों को निर्यात का लाभ होगा

इस डील से परेशान U.S. Treasury Secretary Scott Bessent ने इसकी निंदा करते हुए आरोप लगाया  है कि यूरोप भारत से रूस का रिफाइंड आयल खरीद कर रूस-यूक्रेन युद्ध की फंडिंग कर रहा है जबकि इन्होने ही कुछ दिन पहले कहा था कि भारत ने हमारे टैरिफ दबाव में रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है इसका मतलब है कि अमेरिका को खुद नहीं पता वो क्या कह रहा है

इस डील से हमारे विपक्ष में खुशी नहीं है कल एक टीवी डिबेट में समाजवादी पार्टी का प्रमुख नेता कह रहा था कि कारों पर टैरिफ 10% करने से यूरोप की ही कारें बिकेंगी और भारत की कारें कौन खरीदेगा

अब इन्हें बोलने से मतलब है बिना सोचे समझे गूगल पर सर्च किया तो पता चला कि यूरोप की कारों की कम से कम कीमत 15 से 17 हज़ार यूरो है अगर औसत कीमत 16 हज़ार यूरो भी मान ली जाए तो वह 17 लाख रुपए होती है दूसरी तरफ भारत की कारों की कीमत 4. 62 लाख रुपए से लेकर अधिकतम 25. 96 लाख रुपए है

17 लाख तक की रेंज या उससे कम कीमत की बहुत कारें भारतीय बाजार में हैं और इसलिए विरोध के लिए विरोध करना ही विपक्ष का काम रह गया है

अब देखना है अमेरिका किस हद तक टैरिफ कम करने का प्रस्ताव देता है क्योंकि भारत का EU के साथ व्यापार 136.5, अमेरिका के साथ 132.1, चीन के साथ 127.7 और UAE के साथ 100 बिलियन डॉलर इसलिए ट्रंप को भारत से साथ व्यापार बढ़ाने के लिए टैरिफ का भूत उतार कर फेंकना होगा या तो EU के जैसे टैरिफ कम करने होंगे वरना भारत के पास बाजार बहुत है EU और उसके अलावा भी

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