UGC रेगुलेशन 2026 : सवर्णों खासकर ब्राह्मण वर्ग की चिंताएं; अगर विचार योग्य हैं तो उन्हें भी कुछ विचार करना होगा

सुभाष चन्द्र

मेरे लेख पर कोई UGC नियम विरोधी बकबक न करे, जो लिखा है मैंने उस पर कुछ कहना है तो कहे और बताएं कि क्या कभी मोदी ने ब्राह्मणों या सवर्ण समाज के विरुद्ध कुछ कहा है? वो हर मंदिर में जा कर माथे पर त्रिपुंड लगा कर ब्राह्मणों से पूजन करवाते हैं और तुम उन्हें हटाना चाहते हो शर्म की बात है। 

सवर्ण खासकर ब्राह्मण वर्ग सबसे ज्यादा उद्वेलित है UGC रेगुलेशन 2026 से और सबसे बड़ी शिकायत है कि मोदी सरकार ने नहीं, मोदी ने उनके साथ अत्याचार किया है जो ऐसा कानून बनाया है जिससे उनके बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया

कुछ बातें ये लोग नहीं समझ रहे जिनमें प्रमुख है कि जो कांग्रेस और पूरा विपक्ष मोदी और उसकी सरकार में बिना वजह भी कमी निकाल कर सुबह से लेकर रात तक गाली बकता फिरता है, वो UGC Regulation, 2026 पर क्यों चुप हैं; उनके सुर में सुर मिलाने वाले और हिंदुओं को नीचा दिखा कर बांग्लादेश में हो रहे हिंदुओं के नरसंहार को भी जायज कहने वाले रवीश कुमार, पुण्य प्रसून वाजपेयी, ध्रुव राठी, अजीत अंजुम और सौरव शर्मा जैसे भौंपू भी क्यों खामोश हैं?

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
यह UGC Regulation, 2026 सरकार के किसी कानून से नहीं बना है बल्कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर बना है और सुप्रीम कोर्ट ने ही जहां रोहित वेमुला और एक अन्य की माताओं के लिए वामपंथी वकील इंदिरा जयसिंह ने UGC - 2012 के regulations में सुधार के लिए याचिका दायर की थी और सुप्रीम कोर्ट ने ही OBC को इसमें शामिल करने के लिए कहा था 

एक हल्ला यह मचाया हुआ है कि Equity Committees में सामान्य वर्ग के लिए कोई स्थान नहीं दिया गया यह समिति हर शैक्षिक संस्थान में 10 सदस्यों की होगी जिसमें एक एक सदस्य SC, ST, OBC, महिला और विकलांग वर्ग से होगा यदि कोई SC महिला भी है तो उसे SC और महिला दोनों वर्ग में माना जाएगा और इस तरह सुरक्षित सदस्यों के अलावा समिति में  5, 6 या 7 सदस्य भी हो सकते हैं यहां सोचने का विषय है कि ये  5, 6 या 7 किस वर्ग से होंगे, जाहिर है General Caste के ही होंगे या कोई नई जाति बन सकती है General को वंचित करने के लिए

जो प्रावधान आपत्तिजनक है वह है कि अगर कोई SC, ST, OBC, महिला और विकलांग झूठी शिकायत करता है तो उस पर कार्रवाई का प्रावधान हटा दिया गया है लेकिन इस बात से सवर्ण वर्ग खासकर ब्राह्मणों का यह समझ लेना कि उन्हें झूठी शिकायतों पर जेल में डाल दिया जाएगा, उचित नहीं है इसका मतलब क्या यह नहीं निकाला जा सकता कि वे अपराध बोध से पहले से ही ग्रसित हैं जैसे वे यह करते हो

कुछ ढक्कन सेकुलर वैसे ब्राह्मणों के लिए कहते हैं कि हिन्दू धर्म ब्राह्मण धर्म है जो सामाजिक असमानता (Social Inequality) और विषमता (Disparity) की जड़ है लेकिन आज ब्राह्मण वर्ग उन्हीं के कहने में बहक रहे हैं एक नारा ब्राह्मणों के लिए यदा कदा दिया जाता रहा कि “"ब्राह्मणों यूरेशिया जाओ", "ब्राह्मण ढोंगी होते हैं", "ब्राह्मण आडम्बरी होते हैं", "ब्राह्मण मुक्त भारत"...

ऐसा नहीं है कि हर संस्था में हर कोई शिकायत करता फिरता है और हर कोई SC, ST, OBC झूठी शिकायत करेगा। 2019 से 2024 तक 5 साल में 704 संस्थानों में 1160 शिकायत दर्ज हुई थी जिसका मतलब औसत एक वर्ष में 704 संस्थाओं में 232 शिकायत यानी एक शिकायत भी प्रतिवर्ष नहीं हुई इसका मतलब यह भी है कि 5 साल में हर संस्थान में 1.6 शिकायत हुई अगर penalty clause झूठी शिकायत के लिए हटा भी दी गई तो इसका मतलब यह नहीं है कि सवर्णों और खासकर ब्राह्मणों के खिलाफ शिकायतों का अंबार लग जायेगा

इस रेगुलेशन में एक प्रावधान करना जरूरी है कि OBC वर्ग के मुस्लिम जातीय भेदभाव की शिकायत नहीं कर सकते क्योंकि मुसलमानों में कोई जाति नहीं मानी जाती

No comments: