बांग्लादेश 4 तरफ से दबाव में रहेगा; तारिक़ रहमान की डगर बहुत आसान नहीं होगी

सुभाष चन्द्र

बांग्लादेश के चुनाव नतीजे BNP के पक्ष में इसलिए हो गए क्योंकि अवामी लीग पर प्रतिबंध होने के वजह से कोई level Playing Field नहीं था और तारिक़ रहमान (खालिदा जिया के बेटे) प्रधानमंत्री बन सके उनकी पार्टी को 209 सीट मिली जबकि जमाते इस्लामी को को 68 सीट और उसके गठबंधन को 77 सीट मिली है।  छात्रों के समूहों ने शेख हसीना की सरकार के तख्ता पलट के लिए जो कथित आंदोलन किया था, उन्हने भी पार्टी बनाई थी The National Citizen Party(NCP) जिसने जमाते इस्लामी के साथ गठबंधन में 32 सीट लड़ी लेकिन मात्र 6 सीट मिली और वोट मिले केवल 3.05%

NCP के हालात ने एक बार फिर साबित किया कि ये आन्दोलजीवी जनता की जड़ों में जगह नहीं बना सकते भारत में किसान आंदोलन के बाद सभी किसान नेताओं की पंजाब में जमानत जब्त हुई थी एक प्रशांत किशोर था जिसने अपनी पार्टी का हल्ला मचाया लेकिन 236 में 3 सीट छोड़ कर सब पर जमानत जब्त हुई थी आज जो उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण पार्टी बनाए हैं उन्हें इन आंदोलन जीवी पार्टियों की हालत देख लेनी चाहिए आंदोलन से लालू और केजरीवाल जैसे भ्रष्ट भी पैदा होते हैं

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तारिक़ रहमान के साथ राहुल गांधी ने बहुत ख़ुफ़िया मुलाकातें कर हसीना की सरकार को उखाड़ने की योजना बनाई थी और उसके बाद भारत में भी मोदी सरकार को उखाड़ने का प्लान बनाया था मोहम्मद यूनुस ने एक तरफ जो पाकिस्तान के साथ और दूसरी तरफ चीन के साथ जो खिचड़ी पकाई थी, उसके चलते तारिक़ रहमान को भारत के साथ रिश्ते साधना इतना आसान नहीं होगा क्योंकि यूनुस पाकिस्तान से बांग्लादेश के हितों का समझौता कर चूका था और तभी पाकिस्तान की सेना बांग्लादेश में घुस चुकी थी

उधर तारिक़ रहमान भारत से शेख हसीना को बांग्लादेश को सौपने की भी जिद करेगा जो शायद मोदी/भाजपा सरकार के रहते संभव नहीं होगा

 उसका चौथा मोर्चा अंदरूनी मोर्चा है जमाते इस्लामी जिसे अब तक की सबसे ज्यादा 68 सीट मिली है जबकि उसकी अधिकतम सीट 18 थी 1991 में वह शेख हसीना की सरकार द्वारा प्रतिबंधित पार्टी थी और भारत की घोर शत्रु पार्टी है जिसके संबंध पाकिस्तानी आतंकियों के साथ भी हैं यह बात गौर करने की है कि जमाते इस्लामी को 68 में से 51 सीट उन क्षेत्रों में मिली हैं सीमाएं भारत से लगती हैं जमाते इस्लामी की जीत उन जिलों में ज्यादा हुई जो भारतीय राज्यों से लगते है जैसे बंगाल, असम, मेघालय और त्रिपुरा जिनमें शामिल हैं सतखीरा, कुश्तिया और रंगपुर ऐसे ही बिहार के सीमावर्ती जिलों में ओवैसी के पार्टी को सीट मिलती हैं जमाते इस्लामी की इन क्षेत्रों में जीत का मतलब है भारत में घुसपैठ बढ़ाने की और कोशिश हो सकती है

भारत के 2026 - 27 के बजट में बांग्लादेश को 60 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है विकास योजनाओं के लिए और इसके लिए बवाल काटा जा रहा है कि जैसे यह मोदी के राज में ही हुआ है और जब वहां हिंदुओं का संहार किया गया ऐसे विरोध करने वाले भूल जाते हैं कि बांग्लादेश में 1 करोड़ 30 लाख हिंदू रहते है और दुश्मनी तो जितनी मर्जी बढ़ा ली जाए लेकिन उसके परिणाम फिर हिंदुओं को ही भुगतने पड़ेंगे 

बांग्लादेश को कांग्रेस राज में -

2011-12 में 8.81 करोड़ दिया गया; 

2012-13  में 281.20;

2013-14 में 604.66; उसके बाद मोदी सरकार आने के बाद 

2014-15 में 155.68 करोड़;

2015-16 में 250 करोड़ जो 2023 -24 तक 200  करोड़ रहा;

2024-25  में 120 करोड़;

2025-26 में 120 करोड़ और 

2026- 27 में 60 करोड़ (यानी इस वर्ष)

ऐसा संभव नहीं है कि हर नीति सरकार 140 करोड़ लोगो की अपनाए क्योंकि हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है लेकिन सरकार को अनेक पहलुओं को ध्यान में रख कर कूटनीति करनी होती है

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