ममता बनर्जी ने बड़ी कृपा की जो चुनाव आयोग की तरह सुप्रीम कोर्ट को भी भाजपा का एजेंट नहीं कहा; ममता की दाल नहीं गली सुप्रीम कोर्ट में; सिब्बल/सिंघवी/दीवान फेल हो गए

सुभाष चन्द्र

4 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में SIR के खिलाफ ममता की याचिका पर सुनवाई से 2 दिन पहले ममता बनर्जी CEC ज्ञानेश कुमार से मिलने गई थी जिसकी आवश्यकता नहीं थी जब कोर्ट में सुनवाई होनी थी। लेकिन ममता ने राजनीति करनी थी और उसके अनुसार आयोग के कार्यालय से बाहर निकल कर उसने ड्रामा करते हुए कहा

-हमें अपमानित और लज्जित किया जिस वजह से हमने मीटिंग का बहिष्कार किया;

-CEC “extremely arrogant और झूठे हैं” और दावा किया कि वो भाजपा के इशारों पर काम कर रहे हैं;

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-आयोग ने 58 लाख लोगों के नाम बिना जांच काट दिए - आयोग backdor mechanism से हमारे लोगों के नाम काट रहा है; (मतलब 24.18 लाख मरे हुए लोग भी आपको वोट देते थे);

-आयोग वोटरों के नाम काटने के लिए AI का उपयोग कर रहा है यह काम बंगाल में किया जा रहा है, भाजपा शासित राज्यों में नहीं;

-SIR बंद होना चाहिए और CEC पर महाभियोग शुरू होना चाहिए -

ये बातें सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक 2 दिन पहले कही और सुनवाई के दिन ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में खुद जिरह कर कोर्ट को राजनीति का अखाड़ा बनाते हुए कहा -

-लोकतंत्र को बचा लीजिए;

-चुनाव आयोग का SIR वोट काटने के लिए किया जा रहा है, वोट जोड़ने के लिए नहीं;

-चुनाव आयोग whatsapp commision की तरह काम कर रहा है;  

-आयोग चुनाव के समय केवल बंगाल को निशाना बना रहा है -

परसों सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस बागची और जस्टिस अंजारिया की पीठ ने सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि SIR के काम में कोई बाधा सहन नहीं की जाएगी जो भी आदेश या स्पष्टीकरण देने की जरूरत होगी, हम देंगे लेकिन कोई बाधा नहीं डालने दी जाएगी, CJI सूर्यकांत ने कहा

पीठ ने बंगाल की ममता सरकार को यह भी आदेश दिए कि वह आयोग को Group - B अधिकारियों को आयोग को SIR के कार्य के सौपे जिससे वह “ECI-MIcro-Observers” को हटा सके SIR से संबंधित शिकायतों के निपटान के अंतिम आदेश Electoral Registration Officer ही कर सकेंगे, micro officers और बाद में Group-B अधिकारी उन्हें सहयोग करेंगे। बेंच ने 14 फरवरी तक समय बढ़ा दिया आयोग को electoral list publish करने के लिए

ममता बनर्जी ने एक खास मांग की थी कि आयोग को निर्देश दिए जाएं कि कोई भी Instruction वो whatsapp पर न दे लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उस पर कोई आदेश नहीं दिए यानी whatsapp जारी रहेगा

4 फरवरी को बंगाल सरकार की तरफ से कपिल सिब्बल भी पेश हुए थे, कल सरकार के तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए और ममता की तरफ से श्याम दीवान थे यानी SIR को रोकने के लिए बंगाल 3 वरिष्ठ वकीलों की फीस जनता के पैसे से खर्च कर रहा है जो लाखों की फीस एक दिन में लेते हैं यह एक अलग तरह की लूट है

सुप्रीम कोर्ट के कल के आदेश पर मेरे एक मित्र ने लिखा कि - 

“जो सख्ती केंद्र सरकार को चुनाव आयोग को सुरक्षा देकर करनी थी, वह सुप्रीम कोर्ट कर रहा है, लाचार केंद्र के कारण चुनाव आयोग भी असहाय दिख रहा है बंगाल में दोनों फेल हो चुके हैं”

अब यह कहना तो हद पार करना हो गया चुनाव आयोग ने लट्ठ बजा रखा है जिसकी वजह से ममता सुप्रीम कोर्ट भागती फिर रही है जहां तक सुरक्षा देने का सवाल है वह राज्य सरकार का काम है और जरूरत पड़ने पर केंद्र CRPF की सहायता दे भी रहा है अगर केंद्र और आयोग को विफल कहना है तो सुप्रीम कोर्ट को भी विफल कहना होगा क्योंकि उसके निर्देशों के बावजूद  ममता ढीला रवैया अपना रही है केंद्र वैसे भी आयोग के काम में दखल नहीं दे सकता बिना दखल ममता आयोग को भाजपा का एजेंट कह रही है और अगर दखल दिया केंद्र ने तो पता नहीं क्या कहेगी

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