बंगाल और तमिलनाडु की राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव का क्या मतलब है?

सुभाष चन्द्र

चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 37 सीटों के 16 मार्च चुनाव की तारीख तय की है। 

इन 37 सीटों में 5-5 सीट तमिलनाडु और बंगाल की हैं 

इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव मार्च/अप्रैल 2026 में होने हैं और जिन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव होना है वो 2 अप्रैल को रिक्त होंगी 

इसलिए विधानसभा चुनावों से पहले राज्यसभा की इन राज्यों से सीट भरना उचित नहीं है क्योंकि जो आज विधानसभा के सदस्य हैं, वे हो सकता है अगली विधानसभा में ना हों और इस तरह उन्हें  16 मार्च के चुनाव में वोट देने का अधिकार नहीं होना चाहिए

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इसलिए राज्यसभा की दोनों  राज्यों से 10 सीट विधानसभा चुनाव होने तक रिक्त रखी जानी चाहिए

राज्यसभा की सीट कुछ समय तक रिक्त रह सकती हैं जैसे बंगाल से एक सीट 5 जनवरी, 2026 से खाली है शायद इसलिए कि आने वाले चुनाव के साथ उसे भी भर लिया जायेगा यानी ये सीट अप्रैल, 2026 तक खाली रहेगी इस तरह वे 10 भी एक महीने के लिए खाली रखी जा सकती हैं जब तक अगली विधानसभा मई में गठित ना हो जाए

2021 विधानसभा के लिए दोनों राज्यों में चुनाव की घोषणा 26 फरवरी, 2021 को हुई थी और जाहिर है इस वर्ष भी इसी के आसपास घोषणा की जाएगी उसके बाद तमिलनाडु में चुनाव 6 अप्रैल को हुए और बंगाल में 27 मार्च से 29 अप्रैल तक हुए दोनों राज्यों में चुनाव नतीजे 2 मई, 2021 को घोषित हुए थे

विधानसभा चुनावों की तारीख की घोषणा के बाद राज्यसभा का चुनाव इन दोनों राज्यों से 16 मार्च को कराना तकनीकी रूप से सही नहीं होगा लेकिन चुनाव आयोग ऐसा करता रहा है जबकि इस तरह के चुनाव से राज्य का उच्च सदन में सही प्रतिनिधित्व नहीं हो सकता विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद तो विधायकों को तकनीकी रूप से राज्यसभा के चुनाव में वोट देने के लिए अयोग्य माना जाना चाहिए

मुझे समझ नहीं आया अभी तक किसी राजनीतिक दल या संविधान विशेषज्ञ ने इस पर विचार क्यों नहीं किया ऐसे चुनाव को रोकने के लिए तो सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर होनी चाहिए

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