फरवरी 27 को राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा बिना ट्रायल के अरविन्द केजरीवाल और अन्य को बिना ट्रायल के दोषमुक्त करना न्याय प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। जब केजरीवाल कोर्ट जाते हैं तो हँसते हुए, क्यों? क्या उनको न्याय मालूम था। गौरतलब बात है कि जब राउज एवेन्यू कोर्ट में याचिका दायर की थी तब इसी कोर्ट ने केस चलाने की बात कही थी लेकिन आज वही कोर्ट चर्चा है कि बिना ट्रायल के सबको बरी कर देती है और राष्ट्रीय मीडिया बरी करने पर सवाल करने की बजाए केजरीवाल से ज्यादा उछल रहा है। जांच एजेंसी भी इस बात को बार-बार दोहराती रही है कि केजरीवाल-सिसोदिया ने सबूतों को तहस-नहस करने का काम किया है। बार-बार सिम कार्ड, मोबाईल फोन जो तोड़े गए उसका आज तक कोई डिटेल नहीं मिला जिसका जिक्र आज के निर्णय में भी है।
इस घोटाले के नाम पर ही दिल्ली का पूरा चुनाव ही लड़ा गया था मगर केजरीवाल आज जिस तरह से फूट फूट कर रोए उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले साल में पंजाब के चुनाव में यही घोटाला आम आदमी पार्टी को फायदा और सहानुभूति भी दिला सकता है। अरविंद केजरीवाल के पास आज भी कुछ सवालों के जवाब नहीं है कि आखिर जब शराब नीति ठीक थी तो उस पर जांच शुरु होते ही उसको वापस क्यों लिया गया और ठेकेदारों के परसेंटेज बढ़ाने का उद्देश्य क्या था? भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने ये भी सवाल उठाए कि अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचारी हैं और उनके पास इसको साबित करने के लिए कोई प्रमाण नहीं है।
कांग्रेस नेता राजा वारिंग ने फैसले पर उठाए सवाल
चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी कार्यालय में ढोल बजाए गए और भांगड़ा किया गया और मिठाइयां भी बांटी गईं। वहीं दूसरी तरफ, विपक्षी कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह राजा वारिंग ने शराब घोटाला मामले में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को बरी किए जाने पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अदालत के फैसले पर सवाल उठाए।
क्या बोले राजा वारिंग
कांग्रेस नेता वारिंग ने केजरीवाल और सिसोदिया को बधाई देते हुए कहा कि, केंद्र सरकार ने बहुत बड़े आरोप लगाए। उन्हें डेढ़ साल तक जेल में रखा। कांग्रेस नेता ने कहा कि, वे सभी 6-8 महीने से लेकर डेढ़ साल तक जेल में रहे। वारिंग ने कहा, "मैंने सुना है कि मर्डर या गंभीर मामलों में लेट बेल मिल जाती है। लेकिन, अगर इतने बड़े आरोप नहीं थे, तो वे इतने लंबे समय तक जेल में क्यों रहे? तो अगर इतने बड़े आरोप थे, तो उन्हें क्लीन चिट कैसे मिली? अब तो सम्मानित न्यायपालिका, केजरीवाल या पीएम मोदी, अमित शाह ही बता सकते हैं कि यह कैसे हुआ?
हालांकि, सीबीआई ने इस फैसले के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में अपील करने का निर्णय लिया है. अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) का मानना है कि अपील आवश्यक है क्योंकि जांच के कई पहलुओं को अधीनस्थ अदालत द्वारा या तो "नजरअंदाज किया गया है या उन पर विचार नहीं किया गया है." सीबीआई के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "सीबीआई ने अधीनस्थ अदालत के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में तत्काल अपील करने का फैसला किया है क्योंकि जांच के कई पहलुओं को या तो नजरअंदाज किया गया है या उन पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया गया है."
आज से 176 साल पहले 1850 में मिर्ज़ा ग़ालिब एक शेर लिख गये थे... आज उसी शेर के नशे में धुत्त दिखी दिल्ली... वो शेर यह है कि.....
No comments:
Post a Comment