कहीं हिंदुओं की हत्या, कहीं बच्चियों का बलात्कार: 50+ घटनाओं से समझिए कितना ‘शांतिपूर्ण’ रहा 2026 का रमजान, इस्लामी मुल्क में कट्टरपंथियों ने मुस्लिमों को भी नहीं छोड़ा

                                                                                                          प्रतीकात्मक तस्वीर (साभार: AI)
रमजान को इस्लाम में सबसे पाक महीना माना जाता है। मुस्लिम दावा करते हैं कि यह माह इबादत, सब्र, जकात (दान) और सबसे बढ़कर आपसी दुश्मनी भुलाकर भाईचारे से रहने का है। लेकिन बड़ा सवाल यह खड़ा होता है-जब ‘शांति’ और ‘रहमतों’ का यह पाक महीना चल रहा होता है, तब हिंसा, संघर्ष और खून-खराबे की खबरों में मुस्लिमों की संलिप्ता क्यों सामने आती है?

एक तरफ तो मजहबी मंचो से संदेश दिया जाता है कि रमजान में सिर्फ सबाब के काम होने चाहिए वहीं दूसरी तरफ भड़काऊ बयानबाजियों से सोशल मीडिया भरा दिखता है। 2026 में भी यही सब हुआ। इस साल सिर्फ इस्लामी कट्टरपंथियों ने ही नहीं, बल्कि इस्लामी मुल्कों ने भी इस महीने का लिहाज नहीं किया। मात्र 30 दिनों में अनगिनत हत्या-लूटपाट-मारकाट-हिंसा-बलात्कार की घटनाएँ घटीं।

अब ऑपइंडिया उन्हीं घटनाओं में से 50 घटनाओं को आपके लिए सूचीबद्ध कर रहा है। इसमें दिल्ली में हुए तरुण की हत्या का केस भी शामिल है और अफगानिस्तान के अस्पताल में मारे गए 400 लोगों की जानकारी भी है। पढ़िए और निर्णय करिए कि रमजान के महीने को क्या वाकई इस्लामी कट्टरपंथी इबादत, सब्र और जकात का माह मानते हैं।

मिडिल ईस्ट: बारूद के ढेर पर रमजान और गहराता मानवीय संकट

रमजान के इस दौर में मिडिल ईस्ट के हालात बेहद नाजुक और तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेषकर ईरान में सत्ता के शीर्ष स्तर पर मची उथल-पुथल और वहाँ हो रहे बड़े हमलों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए भीषण सैन्य प्रहारों ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे देश के भीतर अस्थिरता का माहौल और गहरा गया है। हैरानी की बात यह है कि शांति के इस महीने में भी हिंसा का चक्र रुकने के बजाय तेज हो गया है।

ईरान ने इन हमलों के कुछ ही घंटों के भीतर आक्रामक रुख अपनाते हुए जवाबी कार्रवाई की और क्षेत्र के कई देशों पर मिसाइलों व ड्रोनों से हमला बोल दिया। इस जवाबी कार्रवाई की जद में न केवल सैन्य प्रतिद्वंद्वी आए, बल्कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और कुवैत जैसे कई मुस्लिम बहुल देश भी शामिल थे। युद्ध और हमलों के इस दौर ने इस पवित्र महीने (रमजान) के दौरान क्षेत्र में एक गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर दिया है, जहाँ आपसी टकराव और सैन्य वर्चस्व की जंग इबादत के सुकून पर भारी पड़ती दिख रही है।

1. कुवैत में कोहराम: दूतावास पर हमला और ईरान का ‘रमजान ऑफेंसिव’

2 मार्च 2026 को कुवैत सिटी उस वक्त दहल गई जब ईरान के तथाकथित ‘रमजान ऑफेंसिव’ के तहत अमेरिकी दूतावास को सीधा निशाना बनाया गया। इस हमले में मिसाइलों और घातक ड्रोनों (UAV) का तालमेल बिठाकर आसमान से मौत बरसाई गई, जिससे शहर का आकाश काले धुएँ के गुबार से भर गया। हालाँकि कुवैत की रक्षा प्रणाली ने मुस्तैदी दिखाते हुए कई ड्रोनों को हवा में ही ढेर कर दिया, लेकिन इसके बावजूद इस भीषण हमले ने एक व्यक्ति की जान ले ली और 32 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

किसी देश के राजनयिक मिशन (Diplomatic Mission) पर इस तरह का सीधा प्रहार न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों की सरेआम धज्जियाँ उड़ाता है, बल्कि यह भी साफ करता है कि ईरान अब अपने पड़ोसी अरब देशों में हिंसा फैलाने से गुरेज नहीं कर रहा है। शांति के इस पवित्र महीने (रमजान) में की गई इस सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को एक खतरनाक युद्ध के मैदान में तब्दील कर दिया है।

2. तेल अवीव में कोहराम: रिहायशी इलाकों पर ईरानी बैलिस्टिक मिसाइलों का कहर

1 मार्च 2026 को ईरान द्वारा इजरायल पर किए गए बड़े पैमाने के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों ने क्षेत्रीय संघर्ष की आग को और भड़का दिया है। हालाँकि इजरायल की ‘आयरन डोम’ रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया, लेकिन हमलों की भारी तादाद के कारण एक मिसाइल सुरक्षा घेरे को भेदते हुए सीधे ‘बीट शेमेश’ के रिहायशी इलाके में जा गिरी। इस भीषण धमाके ने पल भर में तबाही मचा दी, जिसमें 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और कुल मृतकों का आँकड़ा 12 तक पहुँच गया।

इस हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 150 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। जिस तरह से मिसाइल रिहायशी इलाके में गिरी, वह साफ दर्शाता है कि निशाना सैन्य ठिकाने नहीं बल्कि निर्दोष आम नागरिक थे। रमजान जैसे पवित्र महीने में की गई यह हिंसक कार्रवाई न केवल मानवीय संवेदनाओं को झकझोरती है, बल्कि ईरान द्वारा किए जाने वाले मजहबी और शांति के दावों पर भी गंभीर सवालिया निशान खड़े करती है।

3. खाड़ी देशों में खौफ: ईरान का मिसाइल हमला और संप्रभुता पर चोट

28 फरवरी 2026 को खाड़ी क्षेत्र के प्रमुख शहरों ‘अबू धाबी, दुबई और दोहा‘ पर ईरान ने एक साथ मिसाइलें दागकर पूरे इलाके को दहला दिया। ईरान के इस ‘मिसाइल ब्लिट्ज’ का निशाना न केवल अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे, बल्कि नागरिक और रिहायशी बुनियादी ढाँचों को भी जानबूझकर खतरे में डाला गया। इस हमले की भयावहता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अबू धाबी में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दुबई के बुर्ज खलीफा जैसे व्यस्त इलाके के पास भी भीषण धमाकों की खबरें आईं।

इन हमलों के कारण पैदा हुए सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए पूरे मिडिल ईस्ट का हवाई क्षेत्र (Airspace) तुरंत बंद करना पड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का पहिया थम गया और दुबई एयरपोर्ट पर भारी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यह घटना स्पष्ट रूप से रेखांकित करती है कि क्षेत्रीय वर्चस्व की लड़ाई में ईरान अब अपने ही मुस्लिम पड़ोसी देशों की सुरक्षा और संप्रभुता को ताक पर रखने से भी पीछे नहीं हट रहा है।

सरहदों पर जंग: रमजान में पाकिस्तान-अफगानिस्तान का खूनी टकराव

दक्षिण एशिया में इस पवित्र महीने (रमजान) के दौरान भी शांति की उम्मीदें तब धराशायी हो गईं, जब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव ने एक भीषण सैन्य टकराव का रूप ले लिया। पाकिस्तानी एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा के भीतर घुसकर राजधानी काबुल, कंधार और कई अन्य इलाकों में जोरदार हवाई हमले किए। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया है कि पाकिस्तान ने जानबूझकर नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया है।

इन हमलों की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि काबुल में एक अस्पताल भी इस बमबारी की चपेट में आ गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस भीषण सैन्य कार्रवाई में अब तक लगभग 400 लोगों की जान जा चुकी है और 250 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हैं। रमजान के पाक दिनों में अस्पतालों और रिहायशी इलाकों पर हुए इन हमलों ने न केवल मानवीय संकट को गहरा कर दिया है, बल्कि दो पड़ोसी मुस्लिम देशों के बीच की कड़वाहट को भी चरम पर पहुँचा दिया है।

4. कराची में कोहराम: ईरान समर्थित भीड़ का कोहराम और दूतावास पर हमला

ईरान के सुप्रीम लीडर की मौत की खबर के बाद पाकिस्तान के कराची में हिंसा की आग भड़क उठी, जिसने पूरे शहर को अराजकता की चपेट में ले लिया। 1 मार्च 2026 को ईरान समर्थक एक उग्र भीड़ ने अमेरिकी वाणिज्य दूतावास (Consulate) को निशाना बनाने की कोशिश की, जिससे हालात पूरी तरह बेकाबू हो गए। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने न केवल पुलिस चौकियों को आग के हवाले कर दिया, बल्कि कई सरकारी और अंतरराष्ट्रीय राजनयिक संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुँचाया।

हिंसा का यह सिलसिला केवल कराची तक ही सीमित नहीं रहा। स्कार्दू में भी उग्र भीड़ ने संयुक्त राष्ट्र (UN) के दफ्तर में आग लगा दी। इन भीषण झड़पों और हिंसक वारदातों में अब तक 22 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 120 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पवित्र महीने (रमजान) के बीच हुई इस खूनी हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था और कानून के इकबाल पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

5. अफगानिस्तान के खोस्त और पक्तिका पर पाकिस्तानी हवाई हमले

28 फरवरी 2026 को पाकिस्तान एयरफोर्स के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा लांघकर खोस्त और पक्तिका प्रांतों में भीषण बमबारी की। पाकिस्तान ने इन हमलों को आतंकी ठिकानों के खिलाफ की गई कार्रवाई बताया, लेकिन इसकी भारी कीमत निर्दोष लोगों को चुकानी पड़ी। इस सैन्य ऑपरेशन में कम से कम 8 आम नागरिकों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और मासूम बच्चे भी शामिल हैं।

इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुँच गया है; अफगान तालिबान ने इसे अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार देते हुए जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। रमजान के इस पवित्र महीने में छिड़ी इस जंग ने सीमावर्ती इलाकों में भारी तबाही मचाई है, जिसके कारण हजारों परिवारों को अपनी जान बचाने के लिए घर-बार छोड़कर पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है।

6. रमजान की शुरुआत और सरहद पर मातम: नंगरहार-पक्तिका में पाकिस्तानी सैन्य प्रहार

रमजान के पवित्र महीने के शुरुआती दिनों में, जहाँ दुनिया शांति की उम्मीद कर रही थी, वहीं 22 फरवरी 2026 को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के नंगरहार और पक्तिका प्रांतों में एक और बड़ा सैन्य अभियान चलाकर तनाव को चरम पर पहुँचा दिया। पाकिस्तान ने इन हमलों को आतंकवाद के खिलाफ एक जरूरी कार्रवाई करार दिया, लेकिन इस सैन्य ऑपरेशन की भारी कीमत आम जनता को चुकानी पड़ी।

इस भीषण हमले में 17 अफगान नागरिकों की जान चली गई, जिससे दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से मौजूद कड़वाहट और ज्यादा बढ़ गई है। इबादत और बरकत के इन शुरुआती दिनों में हुई इस खूनी घटना ने शांति की तमाम उम्मीदों को तोड़ दिया है और सीमावर्ती इलाकों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

7. बागलकोट में बवाल: शिवाजी जयंती के जुलूस पर मस्जिद से पथराव

कर्नाटक के बागलकोट से सांप्रदायिक तनाव की एक भयावह घटना सामने आई है, जिसने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती के उपसाक्ष्य में निकाले जा रहे गौरवशाली जुलूस को उस वक्त निशाना बनाया गया, जब वह ‘पंका मस्जिद’ के सामने से गुजर रहा था। आरोप है कि वहाँ मौजूद कट्टरपंथियों ने मस्जिद की ओर से जुलूस पर अचानक चप्पलें और पत्थर बरसाने शुरू कर दिए, जिससे इलाके में अफरा-तफरी मच गई।

इस हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उपद्रवियों ने ड्यूटी पर तैनात जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) सिद्धार्थ गोयल तक को नहीं बख्शा। हमले में उनके सिर और गर्दन पर चोटें आईं। उनकी वर्दी पर लगे खून के धब्बे इस बात की गवाही दे रहे थे कि हमलावरों के मन में न तो प्रशासन का कोई खौफ है और न ही कानून का सम्मान। शांतिपूर्ण जुलूस पर हुए इस सुनियोजित हमले ने एक बार फिर बढ़ते कट्टरपंथ और बिगड़ते सामाजिक सद्भाव की चिंताजनक तस्वीर पेश की है।

8. जबलपुर में तनाव: मंदिर की आरती और कट्टरपंथी हमला

मध्य प्रदेश के जबलपुर की संवेदनशील सिहोरा तहसील से कट्टरपंथी मानसिकता की एक बेहद चिंताजनक घटना सामने आई। 19 फरवरी 2026 की रात, जब हिंदू समाज अपनी परंपरा के अनुसार दुर्गा मंदिर में शाम की आरती कर रहा था, उसी दौरान पास की मस्जिद में नमाज का समय भी था। शांतिपूर्ण माहौल तब अचानक तनाव में बदल गया जब एक युवक ने कथित तौर पर मंदिर की ग्रिल को नुकसान पहुँचाया। यह केवल संपत्ति का नुकसान नहीं, बल्कि सीधे तौर पर हिंदुओं की धार्मिक आस्था और श्रद्धा पर किया गया प्रहार था।

जैसे ही स्थानीय लोगों ने इस हरकत का विरोध किया, वहाँ मौजूद कट्टरपंथी समूह ने हिंसक रुख अपनाते हुए भारी पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले ने पूरे इलाके को सांप्रदायिक तनाव की आग में झोंक दिया। मंदिर परिसर में हुई इस तोड़फोड़ और उसके बाद शुरू हुई हिंसा ने स्थानीय प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी, जो स्पष्ट रूप से एक सुनियोजित कट्टरपंथी सोच का परिणाम नजर आती है।

9. हैदराबाद में तनाव: शिवाजी जयंती के नारों पर अंबरपेट में भारी बवाल

हैदराबाद के अंबरपेट इलाके से भी कट्टरपंथी मानसिकता का भी मामला है, जहाँ शिवाजी जयंती के जुलूस को निशाना बनाया गया। विवाद तब शुरू हुआ जब शोभायात्रा एक स्थानीय मस्जिद के पास से गुजर रही थी और वहाँ मौजूद कट्टरपंथी तत्वों ने बज रहे संगीत और ‘मंदिर बनाएँगे’ जैसे गानों पर कड़ी आपत्ति जताई। देखते ही देखते यह विरोध तीखी बहस और फिर हिंसक धक्का-मुक्की में बदल गया, जिससे पूरे क्षेत्र में डर का माहौल पैदा हो गया।

अक्सर देखा गया है कि ‘प्रार्थना में खलल’ का तर्क देकर हिंदू सांस्कृतिक और धार्मिक अभिव्यक्ति को दबाने की कोशिश की जाती है, और यहाँ भी वही पैटर्न नजर आया। स्थिति को बेकाबू होते देख प्रशासन को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ा और इलाके में अगले चार दिनों के लिए धारा 144 (कर्फ्यू जैसी पाबंदी) लागू कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में 8 उपद्रवियों को गिरफ्तार किया। यह घटना दर्शाती है कि कैसे एक उत्सव को मजहबी कट्टरता के जरिए सांप्रदायिक तनाव में झोंक दिया गया।

10. महबूबनगर में खौफनाक वारदात: सोशल मीडिया पोस्ट पर हिंदू युवक को मॉब लिंचिंग की कोशिश

तेलंगाना के महबूबनगर जिले से कट्टरपंथी हिंसा की एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने सबको झकझोर कर रख दिया है। यहाँ संतोष नामक एक हिंदू युवक पर करीब 20-25 लोगों की उग्र भीड़ ने सिर्फ इसलिए जानलेवा हमला कर दिया क्योंकि उसने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत से जुड़ी एक पोस्ट सोशल मीडिया पर साझा की थी। 1 मार्च को डाली गई यह स्टोरी स्थानीय ग्रुप्स में वायरल हो गई, जिससे नाराज होकर कट्टरपंथी रात करीब 9 बजे संतोष की दुकान पर जा पहुँचे और उसे लात-घूंसों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।
पीड़ित संतोष का कहना है कि भीड़ ने उसे जमीन पर गिराकर कुचलने की कोशिश की और अगर सामने वाले दुकानदार ने हिम्मत दिखाकर उसे बाहर न निकाला होता, तो उसकी जान भी जा सकती थी। हमलावरों का दुस्साहस इतना था कि वे आधी रात के बाद भी उसे दोबारा मारने के इरादे से उसकी दुकान के आसपास चक्कर काट रहे थे। इस मामले में पुलिस ने 11 लोगों को आरोपित बनाया गया, जिनमें से 9 को गिरफ्तार किया था, हालाँकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी।

11. बेंगलुरु में सनसनीखेज वारदात: रमजान के दौरान मंगेतर की गला काटकर हत्या

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से भी रोंगटे खड़े कर देने वाली वारदात सामने आई, जहाँ रमजान के पवित्र महीने के बीच 20 वर्षीय मोहम्मद सबील ने अपनी ही नाबालिग मंगेतर जोया की बेरहमी से हत्या कर दी। यह खौफनाक वारदात डीजे हाली इलाके में 16 मार्च 2026 की सुबह करीब 6 बजे हुई। पुलिस के अनुसार, जोया के नाबालिग होने के बावजूद दोनों की सगाई हो चुकी थी और वे जल्द ही निकाह करने वाले थे। घटना वाले दिन सबील जोया को अपने एक रिश्तेदार के घर ले गया था, जहाँ किसी बात को लेकर दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई।

विवाद इतना बढ़ा कि सबील ने आपा खो दिया और गुस्से में एक धारदार हथियार से जोया की गर्दन काट डाली, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वारदात को अंजाम देकर सबील तुरंत वहाँ से फरार हो गया। करीब एक घंटे बाद जब सबील के रिश्तेदार घर लौटे, तो उन्हें जमीन पर जोया का खून से लथपथ शव मिला। परिवार की सूचना पर पहुँची पुलिस ने मामले की जाँच शुरू की और फरार आरोपित सबील की सरगर्मी से तलाश की। पवित्र महीने (रमजान) में हुई इस क्रूर हत्या ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है।

12. दिल्ली में होली पर खूनी खेल: गुब्बारे के मामूली विवाद में तरुण की पीट-पीटकर हत्या

देश की राजधानी दिल्ली के उत्तम नगर (हस्तसाल पुनर्वासित कॉलोनी) से एक दिल दहला देने वाली घटना हुई, जहाँ होली की खुशियाँ मातम में बदल गईं। विवाद की शुरुआत एक बेहद मामूली बात से हुई, जब हिंदू पीड़ित तरुण के परिवार की 11 साल की बच्ची छत से होली खेल रही थी। उसने नीचे खड़े अपने पिता की ओर पानी का गुब्बारा फेंका, जो गलती से सड़क पर गिर गया और उसका पानी पड़ोस की एक मुस्लिम महिला पर जा गिरा। परिवार का कहना है कि उन्होंने तुरंत माफी भी माँगी, लेकिन मुस्लिम समुदाय की उस महिला और उसके परिवार ने बात सुनने के बजाय झगड़ा शुरू कर दिया और अपने रिश्तेदारों को बुला लिया।

घटना के करीब एक घंटे बाद, जब 26 वर्षीय तरुण अपने दोस्त के साथ होली खेलकर बाइक से घर लौट रहा था, तभी 15-20 लोगों की इस्लामी उग्र भीड़ ने उसे रास्ते में घेर लिया। भीड़ ने तरुण पर लोहे की रॉड, ईंटों और पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। तरुण के दादा मान सिंह ने रुंधे गले से बताया कि हमलावरों ने उसे बेरहमी से पीटा और जब वह अधमरा होकर सड़क पर गिर गया, तब उसके सीने पर एक भारी पत्थर दे मारा। अस्पताल में इलाज के दौरान तरुण ने दम तोड़ दिया। एक छोटे से गुब्बारे से शुरू हुआ यह विवाद कट्टरपंथी मानसिकता के कारण एक हँसते-खेलते युवक की जान ले बैठा।

13. एटा में होली पर खूनी संघर्ष: रंग गिरने के बहाने दलित युवक को मरणासन्न किया

दिल्ली के उत्तम नगर जैसी ही एक और हृदयविदारक घटना उत्तर प्रदेश के एटा जिले से सामने आई थी, जहाँ होली की खुशियों के बीच कट्टरपंथी हिंसा ने एक दलित युवक के परिवार को निशाना बनाया। 4 मार्च 2026 की रात करीब 8 बजे 22 वर्षीय आकाश अपने घर के बाहर होली खेल रहा था। इसी दौरान मोहल्ले के तीन सगे भाई ‘अरबाज, शाहबाज और मुस्तफा’ वहाँ से गुजरे और उनके कपड़ों पर गलती से रंग गिर गया। इस मामूली बात पर तीनों ने आकाश की माँ और बहन को भद्दी गालियाँ देना शुरू कर दिया। जब आकाश ने विरोध किया, तो आरोपितों ने उसे जमीन पर गिराकर लाठी-डंडों से बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

हमले की क्रूरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अरबाज ने अपने पास मौजूद तमंचे (पिस्तौल) की बट से आकाश के सिर पर जोरदार प्रहार किया, जिससे वह लहूलुहान होकर गिर पड़ा। जब आकाश की बहन बीना और भाभी वर्षा उसे बचाने दौड़ीं, तो मुस्तफा और अरबाज ने उनके साथ भी मारपीट की। जाते-जाते आरोपितों ने पीड़ित परिवार को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी देते हुए कहा कि ‘तुम्हें यहाँ रहने नहीं देंगे।’

14. दिल्ली में दरिंदगी: हलाल मीट शॉप के शटर के पीछे मासूम से हैवानियत

देश की राजधानी दिल्ली के द्वारका इलाके से रमजान के दौरान ही इंसानियत को तार-तार कर देने वाली एक जघन्य घटना सामने आई। गोयला डेयरी के पास एक 65 वर्षीय मुस्लिम व्यक्ति ने 6 से 9 साल की एक मासूम हिंदू बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया। वारदात 16 मार्च 2026 को हुई, जब बच्ची अपनी छोटी बहन के साथ स्कूल के पास खेल रही थी। तभी पास में हलाल मीट की दुकान चलाने वाले इस आरोपित ने बच्ची को कुछ देने के बहाने फुसलाया और अपनी हलाल मीट शॉप के भीतर ले गया। वहाँ दुकान का शटर गिराकर उसने मासूम के साथ दरिंदगी की।

इस खौफनाक घटना का खुलासा तब हुआ जब बच्ची की माँ और एक रिश्तेदार ने आरोपित को रंगे हाथों पकड़ा, जिसके बाद इलाके में भारी हंगामा और हाथापाई शुरू हो गई। बच्ची ने रोते हुए यह भी बताया कि उस मुस्लिम शख्स ने पहले भी उसके साथ गलत काम किया था। स्थानीय लोगों के विरोध के बाद पुलिस ने उसको गिरफ्तार किया।

15. रायसेन किले पर अराजकता: ऐतिहासिक तोप चलाकर लगाए ‘ईरान’ के समर्थन में नारे

मध्य प्रदेश के रायसेन किले से एक विवादित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस वीडियो में कुछ मुस्लिम युवक ऐतिहासिक किले की पहाड़ी पर खड़े होकर ‘अल्लाह-हू-अकबर’ के नारे लगाते और ‘हम ईरान का साथ देने जा रहे हैं‘ जैसी बातें कहते हुए दिखाई दे रहे हैं। हद तो तब हो गई जब इन युवकों ने कानून की धज्जियाँ उड़ाते हुए किले की एक प्राचीन तोप में माचिस से आग लगा दी। आग लगते ही एक जोरदार धमाका हुआ और पूरा इलाका धुएँ से भर गया, जबकि वीडियो में नीचे पूरा शहर साफ नजर आ रहा था।

इस घटना को सोशल मीडिया पर एक खास उकसावे वाले संदेश के रूप में पेश किया गया, जिससे स्थानीय लोगों में रोष फैल गया। रायसेन के पटेल नगर निवासी बृजेश चावरिया की शिकायत पर पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और मामले की गंभीरता को देखते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए युवकों की पहचान रायसेन के शादाब कुरैशी और भोपाल के यूसुफ शेख, वसीम मोहम्मद व पप्पू उर्फ सलमान कुरैशी के रूप में हुई है। ऐतिहासिक धरोहर के साथ खिलवाड़ और इस तरह की भड़काऊ नारेबाजी ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है।

16. रायपुर में बवाल: मरही माता मंदिर पर पथराव और रंजिश की खूनी जंग

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर का मौदहापारा इलाका 16 मार्च 2026 को हिंसा और पत्थरबाजी की चपेट में आया। विवाद की शुरुआत दो पक्षों के बीच टकराव से हुई, जिसने देखते ही देखते उग्र रूप ले लिया और मरही माता मंदिर के पास जमकर ईंट-पत्थर चले। सोशल मीडिया पर वायरल दावों के अनुसार, इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने देर रात मंदिर को निशाना बनाकर पथराव किया, जिससे इलाके में भारी सांप्रदायिक तनाव फैल गया। इस घटना के विरोध में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में मौदहापारा थाने का घेराव किया और स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि मंदिर पर हमला करने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका मुँहतोड़ जवाब दिया जाएगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रायपुर में हिंसा का यह दौर केवल पत्थरबाजी तक सीमित नहीं रहा, पिछले 24 घंटों के भीतर चाकूबाजी की भी चार अलग-अलग वारदातें सामने आई हैं। पुलिस जाँच में पता चला है कि मौदहापारा की इस हिंसा की जड़ में पुरानी रंजिश थी। पिछले साल अल्ताफ और राशिद नामक युवकों ने रवि रक्सेल पर हमला किया था, जिसके बाद से दोनों गुटों में ठनी हुई थी।

17. गंगा की पवित्रता पर प्रहार: वाराणसी में चलती नाव पर ‘बिरयानी पार्टी’ और 14 गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी से आस्था को ठेस पहुँचाने वाली एक घटना सामने आई, जहाँ पवित्र गंगा नदी के बीचों-बीच नाव पर इफ्तार पार्टी करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है। 16 मार्च 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में मुस्लिम युवकों की एक टोली ने न केवल रोजा इफ्तार किया, बल्कि चलती नाव पर बड़े भगोने से ‘चिकन बिरयानी’ परोसकर दावत भी उड़ाई। इन मुस्लिम युवकों ने मांसाहार करने के बाद जूठी हड्डियाँ सीधे माँ गंगा की पावन धारा में फेंक दीं, जिससे सनातन धर्म की मान्यताओं और नदी की शुचिता का अपमान हुआ है।

इस घटना के सामने आते ही स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश फैला। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वाराणसी पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और इस ‘फ्लोटिंग पार्टी’ में शामिल 14 लोगों को गिरफ्तार किया। धार्मिक नगरी में मर्यादाओं के इस उल्लंघन ने एक बार फिर सांस्कृतिक सम्मान और आपसी सद्भाव के बीच गहरी लकीर खींच दी है।

18. रामपुर में नाबालिग हिंदू लड़की का अपहरण-धर्मांतरण

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के पटवाई क्षेत्र से 22 फरवरी 2026 को एक गंभीर मामला सामने आया। यहाँ एक नाबालिग हिंदू लड़की के अपहरण और उसे बंधक बनाकर जबरन धर्मांतरण की कोशिश की। इस घटना के सामने आते ही पीड़ित परिजनों और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कार्यकर्ताओं में भारी रोष फैल गया। संगठनों ने तुरंत पटवाई थाने पहुँचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई और पुलिस प्रशासन से लड़की की सुरक्षित व जल्द बरामदगी की पुरजोर माँग की।

मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी लड़की का कोई सुराग नहीं मिला, जिसके बाद हिंदू संगठनों ने पुलिस को सख्त अल्टीमेटम दिया। शिकायत के अनुसार, दो मुस्लिम युवकों ने लड़की को अगवा किया और उस पर धर्मांतरण का दबाव बनाया। इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने फिलहाल गाँव के प्रधान को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

19. पहचान छिपाकर दरिंदगी: मेहसाणा में ‘राहुल पटेल’ बनकर मोहम्मद जावेद ने की ब्लैकमेलिंग

गुजरात के मेहसाणा जिले के खेड़ालू कस्बे से पहचान छिपाकर हिंदू लड़की के शोषण मामला सामने आया। 22 फरवरी 2026 को उजागर हुई इस घटना के अनुसार, मोहम्मद जावेद नाम के एक व्यक्ति ने खुद को ‘राहुल पटेल’ बताकर हिंदू लड़की से दोस्ती की और उसे अपने झांसे में ले लिया। आरोपित ने न केवल लड़की का विश्वास जीता, बल्कि उसकी कुछ निजी तस्वीरें भी ले लीं, जिनका इस्तेमाल वह बाद में उसे ब्लैकमेल करने के लिए करने लगा।

पीड़िता ने आरोप लगाया कि जावेद उसे बहला-फुसलाकर एक गेस्ट हाउस में ले गया, जहाँ उसने उसके साथ दुष्कर्म (रेप) करने की भी कोशिश की। जैसे ही इस घिनौनी करतूत की भनक परिजनों और ग्रामीणों को लगी, उन्होंने तुरंत मौके पर पहुँचकर आरोपित को रंगे हाथों पकड़ा। सूचना मिलते ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की और पीड़िता की शिकायत के आधार पर मोहम्मद जावेद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।

20. गाजियाबाद में हनुमान चालीसा बजाने पर हिंदू घर में घुसकर हथौड़े से वार

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित नंदग्राम इलाके से 10 मार्च 2026 को एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाने को लेकर एक हिंदू परिवार को हिंसक भीड़ का शिकार होना पड़ा। पीड़ित रितिक सिंह के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब पड़ोस में रहने वाले कुछ मुस्लिम परिवारों ने डीजे पर बज रही हनुमान चालीसा पर आपत्ति जताई। यह मामूली कहासुनी देखते ही देखते तब खूनी संघर्ष में बदल गई जब ताहिर, राशिद और सलमान अपने कई अज्ञात साथियों के साथ जबरन रितिक के घर में घुस आए।

पीड़ित परिवार की सदस्य पूजा ने बताया कि हमलावरों ने पहले उनके पति को निशाना बनाया जब वे पास की दुकान पर गए थे, और फिर पूरे लाव-लश्कर के साथ घर में हंगामा किया। आरोप है कि इस दौरान हमलावरों ने क्रूरता की हदें पार करते हुए पूजा की मासूम बेटी पर हथौड़े से हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया। परिवार का दावा है कि उन्हें सरेआम जान से मारने की धमकियाँ भी दी गईं। नंदग्राम थाने के SHO उमेश कुमार ने मुख्य आरोपितों ‘ताहिर, राशिद और सलमान’ को पुलिस ने हिरासत में लिया।

21. हैदराबाद में कट्टरपंथ: ‘जय श्री राम’ के स्टिकर पर कैब ड्राइवर की बेरहमी से पिटाई

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के जेबी नगर इलाके से धार्मिक असहिष्णुता की एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई। 26 फरवरी 2026 की देर रात, एक हिंदू कैब ड्राइवर सुरेश गौड़ को सिर्फ इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि उनकी गाड़ी के पीछे ‘जय श्री राम’ का स्टिकर लगा हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुस्लिमों के एक उग्र समूह ने उनकी कैब को बीच रास्ते में रोक लिया और स्टिकर को लेकर विवाद शुरू कर दिया, जो देखते ही देखते हिंसक हमले में बदल गया।

आरोप है कि करीब 25-30 इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने सुरेश गौड़ को घेर लिया और उन्हें जबरन वाहन से बाहर खींचकर उनके साथ मारपीट की। हमलावरों ने न केवल ड्राइवर को चोट पहुँचाई, बल्कि उनकी कैब में भी जमकर तोड़फोड़ की, जिससे गाड़ी के शीशे चकनाचूर हो गए और वाहन को भारी नुकसान पहुँचाया।

22. कोडागु में सांप्रदायिक झड़प: धार्मिक घोषणा के दौरान हिंदू युवक पर हमला

कर्नाटक के कोडागु जिले के नापोक्लू कस्बे में 3 मार्च 2026 को एक धार्मिक आयोजन की सूचना देना हिंसा का कारण बना। घटना उस समय हुई जब कुछ हिंदू युवक एक वाहन पर लाउडस्पीकर के जरिए आगामी धार्मिक कार्यक्रम की घोषणा की। इसी दौरान स्थानीय मुस्लिम युवकों ने इस पर आपत्ति जताई, जिससे शुरू हुई मामूली कहासुनी देखते ही देखते हिंसक मारपीट में बदल गई। इस हमले में गौतम नामक एक हिंदू युवक गंभीर रूप से घायल हुआ।

इस घटना के बाद हिंदू संगठनों ने दोषियों की तुरंत गिरफ्तारी की माँग की। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और राशिद, सिद्दीक, सुहैल और रफी के खिलाफ नामजद FIR दर्ज की है। इनमें से एक मुख्य आरोपित सुहैल को हिरासत में ले लिया था।

23. छिंदवाड़ा में दुस्साहस: इंस्टाग्राम पोस्ट पर हिंदू युवती को ‘पठान’ बनकर रेप की धमकी

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले से सोशल मीडिया के जरिए कट्टरपंथी धमकी और मानसिक उत्पीड़न का मामला सामने आया। घटना की शुरुआत 24 फरवरी 2026 को हुई, जब एक 22 वर्षीय हिंदू युवती ने इंस्टाग्राम पर एक हिंदू नेता का बयान साझा किया। इस पोस्ट से तिलमिलाए बिलाल, दिलावर और सलमान नाम के तीन युवकों ने हिंदू युवती को निशाना बनाया। उन्होंने न केवल फोन कॉल के जरिए युवती पर पोस्ट हटाने का दबाव बनाया, बल्कि उसे डराने के लिए मर्यादा की सारी हदें पार कर दीं।

हिंदू युवती को मानसिक रूप से तोड़ने के लिए आरोपितों ने बेहद आपत्तिजनक और हिंसक भाषा का इस्तेमाल किया। बातचीत के दौरान एक आरोपित ने अपनी पहचान का रौब झाड़ते हुए कहा, “मैं पठान हूँ, सच में रेप करता हूँ,” जबकि दूसरे ने युवती को नीचा दिखाने के लिए दावा किया कि उसके समाज की चार लड़कियाँ उसकी ‘गर्लफ्रेंड’ हैं। इन खौफनाक धमकियों से घबराने के बजाय हिंदू युवती ने साहस दिखाया और तुरंत अपने परिवार को सूचित कर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। छिंदवाड़ा पुलिस ने तीनों आरोपितों ‘बिलाल, दिलावर और सलमान’ को गिरफ्तार किया।

24. देहरादून में होली पर बवाल: गुब्बारा फटने के विवाद में हिंदू युवकों पर जानलेवा हमला

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से होली के उल्लास के बीच कट्टरपंथी हिंसा की एक विचलित कर देने वाली घटना सामने आई। 2 मार्च 2026 को चकराता रोड स्थित आरजीएम प्लाजा के पास चिराग आनंद और उनका दोस्त आनंद होली खेल रहे थे, तभी एक पानी से भरा गुब्बारा बिजली के तार में फँसकर फट गया। इस गुब्बारे का पानी पास खड़े साहिल धीमान के कपड़ों पर गिर गया, जो देखते ही देखते एक खूनी संघर्ष की वजह बन गया।
मामूली सी बात पर नाराज होकर साहिल ने अपने साथियों को बुला लिया और देखते ही देखते 20 से अधिक इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने लाठी-डंडों के साथ चिराग पर हमला बोल दिया। हमलावरों ने क्रूरता दिखाते हुए चिराग के सिर और पीठ पर गंभीर चोटें पहुँचाईं, जिससे बचने के लिए उन्हें पास की एक गली में छिपकर अपनी जान बचानी पड़ी। आरोप है कि भीड़ यहीं नहीं रुकी, बल्कि पत्थरों और ईंटों से हमला करने के बाद वे पीड़ित के घर तक जा पहुँचे, जहाँ उन्होंने चिराग की माँ के साथ भी धक्का-मुक्की और अभद्र व्यवहार किया।

25. राजकोट में होलिका दहन पर उपद्रव: पूजा के दौरान स्टंट और महिलाओं से अभद्रता

गुजरात के राजकोट स्थित भगवतीपारा इलाके में 2 मार्च 2026 को होलिका दहन के पावन अवसर पर उस समय भारी तनाव फैल गया, जब श्रद्धा और भक्ति के माहौल में विघ्न डालने की कोशिश की गई। घटना के वक्त बड़ी संख्या में स्थानीय महिलाएँ और बच्चे होलिका की पूजा और परिक्रमा कर रहे थे। इसी बीच, बाइक सवार दो मुस्लिम युवक अचानक वहाँ पहुँचे और भीड़ के बीच खतरनाक स्टंट करने लगे, जिससे अफरा-तफरी मच गई।
जब वहाँ मौजूद लोगों ने इस असुरक्षित और आपत्तिजनक व्यवहार का विरोध किया, तो मुस्लिम युवक एक बार तो चले गए, लेकिन कुछ ही देर बाद अपने साथ अन्य साथियों की इस्लामी भीड़ लेकर वापस लौटे। देखते ही देखते यह विवाद एक हिंसक झड़प में बदल गया। आरोप है कि उपद्रवियों ने न केवल हंगामा किया, बल्कि वहाँ मौजूद महिलाओं के साथ गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार भी किया, जिससे स्थिति और अधिक बिगड़ गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शांति व्यवस्था भंग करने के आरोप में कुछ संदिग्धों को हिरासत में लिया।

26. रामपुर में धार्मिक परंपरा से खिलवाड़: समय से पहले होलिका दहन पर भारी बवाल

उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले के बाजिदपुर गाँव में 2 मार्च 2026 को होलिका दहन के पावन पर्व पर उस समय तनाव फैल गया, जब एक मुस्लिम युवक ने हिंदुओं की धार्मिक मान्यताओं के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की। परंपरा के अनुसार, सैकड़ों हिंदू परिवार, महिलाएँ और बच्चे चंद्र ग्रहण समाप्त होने के बाद निर्धारित शुभ मुहूर्त में होलिका दहन और परिक्रमा के लिए एकत्रित हुए थे। अभी लोग पूजा की तैयारी कर ही रहे थे कि इसी बीच एक मुस्लिम युवक ने तय समय से पहले ही चुपके से होलिका में आग लगा दी।
इस घटना से वहाँ मौजूद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया, क्योंकि इसे उनकी सदियों पुरानी धार्मिक परंपराओं का सीधा उल्लंघन माना गया। देखते ही देखते मौके पर स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई और होलिका दहन की प्रक्रिया बाधित हो गई। पुलिस ने तुरंत आरोपित युवक को हिरासत में लिया।

27. चंदौली में खूनी होली: रंग पड़ने के विवाद में ई-रिक्शा सवार ने साथियों संग किया जानलेवा हमला

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के दुधारी-तेंदुहान गाँव में 5 मार्च 2026 को होली की खुशियाँ उस वक्त मातम में बदल गईं, जब एक मामूली बात पर हिंसक संघर्ष छिड़ गया। गाँव के हिंदू युवक पारंपरिक गीतों पर थिरकते हुए एक-दूसरे को रंग-अबीर लगा रहे थे, तभी वहाँ से ई-रिक्शा पर गुजर रहे खुर्शीद नाम के व्यक्ति पर गलती से थोड़ा रंग गिर गया। इस छोटी सी बात को लेकर खुर्शीद आगबबूला हो गया और उसने तुरंत अपने गाँव के अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया।
देखते ही देखते विवाद ने इतना उग्र रूप ले लिया कि हमलावरों ने लाठी-डंडों, हॉकी स्टिक और धारदार हथियारों से लैस होकर होली खेल रहे युवकों पर धावा बोल दिया। हद तो तब हो गई जब हमलावर एक हिंदू युवक के घर के भीतर तक घुस गए और वहाँ मौजूद लोगों के साथ बेरहमी से मारपीट की। इस सुनियोजित हमले में करीब आधा दर्जन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपितों को गिरफ्तार किया।

28. टोंक में होली की पूर्व संध्या पर पथराव: नमाज से लौटते ही विवाद, पिता-पुत्री लहूलुहान

राजस्थान के टोंक जिले में होली के उल्लास से ठीक एक दिन पहले, 3 मार्च 2026 की रात को सांप्रदायिक तनाव और हिंसा की खबर सामने आई, जहाँ एक पुराने विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विवाद की शुरुआत तब हुई जब एक मुस्लिम परिवार नमाज अदा कर घर लौटा और उनका स्थानीय हिंदू परिवारों के साथ झगड़ा हो गया। देखते ही देखते यह तकरार इतनी बढ़ गई कि दोनों ओर से लाठी-डंडे चलने लगे और भारी पथराव शुरू हो गया, जिससे पूरे इलाके में दहशत और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
इस खूनी झड़प में एक हिंदू पिता और उनकी बेटी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें आनन-फानन में टोंक के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए टोंक के डिप्टी एसपी मृत्युंजय मिश्रा ने मोर्चा संभाला और सिटी कोतवाली, पुराना टोंक व सदर थाने की पुलिस के साथ ‘राजस्थान आर्म्ड कांस्टेबुलरी’ के जवानों को चप्पे-चप्पे पर तैनात कर दिया है।

29. बांग्लादेश में बर्बरता: हिंदू व्यक्ति का सिर काटकर ईंट-भट्ठे के पास फेंका

पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश के पीरोजपुर जिले में 45 वर्षीय हिंदू व्यक्ति गोपाल चंद्र दास की अत्यंत क्रूरता से हत्या की गई। 13 मार्च 2026 को लापता हुए गोपाल का सिर और कटा हुआ शव अगले दिन नेसराबाद उपजिला में एक सुनसान ईंट-भट्ठे के पास नदी किनारे बरामद हुआ। शव की वीभत्स हालत देख पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और स्थानीय हिंदू समुदाय में भारी दहशत का माहौल बन गया। पुलिस के अनुसार, शव मामून मियाँ के ईंट-भट्ठे परिसर के पास मिला था, जिसका सिर गायब होना इस बात का पुख्ता सबूत है कि हत्यारों ने बेइंतहा दरिंदगी को अंजाम दिया।
परिजनों ने इस जघन्य हत्याकांड का सीधा आरोप मोहम्मद सम्राट और मोहम्मद राजू नामक दो व्यक्तियों पर लगाया। शुरुआती जाँच और परिवार के बयानों से संकेत मिले कि गोपाल चंद्र दास का पहले अपहरण किया गया और फिर उन्हें किसी सुनसान जगह ले जाकर मौत के घाट उतार दिया गया। पुलिस ने आरोपित मोहम्मद सम्राट को गिरफ्तार किया, जबकि दूसरा आरोपित मोहम्मद राजू फरार बताया गया।

30. मुंगेर में होली पर उपद्रव: रंग लगाने के विवाद में पथराव

बिहार के मुंगेर जिले के जमालपुर इलाके में 4 मार्च 2026 को होली की खुशियाँ तनाव में बदली, जब सदर बाजार और रामपुर कॉलोनी को जोड़ने वाले रेलवे पथ के पास हिंसक झड़प हुई। यहाँ स्थानीय लोग पारंपरिक उत्साह के साथ एक-दूसरे को गुलाल लगा रहे थे, तभी रंग डालने की बात को लेकर मुस्लिम पक्ष ने विवाद शुरू किया। देखते ही देखते विवाद इतना गहरा गया कि स्थानीय मुस्लिमों की भीड़ ने वहाँ मौजूद हिंदू लोगों पर पथराव किया।
इस अचानक हुए हमले में एक हिंदू व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ, जबकि कई अन्य लोगों को भी चोटें आईं। पुलिस इस मामले में कार्रवाई करते हुए पाँच संदिग्धों को हिरासत में लिया और पूरे मामले की गहन जाँच की, ताकि दोषियों को सख्त सजा मिले।

31. उज्जैन में बवाल: भारत की वर्ल्ड कप जीत के जश्न पर पथराव और हमला

मध्य प्रदेश के उज्जैन में 8 मार्च 2026 की रात खुशियाँ उस वक्त मातम और खौफ में बदली, जब भारत की ICC मेन्स टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में ऐतिहासिक जीत का जश्न मना रहे एक हिंदू परिवार पर हमला किया। यह घटना चिमनगंज मंडी थाना क्षेत्र की राज रॉयल कॉलोनी की है, जहाँ रमजान के दौरान ही कट्टरपंथी हिंसा की तस्वीर सामने आई। परिवार अपने घर के बाहर पटाखे फोड़कर देश की जीत की खुशियाँ मना रहे थे, तभी पड़ोस के कुछ मुस्लिमों ने पटाखों पर आपत्ति जताते हुए विवाद शुरू किया।
देखते ही देखते यह सामान्य बहस एक हिंसक झड़प में तब्दील हो गई और मुस्लिम भीड़ ने परिवार के साथ बेरहमी से मारपीट शुरू कर दी। इस अचानक हुए हमले में परिवार के कई सदस्य घायल हुए। पीड़ित पक्ष की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की गई है। पुलिस ने वाहिद खान, जाकिर, सुल्तान, शादाब और अन्य आरोपितों को हिरासत में लिया।

32. रमजान में राजस्थान में खौफ: बुमराह के विकेट का जश्न मनाने पर हिंदू परिवार पर हमला

राजस्थान के अलवर जिले (खैरथल-तिजारा क्षेत्र) के किशनगढ़ बास थाना अंतर्गत बधोड़ा घुमक्कड़ गाँव में 8 मार्च 2026 की रात क्रिकेट का रोमांच उस वक्त खूनी संघर्ष में बदल गया, जब भारत की जीत की खुशी मनाना एक हिंदू परिवार को भारी पड़ गया। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना तब शुरू हुई जब एक हिंदू परिवार अपने घर की छत पर भारत और न्यूजीलैंड के बीच चल रहे मैच का आनंद ले रहा था। जैसे ही भारतीय गेंदबाज जसप्रीत बुमराह ने एक ओवर में लगातार दो विकेट झटके, परिवार के सदस्यों ने उत्साह में तालियाँ बजाकर खुशी जाहिर की।
मैच के इस जश्न पर पड़ोस में मौजूद कुछ कट्टरपंथी तत्वों ने आपत्ति जताते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि करीब 15 से 20 इस्लामी भीड़ ने लाठी-डंडों और लोहे की रॉड से लैस होकर हिंदू परिवार पर धावा बोला। इस दौरान न केवल भारी पथराव हुआ, बल्कि एक हमलावर ने दुस्साहस दिखाते हुए छत पर चढ़कर फायरिंग भी की। इस जानलेवा हमले में 30 वर्षीय महिला भजनो बाईवास के सिर में गंभीर चोट आई और वे लहूलुहान हुई।

33. रमजान के दौरान भिवंडी में ‘निकाह’ की साजिश: नाबालिग से दरिंदगी

महाराष्ट्र के भिवंडी में 20 वर्षीय अरमान शेख को एक नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और जबरन निकाह के लिए दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार किया। रमजान के इस पवित्र महीने के दौरान उजागर हुई यह घटना 6 मार्च 2026 की है। पुलिस जाँच में पता चला है कि इन दोनों की मुलाकात साल 2024 में सोशल मीडिया के जरिए हुई। उस समय लड़की नाबालिग थी और अरमान करीब 18 वर्ष का था। आरोप है कि अरमान ने लड़की की मासूमियत और कम उम्र का फायदा उठाते हुए पिछले दो वर्षों तक उसका लगातार यौन शोषण किया।

हद तो तब हो गई जब लड़की के 18 वर्ष के होते ही अरमान उस पर निकाह के लिए दबाव बनाने लगा। आरोपित की ब्लैकमेलिंग और धमकियों से डरकर लड़की निकाह के लिए भिवंडी पहुँच गई, जहाँ निकाह की पूरी बिसात बिछाई गई थी। काजी से लेकर गवाह तक सब मौजूद थे। ऐन वक्त पर लड़की के परिजनों की सूचना पाकर एक हिंदू संगठन के सदस्य मौके पर पहुँचे और लड़की को वहाँ से सुरक्षित निकाला। पीड़िता की आपबीती सुनने के बाद पुलिस ने अरमान शेख गिरफ्तार किया।

34. रमजान के दौरान लखनऊ में दरिंदगी: हिंदू युवती का धर्मांतरण

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक 23 वर्षीय हिंदू युवती को प्यार के जाल में फँसाकर न केवल उसका शारीरिक शोषण किया, बल्कि उसे धर्मांतरण के लिए मजबूर किया। ये सब रमजान के दौरान हुआ। पीड़िता ने फरहीन खान नामक युवक पर गंभीर आरोप लगाए कि उसने पहले शादी का झाँसा देकर शारीरिक संबंध बनाए और फिर यह झूठ बोला कि यदि वह पहले निकाह करेगी, तो बाद में वह हिंदू रीति-रिवाजों से भी शादी करेगा। इसी धोखे के जाल में फँसाकर निकाहनामे पर युवती के हस्ताक्षर ले लिए गए।
निकाह के बाद फरहीन हिंदू युवती को अपने घर ले जाने के बजाय किराए के कमरे में रखा और लगातार उस पर कलमा पढ़ने व इस्लाम अपनाने का दबाव बनाया। जुल्म की इंतहा तब हो गई जब युवती गर्भवती हुई और फरहीन ने उसके पेट पर लात मारी, जिससे उसका गर्भपात हुआ। विरोध करने पर फरहीन ने युवती को जान से मारने, कहीं बेच देने की धमकी दी।

35. रमजान के दौरान केरल में धर्मांतरण: हिंदू महिला और बच्चे पर इस्लाम अपनाने का दबाव

केरल के कोझिकोड जिले में एक 21 वर्षीय हिंदू महिला ने अपने ही पति पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रमजान के इस महीने में उजागर हुई इस घटना के अनुसार, महिला को पहले प्रेम जाल में फँसाया गया और फिर आरोपित शाहुल हमीद ने उसके साथ गुरुवायूर मंदिर में हिंदू रीति-रिवाजों से शादी की। शादी के बाद दोनों साथ रहने लगे और महिला ने एक बच्चे को जन्म भी दिया।
हिंदू पीड़िता का कहना है कि विवाह से पहले धर्मांतरण जैसी कोई बात नहीं हुई थी, लेकिन जैसे ही वे साथ रहने लगे, शाहुल और उसके परिवार का असली चेहरा सामने आया। हिंदू पीड़िता का आरोप है कि शादी के कुछ समय बाद ही उसे और उसके मासूम बच्चे पर इस्लाम कबूलने का दबाव बनाया। अपनी और अपने बच्चे की सुरक्षा को खतरे में देख पीड़िता पुलिस के पास पहुँची। तिरुवम्बाडी पुलिस ने शाहुल हमीद को हिरासत में लिया।

36. रमजान के दौरान शिर्डी में दुस्साहस: नाबालिग को ‘निकाह’ के लिए दबाव

महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के शिर्डी थाना क्षेत्र से एक 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के उत्पीड़न का बेहद गंभीर मामला सामने आया। रमजान के इस महीने में उजागर हुई इस घटना के अनुसार, इरफान शेख नामक युवक ने इंस्टाग्राम के जरिए नाबालिग से संपर्क साधा और धीरे-धीरे उसे बुरी तरह परेशान करना शुरू किया। इरफान न सोशल मीडिया और असल जिंदगी में भी हिंदू लड़की का पीछा किया और उसे ‘निकाह’ करने के लिए दबाव बनाया।
जाँच में सामने आया कि इस घिनौनी साजिश में इरफान अकेला नहीं था, बल्कि उसके परिवार के कुछ सदस्य भी शामिल थे जो नाबालिग पर मानसिक दबाव बना रहे थे। लगातार हो रहे इस उत्पीड़न से तंग आकर बहादुर नाबालिग ने अपने परिजनों को पूरी सच्चाई बताई और थाने में शिकायत दर्ज कराई। फिर पुलिस ने मुख्य आरोपित इरफान शेख को गिरफ्तार किया।

37. रमजान के दौरान चिक्कमगलूरु में ‘मोरल पुलिसिंग’: दलित हिंदू किशोर को मुस्लिम भीड़ ने घेरा

कर्नाटक के चिक्कमगलूरु जिले के मलाड टाउन से ‘मोरल पुलिसिंग’ और दलित उत्पीड़न का एक गंभीर मामला सामने आया। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना 26 फरवरी 2026 की है, जब एक 17 वर्षीय दलित हिंदू नाबालिग लड़का अपनी एक मुस्लिम सहेली के साथ बाइक पर जा रहा था। इसी दौरान मार्केट रोड स्थित ज्योति सर्कल के पास मुस्लिम युवकों के एक कट्टरपंथी समूह ने उन्हें जबरन रोका। इस्लामी भीड़ ने किशोर से उसकी सहेली के साथ होने को लेकर सवाल पूछे और बुरी तरह डराया-धमकाया।
हैरानी की बात यह है कि मामला सड़क पर शांत होने के बाद भी खत्म नहीं हुआ। उसी रात आरोपित युवक उस दलित किशोर के घर तक जा पहुँचे और कथित तौर पर जबरन घर में घुसकर पूरे परिवार के साथ गाली-गलौज की। हमलावरों ने किशोर और उसके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी। इस घटना के बाद पुलिस ने कुल आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की और तीन आरोपितों को हिरासत में लिया।

38. रमजान में शाहजहाँपुर में सुनियोजित हमला: रंग डालने के विवाद में हिंदू बस्ती पर पथराव

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले के मऊ रसूलपुर गाँव में होली का उल्लास सांप्रदायिक तनाव में बदला। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना 4 मार्च 2026 को शुरू हुई, जब होली खेलते समय एक हिंदू युवक ने एक मुस्लिम व्यक्ति पर रंग डाल दिया। उस वक्त तो मौके पर पहुँची पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर मामला शांत करा दिया था, लेकिन उसी रात गुपचुप बैठक कर हमले की पूरी साजिश रची गई और अगली सुबह बड़ी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने पूरी तैयारी के साथ हिंदू बस्ती पर हमला किया।
भीड़ ने हिंदू ग्रामीणों पर पथराव किया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए। पुलिस ने जायद अली, शाहीद अली, अकील अहमद, अजीम, सोहेल, आमिर, महकू और हसरत समेत करीब 100 अज्ञात दंगाइयों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा किया।

39. रमजान के दौरान रुद्रपुर में खूनी संघर्ष: होली के जश्न में मुस्लिम भीड़ का पथराव और फायरिंग

उत्तराखंड के ऊधम सिंह नगर जिले के रुद्रपुर से होली के पर्व पर सांप्रदायिक हिंसा हुई। 5 मार्च 2026 की देर रात, जब भूतबंगला इलाके में स्थानीय लोग पारंपरिक उत्साह के साथ होली का कार्यक्रम मना रहे थे, तभी एक मुस्लिम युवक के दुस्साहस ने माहौल बिगाड़ा। रमजान के इस महीने में घटी इस घटना के अनुसार, वह युवक बार-बार अपना ई-रिक्शा जबरन भीड़ और कार्यक्रम के बीच से निकालने की कोशिश कर रहा था। जब मौजूद लोगों ने उसे टोकते हुए ऐसा करने से मना किया, तो वह अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हुए वहाँ से चला गया।
आरोप है कि वह मुस्लिम युवक थोड़ी ही देर बाद अपने साथ दर्जनों साथियों की उग्र भीड़ लेकर आया और होली मना रहे निहत्थे लोगों पर हमला किया। इस दौरान इस्लामी भीड़ ने पत्थरबाजी की और लाठी-डंडों से हिंदू लोगों को पीटा। चश्मदीदों के मुताबिक, हमले के दौरान गोलियाँ चलने की आवाजें भी सुनी गईं। इस अचानक हुए सुनियोजित हमले में एक दर्जन से अधिक लोग घायल हुए।

40. रमजान के दौरान बाराबंकी में खूनी होली: रंग डालने के विवाद में हिंदू परिवारों पर हमला

उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में होली के दौरान सांप्रदायिक हिंसा हुई। 4 मार्च 2026 को देवा थाना क्षेत्र के टिकरिया गाँव में होली का उल्लास उस वक्त मातम और दहशत में बदल गया, जब रंग खेलने को लेकर उपजा एक मामूली विवाद हिंसक संघर्ष में तब्दील हुआ। रमजान के इस महीने में घटी इस घटना के अनुसार, गाँव के हिंदू परिवार और युवक पारंपरिक रूप से होली खेल रहे थे, तभी स्थानीय मुस्लिमों के एक समूह ने इस पर आपत्ति जताई और हंगामा किया।
इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ ने लाठी-डंडों, लोहे की रॉड और चाकू से लैस होकर निहत्थे हिंदुओं पर हमला किया। इसमें 11 लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हमलावरों ने लोगों के घरों के घुसकर परिवार के सदस्यों को बेरहमी से पीटा और जो भी बीच-बचाव करने आया, उसे भी निशाना बनाया। घटना की सूचना पर पुलिस ने FIR दर्ज की।

41. रमजान के दौरान बागपत में ‘दावत’ के बहाने हत्या

उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के तित्रोड़ा गाँव में 4 मार्च 2026 को होली का पर्व मातम में बदला। रमजान के इस महीने में घटी इस घटना के अनुसार, अमृत शर्मा नामक एक हिंदू युवक की महज एक मामूली कहासुनी के बाद बेरहमी से चाकू मारकर हत्या की। अमृत अपने परिचित समीर के बुलावे पर होली की दावत में शामिल हुआ था। इसी दौरान वह गाँव में स्थित साजिद नामक व्यक्ति की चिकन की दुकान पर पहुँचा, जहाँ किसी बात को लेकर वहाँ मौजूद कुछ युवकों से उसकी बहस हुई।
विवाद इतना बढ़ा कि दुकान पर मौजूद सुहैल, अनस, शौकीन और चिंकू ने आव देखा न ताव और अमृत पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया। हमलावरों ने अमृत के सीने, पेट और कमर पर कई वार किए, जिससे अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हुई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चारों नामजद आरोपितों ‘सुहैल, अनस, शौकीन और चिंकू’ के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया।

42. रमजान के दौरान लखीमपुर में पलायन: मंदिर में मांस फेंका

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के मोहम्मदपुर गाँव में सांप्रदायिक कट्टरता और लगातार हो रही हिंसा के चलते एक हिंदू परिवार को अपना पुश्तैनी घर छोड़ना पड़ा। रमजान के इस महीने में घटी यह घटना 4 मार्च 2026 की है, जब पीड़ित प्रदीप वर्मा ने अपने पड़ोसियों के जुल्मों से तंग आकर परिवार सहित गाँव से पलायन किया। प्रदीप का आरोप है कि उनका पड़ोसी इस्माइल अली और उसका परिवार लंबे समय से उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहा था।
साजिश के तहत आरोपितों ने कई बार स्थानीय शिव मंदिर और प्रदीप के घर के सामने स्थित कुएँ में मांस के टुकड़े और हड्डियाँ फेंकीं। 4 मार्च को मंदिर परिसर को अपवित्र किया गया, तो प्रदीप ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। विरोध करने पर इस्माइल, वारिश अली, तहबान अली और इश्तियाक ने अपने परिवार की महिलाओं के साथ मिलकर प्रदीप वर्मा पर हमला किया और बेरहमी से पीटा। लगातार हो रहे इस अपमान और असुरक्षा के माहौल से टूटकर प्रदीप ने गाँव छोड़ा।

43. रमजान के दौरान गया में बवाल: बच्चों की गेंद लगने पर गर्भवती हिंदू महिला समेत कई पर पथराव

बिहार के गया जिले के बेलागंज क्षेत्र में रमजान के दौरान 5 मार्च 2026 को मामूली बात खूनी संघर्ष में तब बदली, जब खेल रहे बच्चों की एक गेंद गलती से एक मुस्लिम व्यक्ति को लगी। इस बात पर उस व्यक्ति ने कड़ी आपत्ति जताई, जिससे बहस शुरू हुई। देखते ही देखते यह विवाद इतना गरमाया कि कुछ ही देर में बड़ी संख्या में इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़ इकट्ठा हो गई और उन्होंने हिंदू घरों पर अंधाधुंध पथराव किया।
इस अचानक हुए हमले और पत्थरबाजी से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और कई मकानों को भारी नुकसान पहुँचा। हिंसा की इस चपेट में आकर कई लोग लहूलुहान हुए, जिनमें 21 वर्षीय गर्भवती महिला ललिता देवी को गंभीर चोटें आई। स्थानीय लोगों के अनुसार, गाँव में तनाव की जड़ें पुरानी थीं, करीब एक सप्ताह पहले अखंड कीर्तन के दौरान निकाली गई कलश यात्रा को लेकर भी दोनों पक्षों में विवाद हुआ था।

44. रमजान के दौरान वाराणसी में दरिंदगी: अस्सी घाट से हिंदू नाबालिग को नशीली दवा पिलाकर रेप

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी वाराणसी के प्रसिद्ध अस्सी घाट में रमजान के महीने में एक हिंदू नाबालिग लड़की को ‘लव जिहाद’ और बर्बरता का शिकार बनाया गया। चंदौली के बाबुरी थाना क्षेत्र की रहने वाली यह किशोरी 7 मार्च 2026 को अपने भाई के साथ अस्सी घाट घूमने पहुँचीं, जहाँ से नबी रसूल उर्फ जावेद नाम के व्यक्ति ने उसे किडनैप किया। अपहरण के बाद जावेद ने हिंदू लड़की के पिता को फोन कर न केवल उसे अपनी हिरासत में होने की बात कुबूल की, बल्कि उसे धर्मांतरण कराकर जबरन निकाह करने की खौफनाक धमकी दी।
होश खोने के बाद जब 8 मार्च की सुबह आरोपित युवती को बेहोशी की हालत में उसके गाँव के पास छोड़कर फरार हुआ, तब इस पूरी साजिश का खुलासा हुआ। पीड़िता ने आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसे बंधक बनाकर नशीली दवाएँ दी गईं और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किया गया। दरिंदगी की हद पार करते हुए जावेद ने उसके अश्लील वीडियो और तस्वीरें भी बनाईं ताकि उसे ब्लैमेल किया जा सके। भेलूपुर पुलिस ने मुख्य आरोपित नबी रसूल को गिरफ्तार किया।

45. रमजान के दौरान कनाडा के स्कूल में गैर-मुस्लिम बच्चों के खाना खाने पर पाबंदी

कनाडा के कैलगेरी स्थित ‘फेयरव्यू स्कूल’ में समावेशी बनने की कोशिश में स्कूल प्रशासन ने एक ऐसा फैसला किया, जिससे गैर-मुस्लिम छात्रों की मुश्किलें बढ़ी। रमजान के इस महीने में स्कूल ने रोजा रखने वाले बच्चों के प्रति सम्मान दिखाने के नाम पर अपने कैफेटेरिया (भोजनालय) में खाना खाने पर ही पाबंदी लगाई। स्कूल के आधिकारिक ईमेल के अनुसार, लंच एरिया को ‘फूड फ्री’ यानी भोजन मुक्त क्षेत्र घोषित किया। इस तुगलकी फरमान के कारण जो बच्चे रोजा नहीं रख रहे थे, उन्हें भी लंच के समय भूखा रहना पड़ा और कड़ाके की ठंड में दूसरी जगह तलाशने पड़ी।
स्कूल के इस नियम के कारण कक्षा 4 से 6 तक के नन्हे बच्चों (लगभग 9 साल की उम्र) को भूखा रहना पड़ा। वहीं, कक्षा 7 से 9 तक के छात्रों के लिए स्थिति और भी बदतर हुई, उनके लिए पूरे एक घंटे के ब्रेक के दौरान लंच रूम के अंदर भोजन करने पर पूरी तरह बैन किया गया। गौर करने वाली बात यह है कि आमतौर पर इस्लाम में रोजा 13-14 साल की उम्र से अनिवार्य होता है, लेकिन स्कूल ने इसे छोटे बच्चों पर भी थोप दिया था।

46. रमजान के दौरान अमेरिका में आतंकी हमला: ‘अल्लाहू अकबर’ के नारे के साथ गोलीबारी

अमेरिका के वर्जीनिया स्थित ओल्ड डोमिनियन यूनिवर्सिटी (ODU) में 12 मार्च 2026 को एक पूर्व सैन्यकर्मी ने बिजनेस स्कूल की इमारत में घुसकर अंधाधुंध फायरिंग की। रमजान के इस महीने में हुई इस भीषण घटना में 36 वर्षीय मोहम्मद बैलोर जल्लोह हमलावर ने क्लासरूम में दाखिल होते ही ‘अल्लाहू अकबर’ का नारा लगाया और गोलियाँ बरसानी शुरू की। इस हमले में लेफ्टिनेंट कर्नल ब्रैंडन शाह की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
हैरानी की बात यह है कि हमलावर जल्लोह कोई साधारण अपराधी नहीं था। वह पूर्व आर्मी नेशनल गार्ड सदस्य था जिसे 2016 में खूंखार आतंकी संगठन ISIS की मदद करने का दोषी पाया गया था। वह समय से पहले रिहा होकर निगरानी (सर्विलांस) पर था। जिस समय उसने हमला किया, वहाँ मौजूद छात्र मिलिट्री ऑफिसर बनने की ट्रेनिंग ले रहे थे। इन जांबाज छात्रों ने बिना डरे आतंकी का मुकाबला किया और उसे दबोच लिया। एफबीआई (FBI) के अनुसार, छात्रों ने आत्मरक्षा में जल्लोह को चाकुओं से गोदकर ढेर कर दिया।

47. रमजान के दौरान नाइजीरिया में कत्लेआम: मैदुगुरी में आत्मघाती धमाके, 23 की मौत

नाइजीरिया के मैदुगुरी शहर में रमजान के महीने के बीच भीषण आत्मघाती हमला हुआ। 16 मार्च 2026 की रात को संदिग्ध हमलावरों ने उत्तर-पूर्वी नाइजीरिया के इस प्रमुख शहर को निशाना बनाकर सिलसिलेवार बम धमाके किए। नाइजीरियाई पुलिस की पुष्टि के अनुसार, इन आत्मघाती विस्फोटों में कम से कम 23 निर्दोष लोगों की मौत हुई, जबकि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हिंसा प्रभावित बोर्नो राज्य की राजधानी में हुए इस हमले को हाल के वर्षों के सबसे घातक आतंकी हमलों में से एक माना जा रहा है। इस हमले की किसी भी आतंकी समूह ने अधिकारिक तौर पर जिम्मेदारी नहीं ली थी, लेकिन इस्लामी आतंकी गुटों पर शक था।

48. रमजान के दौरान लंदन में कट्टरपंथ: हैरो में होलिका दहन के कार्यक्रम पर हमला

ब्रिटेन की राजधानी लंदन के हैरो (Harrow) इलाके में रमजान के महीने में 4 मार्च 2026 को जब स्थानीय हिंदू समुदाय के लोग पूरी वैधानिक अनुमति के साथ ‘होलिका दहन‘ का पावन पर्व मना रहे थे, तब उत्सव के माहौल को इस्लामी कट्टरपंथियों ने हिंसा में बदला। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में हिंदू परिवार, महिलाएँ और मासूम बच्चे शामिल थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पास की एक मस्जिद से आए कुछ लोगों ने अचानक आयोजन में खलल डाला। हमलावरों ने न केवल वहाँ लगे साउंड सिस्टम को उखाड़कर फेंका, बल्कि उत्सव में शामिल लोगों को धमकाया।

हैरानी की बात यह है कि शुरूआती विवाद के बाद यह समूह कुछ देर के लिए वहाँ से गया, लेकिन थोड़ी ही देर में करीब 20 अन्य कट्टरपंथियों के साथ वापस लौटा और दोबारा हमला किया। यह सब तब हुआ जब कार्यक्रम स्थल पर स्थानीय मेयर, हैरो काउंसिल के प्रतिनिधि और लेबर पार्टी के बड़े नेता मौजूद थे। इतने वीआईपी (VIP) चेहरों की मौजूदगी के बावजूद हमलावरों ने उत्पात मचाया।

49. रमजान के दौरान बुर्किना फासो में अल-कायदा का उत्पात: 50+ हत्याएँ

अफ्रीकी देश बुर्किना फासो में रमजान के महीने के दौरान अल-कायदा से जुड़े आतंकी संगठन जेएनआईएम (JNIM) ने भीषण कत्लेआम मचाया, जिससे पूरा इलाका दहल उठा। 27 फरवरी 2026 को उत्तरी इलाकों में हुए एक बड़े हमले में आतंकियों ने बर्बरता की सारी हदें पार करते हुए 50 से अधिक सैनिकों और आम नागरिकों की हत्या की।
सितंबर 2022 से इब्राहिम ट्रोरे के सैन्य शासन के अधीन चल रहे इस देश में जिहादी हमलों की यह बाढ़ नई नहीं है, लेकिन इस बार आतंकियों ने क्रूरता दिखाते हुए न केवल लोगों की जान ली, बल्कि अनाज के भंडारों को आग के हवाले कर दिया और खाने-पीने का सामान लूट लिया, जिससे स्थानीय आबादी के सामने भुखमरी का संकट खड़ा हो गया है। इस आतंकी गुट ने घातक हमले की जिम्मेदारी ली।

50. रमजान के दौरान मॉस्को में आतंकी विस्फोट: कट्टरपंथियों की क्रूरता और मासूमों का खून

रूस की राजधानी मॉस्को में 24 फरवरी 2026 को रमजान के दौरान आईएसआईएस (ISIS) से जुड़े एक आतंकी ने रेलवे स्टेशन को निशाना बनाकर खुद को विस्फोट से उड़ा लिया, जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस अधिकारी की मौके पर ही मौत हो गई और कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
विडंबना यह है कि जहाँ एक ओर इन घटनाओं को अंजाम देने वाले कट्टरपंथी इस महीने को ‘इबादत और पवित्रता’ का समय बताते हैं, वहीं धरातल पर वास्तविकता इसके बिल्कुल उलट दिखाई देती है। इस रिपोर्ट में दर्ज 50 घटनाएँ तो महज एक बानगी भर हैं, जबकि ऐसी सैकड़ों वारदातें और भी हो सकती हैं जो शायद कभी दुनिया के सामने ही नहीं आ पाईं। महिलाओं और नाबालिग बच्चियों के साथ होने वाले जघन्य दुष्कर्म, मासूमों की हत्या और बेगुनाह लोगों का खून बहाकर फैलाई गई यह अशांति इन कट्टरपंथियों के दोहरे चरित्र को उजागर करती है।
(साभार) 

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