मैं पहले ही कह चुका हूं देश में ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट बंद कर देने चाहिए क्योंकि जब हर काम सुप्रीम कोर्ट ने ही करना है तो उनका क्या लाभ है। जो प्रधानमंत्री मोदी को अपमानित करने कोई मौका नहीं छोड़ती बल्कि उन्हें अपमानित करने के बहाने ढूंढती फिरती है, उस नेहा राठौर को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस ए.एस. चंदूरकर की बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह माना कि आरोपी जांच प्रक्रिया में शामिल हो चुकी है। कोर्ट ने कहा कि वह आगे भी जांच में सहयोग करती रहें। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के मुताबिक जांच एजेंसियां अपना काम जारी रखेंगी। साथ ही आरोपी को जांच में पूरा सहयोग करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा कि फिलहाल गिरफ्तारी जैसी कोई सख्त कार्रवाई जरूरी नहीं है। इसलिए उन्हें अग्रिम जमानत दी जा रही है।
जांच में शामिल तो हो गई लेकिन यह भी देखिए कब तक जांच से भागती फिरती रही। पुलिस के समन नकारती रही और शोर मचाती रही कि क्या पीएम से सवाल भी नहीं पूछ सकते। हाई कोर्ट ने उसे अग्रिम जमानत देने से मना कर दिया क्योंकि तब वह जांच में शामिल नहीं हो रही थी।
इस बेलगाम महिला ने कहा था मोदी जी बिहार आए पाकिस्तान को धमकाने के लिए। मोदी शाह और भाजपा पहलगाम जैसे मामलों से देश को युद्ध की तरफ धकेल रहे हैं। अब इसमें जांच का क्या मतलब रह जाता जो एक के बाद एक कोर्ट से उसे छूट मिलती रही। बोलने से पहले या कहो तो “भौंकने” से पहले नहीं सोचते कि परिणाम क्या हो सकता है। अब बोला था तो केस को भुगतो और साबित करो कि सही कहा था। वह जांच में शामिल तब ही हुई जब उसने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम याचिका दायर की।
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एक केस में सुप्रीम कोर्ट ने कुछ वर्ष पहले व्यवस्था दी थी कि अग्रिम जमानत तब तक लागू रहती है जब तक केस का अंतिम निर्णय न हो जाए।
आप याद कीजिए राहुल गांधी का बयान, उसके कहने का क्या मतलब था कि “ऐसा कैसे है कि सब मोदी चोर होते हैं”। नाम नीरव मोदी का भी लिया लेकिन निशाना नरेंद्र मोदी ही थे। सजा हुई 2 साल की और अगर वह सजा माफ़ नहीं हुई होती तो आज राहुल गांधी संसद में न होता और इस कदर विदेशों में जाकर मोदी और भारत का अपमान न कर रहा होता लेकिन उसे छोड़ दिया अपने को कांग्रेसी परिवार का बताकर जस्टिस गवई ने और उसे अभय दान दे दिया।
4 दिसंबर, 2025 को जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने राहुल गांधी द्वारा सेना के अपमान मामले को 5 महीने के लिए स्थगित कर 22 अप्रैल, 2026 तारीख तय कर दी। जिन जजों ने राहुल को फटकार लगाई थी, उन्हें ही बदल दिया गया और यह 22 अप्रैल भी आगे बढ़ेगी क्योंकि शबरीमला मंदिर की Review Petition की सुनवाई 8 साल बाद 9 जजों की बेंच 7 अप्रैल से 22 अप्रैल, 2026 तक करेगी। अगर जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा को शबरीमला बेंच में शामिल कर लिया गया तो राहुल को एक बार और शायद 6 महीने की छूट मिल जाये। वीर सावरकर के अपमान के लिए भी उसे झाड़ पड़ी थी। आज किसी को पता नहीं सुप्रीम कोर्ट में उस केस का क्या स्टेटस है।
संविधान और न्यायपालिका के प्रति संवेदनशील प्रधानमंत्री मोदी मिला हुआ है सुप्रीम कोर्ट को लेकिन उसे फिर भी वह कबूल नहीं है। न्यायपालिका के जजों का भरतनाट्यम इंदिरा गांधी के सामने होता था। क्या वही ठीक था?

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