मोदी-योगी-अमित विरोध में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी उम्मा को चूमने के लिए सनातन संस्कृति को कलंकित करने का कोई मौका नहीं चूक रहे। अगर हिन्दू संस्कृति इतनी बुरी है तो इस्लाम क्यों नहीं कबूल कर लेते?
गंगा नदी में मुस्लिमों ने जानबूझकर इफ्तार पार्टी की और पवित्र गंगा में चिकेन और मांस के झूठे टुकड़े फेंके। उन्हें पता था हिंदू इसे कभी बर्दाश्त नहीं करेंगे। वैसे हिंदू त्योहारों पर मुस्लिम म्यूजिक बजने पर भड़कते हैं और पत्थरबाजी करते हैं लेकिन गंगा की इफ्तार में सब कुछ किया लेकिन कूद कर अखिलेश और कांग्रेस उनके समर्थन में खड़े हो गए।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
अखिलेश तो और आगे बढ़ गया। उसने कहा इफ्तार करने वालों ने पुलिस वालो और DM को अच्छा खाना नहीं खिलाया होगा और उनकी हथेली गर्म नहीं की होगी। हथेली गरम पुलिस नरम, ये तो आम बात है। यानि अखिलेश के राज में उत्तर प्रदेश में यही होता रहा है।
अखिलेश यादव अपनी ये बाते याद रखना। गंगा माँ है। वो अगर पाप धोती है तो दंड भी देती है और जो पाप आपने किया वह धुल भी नहीं सकता। कुछ याद कीजिए तेजस्वी यादव की करतूत जिसका परिणाम उसे मिला माँ भगवती से।
तेजस्वी यादव ने 9 अप्रैल, 2024 को नवरात्री के पहले दिन हेलीकाप्टर में मुकेश सहनी के साथ चटकारे ले ले कर मछली पार्टी करते हुए वीडियो पोस्ट किया था लेकिन जब भाजपा ने ऐतराज किया तो कह दिया कि वो तो एक दिन पहले 8 अप्रैल का वीडियो था। मगर वीडियो पोस्ट तो जानबूझकर नवरात्री के पहले दिन किया। बाप लालू यादव भगवान राम का अपमान करता है और बेटे ने माँ भगवती का अपमान कर दिया।
दूसरी तरफ दत्तात्रेय राहुल गांधी भी दिसंबर, 25 में मछली पार्टी उड़ा रहा था और उसकी रैली में मोदी की दिवंगत माताश्री के नाम से मोदी को माँ की गाली दी गई लेकिन राहुल गांधी खामोश रहा। मोदी तेरी कब्र खुदेगी कांग्रेस ये नारे खुल कर लगाती है।
नतीजा क्या हुआ? तेजस्वी की पार्टी 75 से 25 सीट पर आ गई, राहुल की कांग्रेस 18 से 6 सीट पर और उपमुख्यमंत्री बनने वाले मुकेश सहनी की पार्टी का खाता भी बिहार चुनाव में नहीं खुला।
और उड़ाओ हिंदू भगवानों का मजाक -
बस अब अखिलेश यादव इस सबकी दुर्दशा को याद कर ले और अपनी पिछली 111 की एक तिहाई यानी 37 सीट अभी से अगले चुनाव में अपने खाते में लिख ले। माँ भगवती का रौद्र रूप तो तेजस्वी & कंपनी ने देख लिया और माँ गंगा का रौद्र रूप देखने के लिए अखिलेश तैयार रहे।
बाद में चुनाव नतीजों की समीक्षा करते मत करते फिरना। जैसे अपनी किस्मत तेजस्वी & कंपनी ने खुद लिख ली थी, वैसे ही अखिलेश ने लिख ली है। अखिलेश के खाते में तो सनातन धर्म के अनेक अपमान लिखे हैं।

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