जज साहब, कोई भी SP और DM एड़ियां रगड़ कर बनता है, वो कॉलेजियम के पिछले दरवाजे से हाई कोर्ट के जज नहीं बनते

सुभाष चन्द्र

हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन ने संभल के SP और DM को बड़ी सरलता से कह दिया कि अगर rule of law enforce नहीं कर सकते तो या तो त्यागपत्र दे दो या अपना ट्रांसफर मांग लो 

सच्चाई है कि जजों की जुबान बेलगाम होती जा रही है कानून व्यवस्था कायम करना कोई मिठाई नहीं है जो किसी को पुलिस अधिकारी खिला दें आपने मुस्लिमों की मस्जिद में संख्या में संख्या सीमित करने का विरोध तो ऐसे कर दिया जैसे आप विपक्ष के लिए मुस्लिम वोटों का जुगाड़ कर रहे हो जबकि आप संभल का दंगों का इतिहास भूल गए आज हिंदू संभल में मात्र 20% बचे हैं और लगता है आप हिंदुओं का पूरी तरह सफाया चाहते हैं। 

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चर्चित YouTuber 
मीलॉर्ड SP और DM एड़ियां रगड़ कर Competition पास करके बनते हैं वो कोई जज नहीं होते जो कॉलेजियम के पिछले दरवाजे से न्यायपालिका में घुसे हो दोनों माननीय जज बार से इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज बने थे और बार से जज बनना अपने आप में पक्षपात दर्शाता है

एक नहीं अनेक बार मस्जिदों से तकरीरों के बाद दंगे भड़कते हैं कौन संभालता है तब कानून व्यवस्था को प्रशासन को मौके पर निर्णय लेने होते हैं कानून व्यवस्था किसी जज के चैंबर में बैठ कर आदेश देने से नहीं संभलती जजों को प्रशासन के काम में इतना ही शौक है टांग अड़ाने का तो संवेदनशील मस्जिदों के नमाज के बाद पुलिस अधिकारियों के साथ मौके पर खड़े हुआ करें और अगर दंगा हो तो उसे पुलिस साथ झेलने का साहस दिखाया करें

जिस कथित मस्जिद की बात पर उन्होंने अधिकारियों को नौकरी छोड़ने के लिए कहा, वह  घर किसी मोहन सिंह और भूराज सिंह के नाम पर रजिस्टर है जिसे जबरन कब्ज़ा कर मस्जिद बनाया हुआ है और ऐसा कहते है गांव के दोनों समुदायों ने निर्णय लिया था कि 20 लोग नमाज पढ़ेंगे और बाहर के लोग उसमे शामिल नहीं होंगे 

पुलिसकर्मी दंगों की ड्यूटी दंगों में मरने की नहीं होती बरेली का मौलाना तौकीर रजा खुली धमकी देता था कि हमारे लोग सड़कों पर आ गए तो हिंदुओं को निकलने का रास्ता भी नहीं मिलेगा क्या आप उसे फूलों की माला पहनाएंगे?

एक समय था जब सुप्रीम कोर्ट कश्मीर में आतंकियों की गोली का जवाब गोली से भी देने पर रोक लगाता था और पैलेट गन भी चलाने से रोक लगा दी थी। प्लास्टिक की गोली चलाने के लिए कहते थे

कथित किसान आंदोलन में 26 जनवरी, 2021 से पहले दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने सुप्रीम कोर्ट से आंदोलन पर उस दिन बैन लगाने के लिए कहा था तो चीफ जस्टिस बोबडे ने भी 2 छटांक की जुबान हिला कर कह दिया था कि कानून व्यवस्था संभालना आपका काम है और नतीजा लाल किले पर सबने देखा बोबडे साहब पुलिस कमिश्नर की टीम के साथ खड़ा होने की हिम्मत दिखाते तो बात थी लेकिन एक आदत बन चुकी है कि सारा दोष पुलिस के मत्थे मढ़ दिया जाए

2020 के सुनियोजित दंगों और 26 जनवरी 2021 के दिन अगर पुलिस ने संयम से काम न लिया होता तो कुछ भी अनहोनी हो सकती थी जैसा विपक्ष चाहता था

अगर योगी प्रशासन के अधिकारियों को जजों ने ऐसे ही जलील करना है तो जो चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने हाल ही में योगी जी और उनके प्रशासन की प्रशंसा की थी, वह वापस ले लेनी चाहिए वरना अपने जजों को नियंत्रित करना चाहिए जो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को जलील न करें

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