अब जस्टिस भुइयां UAPA पर भी रोक लगाना चाहते हैं क्या? अपराधियों को छोड़ दिया जाए? विकसित भारत क्या सुप्रीम कोर्ट बनाएगा?

सुभाष चन्द्र

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भुइयां ने हाल ही में कहा है कि UAPA के अत्यधिक उपयोग से हासिल नहीं हो सकता विकसित भारत का लक्ष्य उन्होंने कहा कि 2019 से 2023 के बीच इस एक्ट में दोषसिद्धि मात्र 5% है हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया लेकिन आरोप सिद्ध नहीं हो सके

जस्टिस भुइयां ने सीधे कानून बनाने वाली संस्था संसद को चुनौती दी है।  यह कानून मोदी सरकार ने नहीं बनाया, यह 1967 में बना था 2004, 2008, 2012 और 2019 में इसमें संशोधन किये गए यानी 3  बार संशोधन तो कांग्रेस ने ही किया था 2 अगस्त, 2019 में सरकार ने संगठनों के साथ साथ व्यक्तियों को भी आतंकी श्रेणी में शामिल किया था 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
NIA अपनी पूरी शक्ति से आरोपियों के खिलाफ सबूत जुटाती है और अगर वे कोर्ट को पसंद न आए तो इसका मतलब यह नहीं है कि कानून ही बेकार है

क्या आसिया अंद्राबी के खिलाफ UAPA लागू नहीं करना चाहिए था जिसे अभी कुछ दिन पहले उम्र कैद की और उसकी दो साथियों को 30-30 साल की सजा हुई है क्या यासीन मलिक पर UAPA नहीं लगना चाहिए था जिसे 2022 में उम्र कैद की सजा हुई थी? उस पर अभी TADA में एयरफोर्स के अधिकारियों की हत्या का मुकदमा चल रहा है यह TADA कानून 1987 में नरसिम्हा राव ने निरस्त कर दिया था जो 1995 में ख़त्म हुआ लेकिन जो मुक़दमे दर्ज थे, उन्हें जारी रखने दिया गया था 

उमर खालिद और शरजील इमाम पर भी क्या UAPA नहीं लगना चाहिए था जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से मना कर दिया? उन पर दिल्ली दंगे भड़काने का आरोप है याद रहे इमाम ने चिकन नैक काट कर भारत से अलग करने की बात की थी

आप UAPA में 5% दोषसिद्धि को लेकर कानून पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन CBI का Success Rate तो 76% होने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह CBI के कार्यों की समीक्षा करेंगे मतलब 5% भी पसंद नहीं और 76% भी पसंद नहीं

पिछले दिनों जस्टिस भुइयां ने कॉलेजियम की सिफारिशों के लिए केंद्र सरकार पर उंगली उठाते हुए कहा था कि केंद्र को कॉलेजियम की सिफारिशें खारिज करने का अधिकार नहीं है

बड़ी विडंबना है, पुलिस को सुप्रीम कोर्ट फटकार मारता है, प्रशासन को नहीं छोड़ता, सेना के कार्य में कमी निकालता है, केंद्र और राज्य सरकारों की तो बात ही छोड़ दो जब सभी में कमी निकालनी हैं तो सत्ता में आने का तरीका ढूंढिए

एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत को विकसित देश बनाने में लगा है और आपने एक UAPA को लेकर कह दिया कि इससे विकसित देश नहीं बन सकता प्रधानमंत्री की मेहनत पर ऐसे तो पानी फेरना उचित नहीं है विकसित देश क्या सुप्रीम कोर्ट के दो जजों के राष्ट्रपति को गैर कानूनी आदेश देने से बनेगा 

आत्मचिंतन करने की जरूरत है और Individual Judges को सरकार और उसकी एजेंसियों पर बोलने से बचना चाहिए जस्टिस भुइयां के बयान से यह तो स्पष्ट हो गया कि कोई मामला UAPA का उनकी अदालत में चला गया, तो न्याय तो नहीं होगा 

No comments: