सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 6 को बंगाल के मुख्य सचिव, गृह सचिव, DGP, मालदा के DM और SP को Virtually हाजिर को कर बताने के लिए कहा है कि उनके विरुद्ध कार्रवाई क्यों न की जाए। इनके लिए सुप्रीम कोर्ट जो भी फैसला करे, लेकिन उनकी तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए क्योंकि इन सभी को 7 जुडिशल ऑफिसर्स के साथ हुई घटना की जानकारी न रही हो, ऐसा हो नहीं सकता लेकिन फिर भी उन्होंने कुछ नहीं किया। That is the case of dereliction of duty और इसे गंभीर अपराध माना जाना चाहिए। दंगाइयों को ही गिरफ्तार करना काफी नहीं है। ये अधिकारी अगर चाहते तो वह न होता जो न्यायिक अधिकारियों के साथ हुआ।
NIA की टीम भी पहुंची हुई है लेकिन यह सामने नहीं आ रहा कितने और कौन लोग गिरफ्तार हुए है? कहीं कहा जा रहा है 18 गिरफ्तार हुए हैं और कहीं कहा गया है 35 हुए हैं। बस दो प्रमुख नाम सामने आए हैं - पहला है मोथाबाड़ी के उम्मीदवार Indian Secular Front मौलाना शाहजहां अली का और दूसरे के लिए कहा गया है कि बंगाल CID ने कलकत्ता हाई कोर्ट के वकील और पूर्व AIMIM नेता Mofakkerul Islam को बागडोगरा एयरपोर्ट से बंगलुरु की फ्लाइट पर चढ़ते हुए गिरफ्तार किया।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
Mofakkerul Islam के लिए कहा जा रहा है कि वह पूर्व AIMIM नेता है जिसके टिकट पर 2021 का चुनाव लड़ा था। आज AIMIM की बंगाल में कुछ ज्यादा वैल्यू नहीं है तो यह क्यों नहीं बता रहे कि अब वह TMC से जुड़ा है।
SIR का काम करते हुए जजों को रोका गया, बंधक बनाया गया, गाड़ियों पर पत्थर मारे गए और फिर भी TMC का कोई कार्यकर्त्ता गिरफ्तार न हो, ऐसा संभव हो सकता है क्या?
सुप्रीम कोर्ट को इन सभी विषयों पर संज्ञान लेना चाहिए। उच्च अधिकारियों पर किसी तरह की नरमी नहीं होनी चाहिए और हर गिरफ्तार हुए व्यक्ति की पृष्ठभूमि अदालत में खुल कर बताई जानी चाहिए। अपने लोगों को लगता है ममता फिर भी बचा लेगी।

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