दलाल “विषगुरु” पाकिस्तान को दलाली मिली नहीं और लाखों रुपया खर्च हो गया होटल में, वार्ता फेल हो गई और अब इस “विषगुरु” को ईरान पेलेगा

सुभाष चन्द्र

भागवत गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं "विनाश काले विपरीत बुद्धि" यानि शाहबाज़ शरीफ और मुल्ला मुनीर ने दलाली के चक्कर में पाकिस्तान को दांव लगा दिया। वार्ता के चलते सऊदी अरब फौज और लड़ाकू जहाज भेजने से साफ इशारा मिल गया था कि वार्ता सिर्फ eye wash है नतीजा जीरो होने वाला है फिर भी आर्मी का सऊदी अरब डेरा डाल ईरान से खुलेआम दुश्मनी मोल ले ली। पहले ईरान समर्थक शिया लोगो के प्रदर्शनकारियों पर गोली चलवा दी। यानि "बर्बाद करने को एक ही उल्लू काफी है लेकिन पाकिस्तान में तो हर शाख पर उल्लू बैठा है अंजामे गुलिस्तां क्या होगा?"   

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
दो दिन पहले शाहबाज़ शरीफ की तारीफ में कसीदे पढ़ते हुए पाकिस्तान की दलाल कथित पत्रकार अरफ़ा खानम ने कहा था कि असली विश्वगुरु तो पाकिस्तान है जो शांति वार्ता करा रहा है लेकिन वह उसका विशवगुरु तो “विषगुरु” बन गया सारे पापड़ बेले हुए बेकार गए और वार्ता कराने के लिए  Islamabad Serena Hotel में लाखों रुपए और खर्च हो गए

ईरान ने शर्तें ही ऐसी रख दी वार्ता में शामिल होने के लिए जो मानना अमेरिका के लिए संभव ही नहीं था उसने लेबनान को Ceasefire में शामिल करने को कहा, उसके नुकसान की भरपाई की मांग की और उसकी जब्त संपत्तियों को छोड़ने के लिए कहा जबकि अमेरिका की पहली शर्त थी कि ईरान होर्मुज को खोले 

जब शाम तक ईरान को कोई आश्वासन नहीं मिला तो उसके लोग वापस लौटने के लिए तैयार थे लेकिन “दलाल पाकिस्तान” ने उनकी मिन्नतें कर मनाने की कोशिश की, वार्ता हुई लेकिन फिर भी फेल हो गई ईरान ने तो इज़रायल को भी ceasefire का हिस्सा नहीं माना था, तो फिर लेबनान को कैसे उसमे शामिल किया जा सकता है

ईरान एक अंतरराष्ट्रीय गुंडे के तरह होर्मुज पर गैर कानूनी कब्ज़ा किए बैठा है जैसे उसने होर्मुज को बंधक बना लिया (kidnap कर लिया) और अब उसके एवज में फिरौती मांग रहा है

वार्ता फेल होने का मतलब है कि युद्ध फिर भड़क सकता है और अब पाकिस्तान “विषगुरु” ने 15000 सैनिक और air force fighter jets (including F-16s) सऊदी अरब भेज दिए हैं ये पाकिस्तान ने कहने को तो सऊदी अरब के साथ 2025 में हुए Strategic Mutual Defence Agreement के तहत भेजे हैं जबकि ईरान-अमेरिका/इज़रायल युद्ध के दौरान नहीं भेजे जब जरूरत थी अब भेजने का एकमात्र कारण है कि किसी तरह सऊदी अरब अपने 6 बिलियन डॉलर कर कर्ज वापस न मांगे। जो साबित कर रहा है कि पाकिस्तान हलाल की कमाई पर नहीं जकात की कमाई पर चल रहा है। जो पूरे पाकिस्तान और इसके समर्थकों के लिए डूब मरने वाली बात है। 

सऊदी अरब पर ईरान ने युद्ध में लगातार हमले किए और ceasefire होने के बाद भी उसने सऊदी अरब, कुवैत और बहरीन पर हमले किए तब तक पाकिस्तान के कान पर जूं नहीं रेंगी लेकिन अब सैनिक और fighter jets भेज दिए और युद्ध फिर से भड़कने पर अगर पाकिस्तान के fighter jets और F -16 से सऊदी की तरफ से ईरान पर हमला करेगा तो ईरान उसकी ऐसी तैसी कर देगा

जाहिर है कि वार्ता फेल होने के बाद अगर युद्ध भड़का तो ईरान सऊदी अरब की साथ साथ पाकिस्तान को भी पेलेगा मजे की बात है एक चैनल पर पाकिस्तान का एक गुर्गा कह रहा था कि अगर पाकिस्तान में वार्ता सफल हो गई तो असीम मुनीर को नोबल प्राइज मिल सकता है कैसे कैसे सपने देखते हैं?

एक खबर के अनुसार डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से फ़ोन कर बात की थी और मोदी ने कहा था कि he had a "useful exchange of views" with Trump and emphasized the need to de-escalate the situation and keep the Strait of Hormuz open. ट्रंप ने ईरान के साथ चल रहे युद्ध के बारे सभी जानकारी से मोदी को अवगत कराया था इसमें कोई शक नहीं कि अगर मोदी ने वार्ता कराई होती तो परिणाम सुखद आ सकते थे लेकिन भारत मध्यस्थता नहीं कराना चाहता क्योंकि ऐसा करते ही न जाने कितने देश कश्मीर पर चौधरी बनने को तैयार हो जायेंगे 

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