कुछ सुप्रीम कोर्ट के जज आजकल बेलगाम हुए जो मर्जी बोल रहे हैं। क्या वे लोग मीडिया की सुर्ख़ियों में रहना चाहते हैं?
अभी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि “नोटबंदी से काला धन सफ़ेद में बदला; हम सब जानते हैं कि 8 नवंबर 2016 को क्या हुआ था, कालेधन का खत्म कहां हुआ? यह कालेधन को सफ़ेद बनाने का एक अच्छा तरीका था”।
यह बात जस्टिस नागरत्ना कोई नई नहीं कह रही। सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने 5:1 के फैसले में नोटबंदी पर मुहर लगा दी थी लेकिन जस्टिस नागरत्ना ने Dissenting Judgement देते हुए उसे गैर कानूनी कहा था। मुझे लगता है नोटबंदी से उन्हें सबसे ज्यादा दर्द हुआ है जो अभी तक जाने का नाम नहीं ले रहा। यह दर्द उन्हें क्यों हुआ, ये वो ही जानती होंगी।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
कल जस्टिस नागरत्ना ने कहा है कि “Judges who are unable to live within their known source of income and fall prey to greed and temptation must be weeded out of the system”. मतलब साफ है जज भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं।
कहने को यह प्रवचन बहुत आकर्षक है लेकिन क्या इसका मतलब यह नहीं निकाला जा सकता कि आप ऐसे भ्रष्ट जजों को जानती हैं? फिर निकालेगा कौन उन्हें? आप सुप्रीम कोर्ट के CJI से कहें कि सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की समिति बना कर ऐसे जजों को चिन्हित करे और उन्हें निकालने के कदम उठाए जाएं। लेकिन क्या ऐसा किया जा सकता है जब यशवंत वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने कोई कार्रवाई नहीं की?
जस्टिस वर्मा ने तो न्यायपालिका के मुख पर कालिख पोत दी और सुप्रीम कोर्ट चुपचाप देखता रहा। आप कहिये चीफ जस्टिस से कि अब तो वर्मा ने रिटायरमेंट ले ली है, अब तो उनके खिलाफ FIR दर्ज कर CBI को जांच करने के लिए कहें। अगर ऐसा नहीं कर सकती तो आलतू फ़ालतू बयानबाजी का कोई औचित्य नहीं है।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार दूर करने के लिए खुद न्यायपालिका को सामने आना पड़ेगा लेकिन वह तो NCERT की किताब भी बर्दाश्त नहीं कर सकती। न्यायपालिका ने वह किताब तो रोक दी लेकिन चीफ जस्टिस और पूरी न्यायपालिका यह नहीं समझती कि न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के लिए Public Perception क्या है? आज के जस्टिस नागरत्ना के बयान ने यह तो साबित कर दिया कि न्यायपालिका में Corruption है, फिर NCERT की किताब वापस पाठ्यक्रम में शामिल करने के आदेश दिए जाएं।

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