गुवाहाटी हाई कोर्ट के जस्टिस पार्थिव ज्योति सैकिया ने कल पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत की अर्जी ख़ारिज करते हुए कहा कि उसका Custodial Interrogation आवश्यक है यह पता लगाने के लिए कि किसने उसे झूठे दस्तावेज़ दिए जिनमें आरोप लगाया गया कि CM हिमंता बिश्वा सरमा की पत्नी के पास 3 पासपोर्ट हैं और अमेरिका में एक कंपनी है।
खेड़ा ने चुनाव के नाजुक समय पर hit and run वाली ओछी हरकत की है उसके लिए जल्दी से जल्दी इसको हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ करनी चाहिए। अरविन्द केजरीवाल की ओछी हरकत को कांग्रेस भी कर रही है।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
खेड़ा ने कोर्ट में कहा था कि वे दस्तावेज़ उसे उसके साथियों ने दिए, इस पर ही कोर्ट ने कहा कि “इसलिए ही हिरासत में पूछताछ जरूरी है यह पता लगाने के लिए कि वो किन साथियों की बात कर रहे हैं और उनसे दस्तावेज़ किसने प्राप्त किये”। कोर्ट ने कहा कि खेड़ा पुलिस जांच से बचने की कोशिश कर रहे हैं जबकि उस पर आरोप BNS के section 339 के अंतर्गत आते है (possession of forged documents)।
खेड़ा ने रिंकी भुइया पर जोर शोर से आरोप तो लगा दिए और अब कह रहा है कि उसके पब्लिक में प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान उस पर क्रिमिनल केस दर्ज किया गया। उसने कहा कि “FIR was registered to satisfy ulterior motive/political vendetta of the complainant who is the wife of the Assam CM”.
और ड्रामेबाजी देखिए, वो कह रहा है कि “the petitioner (वो खुद), being a prominent political figure and spokesperson, has been targeted for statement made in discharge of his public duties and impugned FIR constitutes an abuse of process of law, aimed at harassment and intimidation and in furtherance of such ulterior motive, particularly at the instance of complainant who is closely associated to the incumbent CM of the state of Assam".
प्रेस कॉन्फ्रेंस में झूठे दस्तावेजों के आधार पर किसी महिला पर बेबुनियाद आरोप लगाना खेड़ा की कौन से पब्लिक ड्यूटी है और अगर आरोप लगाए हैं तो उन्हें सिद्ध भी करे। तुम अगर आरोप नहीं लगाते तो केस भी दर्ज नहीं होता और केस दर्ज किया गया है तो वो Political Vendetaa कैसे हो गया। और रिंकी भुइया का Ulterior Motive क्या हो सकता है? तुम तो उसकी इज़्ज़त पब्लिक में उतार दो और वो FIR भी दर्ज नहीं करा सकती।
गुवाहाटी हाई कोर्ट के आदेश बिल्कुल स्पष्ट हैं खेड़ा को गिरफ्तार करने के लिए।
आज जयराम रमेश ने कहा है कि “पूरी भारतीय कांग्रेस अपने मीडिया और प्रचार विभाग के अध्यक्ष पवन खेड़ा के साथ पूरी मजबूती से एकजुट खड़ी है।गुवाहाटी हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की प्रक्रिया चल रही है। हमें विश्वास है कि धमकी/डराने-धमकाने और उत्पीड़न की राजनीति पर न्याय की जीत होगी”।
अब डराना धमकाना याद आ रहा है लेकिन जब नहीं सोचा कि मिथ्या आरोप लगाने का परिणाम क्या हो सकता है? राहुल गांधी तो चुनाव आयोग के आयुक्तों को अभी ही डरा रहा है कि आपको रिटायर होने के बाद भी हम नहीं छोड़ेंगे।
सुप्रीम कोर्ट जाने से पहले खेड़ा को दबोच लेना चाहिए। ऐसा न हो सुप्रीम कोर्ट Coercive Action पर रोक लगा दे।

No comments:
Post a Comment