लगता है जितना फर्जीवाड़ा भारत में है शायद ही किसी और देश में हो। कांवड़ यात्रा के दौरान ढाबों के मालिकों को असली नाम लिखने पर मुस्लिम वोट के भूखे नेताओं और उनकी पार्टियों ने बहुत बवाल काटा और उसको समर्थन मिला वकीलों और अदालतों का, क्यों? बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया(BCI) ने क्यों नहीं फर्जीवाड़ों की वकालत करने वाले वकीलों और जजों को कटघरे में खड़ा किया? असली नाम छुपाकर व्यापार करना क्या अपराध नहीं?
बार कौंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन मिश्रा जी बार बार कह रहे हैं कि लगभग 35 से 40 प्रतिशत वकीलों के पास फर्जी डिग्रियां हैं, वे मनगढंत डिग्री सर्टिफिकेट के आधार पर अदालतों में प्रैक्टिस कर रहे है। जब डिग्रियों की सत्यापन प्रक्रिया शुरू की गई, तो लगभग 40 प्रतिशत वकीलों ने फार्म ही नहीं भरे, जिससे उनके फर्जी होने का संदेह है”। करीब ऐसी ही बात चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कही थी जिस पर वकील बवाल कर रहे हैं कि वे अपना बयान वापस लें।
अब ये बयानबाजी से क्या लाभ हो सकता है? आपकी BCI को चाहिए कि जो वकील अपनी डिग्री का सत्यापन नहीं कराते, उन्हें तत्काल प्रभाव से प्रैक्टिस करने से रोक दिया जाए। फर्जी डिग्री धारक वकील लोगों को लूट रहे हैं।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
मनन मिश्रा जी को पता होगा कि 10 अप्रैल, 2023 को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जे बी परदीवाला की पीठ ने रिटायर्ड जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता में एक 8 सदस्यों की समिति गठित की थी जो 25 लाख वकीलों की डिग्रियों का सत्यापन करके 31 अगस्त, 2023 तक अपनी रिपोर्ट देगी। उस कमिटी में सदस्य थे।
-Justice Deepak Gupta: Former Judge of the Supreme Court (Chairperson)
Justice Arun Tandon: Former Judge of the Allahabad High Court
Justice Rajendra Menon: Former Chief Justice of the Delhi High Court
Mr. Rakesh Dwivedi: Senior Advocate
Mr. Maninder Singh: Senior Advocate
Three Members: Nominated by the Bar Council of India (BCI)
यानी 3 सदस्य तो BCI ने भी समिति में नामित किये थे।
कुछ विश्वविद्यालयों ने डिग्री सत्यापन के लिए फीस की मांग की थी लेकिन फिर सुप्रीम कोर्ट को आदेश देना पड़ा कि वे विशवविद्यालय बिना किसी फीस के डिग्रियों के सत्यापन में मदद करेंगी।
लेकिन 3 साल बाद भी अभी तक समिति ने कोई रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को जमा नहीं की लगती है। मुझे नवंबर 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने एक RTI के जवाब में कहा था कि जिस केस में सुप्रीम कोर्ट ने समिति का गठन किया था, उसमें आप पार्टी ही नहीं थे और इसलिए आपको सूचना मांगने का अधिकार नहीं है, लेकिन साथ में यह भी कहा कि अभी तक समिति ने कोई रिपोर्ट नहीं दी है।
ऐसे में सवाल यह है कि मनन मिश्रा जी समिति का कार्य संपन्न कराने के लिए क्या कर रहे हैं। 3 साल से समिति 8 सदस्य तो मुफ्त का मलीदा पेल रहे होंगे। मनन मिश्रा की BCI को ऐसे सभी वकीलों के प्रैक्टिस करने पर प्रतिबंध लगा देना चाहिए जिन्होंने डिग्री सत्यापन के लिए फॉर्म नहीं भरा और इस विषय में सुप्रीम कोर्ट में समिति के गठन के आदेश पर पुनः याचिका दायर कर बैन की मांग करनी चाहिए और समिति से अब तक हुए डिग्रियों के सत्यापन की रिपोर्ट देने को कहने के आदेश सुप्रीम कोर्ट से मांग करनी चाहिए। अब तक किए गए सत्यापन में कितनी डिग्रियां फर्जी पाई गई और उन वकीलों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसका भी खुलासा करना चाहिए।

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