5 साल मुसलमानों का काम नहीं करूँगा : रितेश तिवारी, बीजेपी विधायक

                                                                                                      साभार : सोशल मीडिया 
आज कल सोशल मीडिया पर एक बीजेपी विधायक रितेश तिवारी का बयान बहुत वायरल हो रहा है। हालाँकि ना ही पुष्टि हो पायी है और ना ही तिवारी द्वारा इसका खंडन किया गया है। अगर तिवारी के इस बयान में सच्चाई है तो इसके जिम्मेदार मुसलमानों का दोगलापन है जो सरकार की हर सुविधा का लाभ तो उठाना जानते हैं लेकिन बीजेपी को हराने के लिए एकजुट होकर विरोध में वोट देना। चर्चा यह भी है कि BPL और अन्य सुविधाओं का लाभ उठाने वालों की जाँच करने की मुहिम भी चलाए जाने का अंदेशा दर्शाया जा रहा है। 
मुसलमान गोधरा के लिए नरेंद्र मोदी को कोसने का कोई मौका नहीं छोड़ता लेकिन सच्चाई जानने की कोशिश नहीं करता। ये मोदी ही है जिसने गुजरात में होते दंगों पर लगाम लगाई है। 2002 दंगों से पहले हुए दंगों में कितने मुसलमानों की जानें गयी भूल जाता है। कांग्रेस के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश के मलियाना में अलविदा नमाज के दौरान हुए दंगे में कितने मुसलमानों की जाने गयीं। इतना ही नहीं जितने दंगे कांग्रेस कार्यकाल में हुए किसी पार्टी के राज में नहीं हुए। मुसलमान कट्टरपंथियों और छद्दम सेक्युलरिस्ट्स के कहने पर हर दंगे के लिए तत्कालीन जनसंघ वर्तमान बीजेपी को ही दोषी मानती है।  
ये सेकुलरिज्म का जहर पिलाकर हिन्दुओं को गुमराह करते है, कहते बीजेपी मुसलमानों को न टिकट देती है और न ही मंत्री बनाती है क्यों बनाये या टिकट दे। मुसलमान बीजेपी उम्मीदवार हिन्दू क्षेत्रों से जीतता आता है लेकिन मुस्लिम क्षेत्रों की EVM खुलने से अपने जमानत जब्त करवा लेता है। 
जहाँ तक तिवारी के बयान की बात है, तिवारी की बात में दम ही नहीं बल्कि तत्कालीन चावड़ी बाजार वर्तमान मटिया महल विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनसंघ के महानगर पार्षद(उन दिनों आज की विधानसभा को महानगर परिषद् और जीतने वाले को महानगर पार्षद कहते थे) अनवर अली देहलवी की बात याद आती है जो मुसलमानों को साफ कहते थे कि "पहले हिन्दुओं का काम करूँगा मुझे जिताने वाला चरखे वालन का हिन्दू है लाल दरवाज़े के मुसलमानों ने मुझे हरा दिया था।" अनवर और दलजीत टंडन को दूसरा वाजपेयी कहा जाता था। जिस पब्लिक मीटिंग में अटल बिहारी नहीं पहुँच पाते थे वहां अनवर या दलजीत का नाम पोस्टरों पर होता था और भीड़ में कोई कोई कमी नहीं होती थी। देश में आपातकाल लगने से पहले तक जामा मस्जिद, गेट नंबर 1 के सामने निवास एवं कार्यालय होने के कारण जनसंघ का झंडा लहराता था। उस समय दिल्ली से 5 महानगर पार्षद जनसंघ से जीतकर महानगर परिषद् पहुंचे थे। इतना ही नहीं दो/तीन चुनाव पहले लिखा था कि बीजेपी मंडल अध्यक्ष के पोलिंग बूथ से बीजेपी को जीरो(00000000)वोट मिली थी। यानि मंडल अध्यक्ष ने भी अपनी पार्टी को वोट नहीं दिया।         
रितेश तिवारी जी का बयान बहुत लोगों को बुरा लग रहा है लेकिन किस एंगल से बुरा है, यह कोई नहीं बता सकता? अगर लड़ाई में हमारा जो साथ दिया है, मैं उसके साथ खड़ा रहूंगा या जो मुझे मारने के लिए आया है, मैं उसके साथ खड़ा रहूंगा यह कोई बता सकता है?

याद करिए वह कांग्रेस का जमाना, जब कोई अवार्ड बाटना होगा, कोई पेट्रोल पंप देना होगा, कोई गैस एजेंसी क्या लाइसेंस इश्यू करना होगा, तो कांग्रेस पहले अपने आदमियों को ढूंढती थी, और आज भी ढूंढती है, लेकिन यही काम अगर कांग्रेस के जगह पर बीजेपी करती है तो आपको बुरा क्यों लगता है? आप करें तो प्यार हम करें तो बलात्कार नहीं चलेगा । जमाना बदल गया है दूसरे एंगल से सोची ये।
कोई मर्द है तो बता दे भारत में कहीं भी गैस एजेंसी अगर 20 साल 30 साल पहले खुली है तो किसी गैर कांग्रेसी को मिला हो? और यही बात अगर तिवारी जी कहते हैं कि भाई जो मेरा साथ दिया है मैं उसका साथ दूंगा तो इसमें बुरा क्या है।
मोदी जी की आईडियोलॉजी अब बदलेगी उनका कहना है सबका साथ सबका विश्वास सबका प्रयास सबका साथ क्यों भाई जो आपका दुश्मन है उसका साथ क्यों दोगे क्यों जो चिल्ला चिल्ला के बोल रहा है कि बीजेपी को वोट मत दीजिए मत दीजिए मत दीजिए और फिर उसी के साथ आप क्यों जाएंगे वह तो हत्या कर देगा आपकी ।

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