जय सोमनाथ

सुभाष चन्द्र

अरब सागर पर स्थित “सोमनाथ मंदिर” प्राचीन तीर्थ स्थलों में से एक है।  

यह “प्रथम आदि ज्योतिर्लिंग” श्री सोमनाथ महादेव हैं इसका उल्लेख स्कंद पुराण, श्रीमद् भागवत और विष्णु पुराण में है और ऋग्वेद की स्तुति में है आज के दिन 1951 में सरदार पटेल के हाथों जीर्णोद्धार के बाद राष्ट्र को समर्पित हुआ था

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तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने मंदिर के पुनरुद्धार में रोड़े अटकाने के भरसक प्रयास किए और गिरावट की सभी सीमाएं लांघ दी नेहरू को सरदार पटेल के इस मंदिर निर्माण के कार्य से सख्त नफरत थी नेहरू ने राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को भी उद्घाटन में जाने से मना किया लेकिन वे गए नेहरू ने अपनी कैबिनेट के मंत्रियों को भी उद्घाटन से दूर रहने को कहा और के एम मुंशी के अलावा कोई नहीं गया नेहरू की मानसिकता सनातन संस्कृति को मिटाने की थी, तो उन्हें मंदिर निर्माण कैसे भाता नेहरू के पदचिन्हों पर  चल कर आज के कांग्रेसी नेता (राहुल गांधी समेत) मंदिरों से सख्त नफरत करते हैं

इस मंदिर के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि इसका 

पहला मंदिर निर्माण भगवान सोम ने सोने से किया;

मंदिर का दूसरा निर्माण भगवान सूर्य ने चांदी से किया;

तीसरा निर्माण भगवान कृष्ण ने लकड़ी से किया;

चौथा निर्माण राजा भीमदेव ने पत्थर से कराया;

मंदिर की विशेषताओं में देखें तो -

मंदिर में गर्भगृह, सभामंडप और नृत्यमंडप;

मंदिर में 155 फ़ीट ऊंचा शिखर;

मंदिर के शिखर पर कलश का वजन 10 टन;

शिखर पर 27 फ़ीट ऊंचा और 1 फ़ीट चौड़ा ध्वज

वैसे तो आताताई मुगलों को मंदिरों से नफरत रही हैं लेकिन सोमनाथ मंदिर पर तो उन्होंने 17 आक्रमण किए उन आक्रमणों में प्रमुख और उनके चलते मंदिर निर्माण कैसे होता रहा, उनके बारे में कुछ जानकारी नीचे दे रहा हूं

(649 ई. में पहली बार मैत्रक के राजाओं ने बनवाया;)

75 साल बाद गवर्नर जुनैद ने हमला किया;

1025 - 26 में महमूद गजनवी ने मंदिर को लूटा;

गजनवी ने लूट के दौरान 50 हजार लोगों को क़त्ल किया;

(1026 - 42 के बीच भीमदेव सोलंकी ने मंदिर फिर खड़ा किया)

1299 में अलाउद्दीन खिलजी ने हमला किया;

(1169 में राजा कुमारपाल ने मंदिर के पत्थर लगवाए)

(1308 में चूड़ासमा राजा महिपाल प्रथम फिर निर्माण किया)

1395 में दिल्लीं सल्तनत के गवर्नर जफ़र ने तोड़फोड़ की;

1451 में गुजरात के शासक महमूद ने मंदिर को तहस नहस किया

1665 में औरंगज़ेब ने मंदिर गिराने का फरमान जारी किया;

1706 में औरंगज़ेब ने फिर हमला किया ताकि पूजा न हो सके 

(1763 में अहिल्याबाई ने नए मंदिर का निर्माण किया; नाम पुराना सोमनाथ)

आज सोमनाथ मंदिर निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने पर मनाए गए “अमृत महोत्सव” का उद्घाटन 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया और आह्वान किया कि हमें सोमनाथ मंदिर जैसी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासतों को सम्भाल कर रखना है जो भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में उपयोगी हैं

आपने कभी कांग्रेस या विपक्ष के किसी नेता को सोमनाथ के दर्शन के लिए जाते नहीं देखा होगा - बस एक बार 2017 में राहुल गांधी गया था लेकिन Visitors Book में अपना धर्म लिखने में कुछ गड़बड़ हो गई और तब प्रचारित किया गया कि ये तो “दत्तात्रेय गोत्र” के ब्राह्मण है 

भगवान सोमनाथ को समर्पित है आज का दिन, इसलिए किसी के लिए अपशब्द नहीं कहूंगा लेकिन एक मूर्ख अराजकतावादी नेता ने दो दिन पहले कहा है कि मोदी औरंगज़ेब है, वो इसलिए कहा क्योंकि उसकी पार्टी की सरकार का एक मंत्री भ्रष्टाचार के आरोप में पकड़ा गया अब इस बेवकूफ को इतना भी नहीं पता कि औरंगज़ेब ने सोमनाथ मंदिर 2 बार तोड़ा था जबकि मोदी ने उसका पुनरुद्धार किया और आज भव्य समारोह में भी गए उस नेता का नाम आप समझ ही गए होंगे

जय सोमनाथ 

हर हर महादेव 

जय श्री महाकाल 

जय श्रीराम 

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