यह तो राजनेताओं का चलन है कि जहां उनके बयान की छीछलेदार होती, तो वे तुरंत सफाई देते हैं कि उनके बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश किया है भले ही वह बयान मीडिया के वीडियो में साफ़ सुनाई दे रहा हो। एक बात और कह देते हैं राजनेता कि उनके बयान से किसी की भावनाओं को ठेस पहुंची है तो उसके लिए मुझे खेद है।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने भी राजनेताओं की तरह पलटी खाई और सफाई दी कि “मीडिया के एक वर्ग द्वारा उनकी मौखिक टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया है”। उन्होंने कहा कि उनकी आलोचना देश के युवाओं के खिलाफ नहीं थी, बल्कि फर्जी डिग्री के सहारे विभिन्न पेशों में शामिल होने वाले लोगों के खिलाफ थी। लेकिन नेताओं की तरह बस “खेद” व्यक्त नहीं किया।
Live Law ने सूर्यकांत जी के बयान को इस भाषा में प्रकाशित किया था।
“There are youngsters like Cockroaches, who don’t get any employment and don’t have any place in the profession. Some of them become media, some of them become social media, some of them become RTI activist, some of them become other activists and they start attacking everyone”.
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
अब सूर्यकांत जी स्पष्टीकरण दे रहे हैं कि “मुझे न केवल हमारे वर्तमान युवा और भविष्य के मानव संसाधन पर गर्व है, बल्कि भारत का हर युवा मुझे प्रेरित करता है और यह भी कहा कि हमारे युवा विकसित भारत के स्तम्भ हैं और वे देश के युवाओं का बहुत सम्मान और आदर करते हैं”।
मैंने कल लिखा था कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 अप्रैल 2023 को रिटायर्ड जस्टिस दीपक गुप्ता की अध्यक्षता में 8 सदस्यीय समिति बनाई थी 25 लाख वकीलों और जजों की डिग्रियों के सत्यापन के लिए और समिति को 31 अगस्त, 2023 तक रिपोर्ट देने को कहा था। मैंने यह भी बताया था कि कैसे मुझे सुप्रीम कोर्ट के CPIO ने रिपोर्ट के स्टेटस की जानकारी देने से मना करते हुए यहां तक कहा कि आपको तो सूचना मांगने का अधिकार ही नहीं है क्योंकि आप केस में पार्टी नहीं हो।
क्या किसी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति की रिपोर्ट के बारे में सूचना मांगने का भी अधिकार नहीं है यदि वह केस में पार्टी नहीं है? इस तरह का उत्तर कोई “परजीवी” अधिकारी ही दे सकता है।
करीब तीन साल से डी के गुप्ता समिति ने कोई अंतरिम रिपोर्ट भी नहीं दी है जबकि honorarium बराबर मिल रहा होगा। किसकी जेब से पैसा खर्च हो रहा है। पहले उस समिति से अभी तक सत्यापित की डिग्रियों की रिपोर्ट तो तलब कीजिए शायद उसमे ही दिल्ली के वकीलों की जानकारी निकल आए और CBI जांच की जरूरत ही न पड़े। और हां, डी के गुप्ता समिति को यथाशीघ्र काम पूरा करने के लिए कहा जाए।
हो सकता है आपकी मंशा वह न रही हो जैसा मीडिया में बताया लेकिन नूपुर शर्मा को तो आपने जस्टिस परदीवाला के साथ पूरी तरह सोच समझ कर अपमानित किया था जबकि विदेशी शक्तियां तक उसके कथित बयान पर सरकार को घेर रही थी और आपने आग में घी डालने का काम किया नूपुर को सारे फसाद की जड़ बता कर। आप दोनों जज छोटे नहीं हो जाते अगर आप उससे अपने शब्दों के लिए अफ़सोस ही प्रकट कर देते।
चलिए आपने तो स्पष्टीकरण दे दिया लेकिन यह भी सत्य है कि कई बार जजों द्वारा अवांछनीय टिप्पणियां की जाती है को judicial decorum को शोभा नहीं देती।

No comments:
Post a Comment