जिस आरोप में अलका लांबा नपी, वही आरोप तो ममता बनर्जी पर था, फिर ममता के केस पर सुप्रीम कोर्ट निर्णय क्यों नहीं दे रहा?

सुभाष चन्द्र

मई 25 को दिल्ली के Rouse Avenue कोर्ट ने कांग्रेस की नेता अलका लांबा को जुलाई, 2024 में  जंतर मंतर पर किए गए प्रदर्शन मामले में दोषी करार दे दिया है 

ये प्रदर्शन महिलाओं को आरक्षण देने के लिए किया गया था जबकि महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में आरक्षण सितंबर, 2023 में ही दे दिया गया था और वह परिसीमन के बाद लागू होना था अलका कह रही हैं कि वह महिलाओं को दिए गए आरक्षण के implementation और महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रदर्शन कर रही थी जो उनका संवैधानिक अधिकार है 

अलका लांबा को क्या पता नहीं कि कांग्रेस ने महिलाओं का आरक्षण दशकों तक लटकाए रखा था और क्या कांग्रेस राज में महिलाएं सुरक्षित थी जो प्रदर्शन में बवाल खड़ा कर रही थी निर्भया कांड तो कांग्रेस राज में ही हुआ था, यह बात भी भूल गई

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चर्चित YouTuber 
अलका लांबा को निषेध आज्ञा के उल्लंघन और Public Servants के कार्य निर्वहन में बाधा डालने का दोषी करार दिया गया है और 4 जून को सजा का ऐलान होगा अलका ने आरोप लगाया है कि पुलिस पर दबाव था और आज मुझे दोषी कहा गया है जैसे मैंने बहुत बड़ा अपराध किया हो लेकिन मैं डरने वाली नहीं हूँ जो मर्जी सजा दी जाए “there is chaos and cries for help all over the country because of this and if we fight, we are held guilty”. ये नेता लोग प्रदर्शन करते हुए गिरफ्तार होना बड़ी बात नहीं समझते क्योंकि उन्हें लगता है कि कुछ नहीं होगा लेकिन जब कार्यवाही हो जाती तो पता चलता है। 

IPAC में ED की रेड में ममता बनर्जी ने भी यही अपराध किया था जब उसने ED अधिकारियों के काम में बाधा पहुंचाई थी और वहां के दस्तावेज़ तक उठा कर ले गई थी वो मामला 8 जनवरी का था लेकिन सुप्रीम कोर्ट में अभी तक लंबित है सुप्रीम कोर्ट ED की याचिका पर सजा तो नहीं देगा लेकिन ट्रायल के आदेश तो देगा लेकिन वह भी 5 महीने से लटका हुआ है ममता का open & Shut case है उस पर तुरंत निर्णय देना चाहिए लेकिन कोर्ट UAPA के आरोपियों को जमानत देने में ज्यादा इच्छुक है

अलका लांबा कहती है वो डरती नहीं है हर कांग्रेसी यही कहता है कि हम नहीं डरते कल अजय राय भी कह रहा था कि चाहे 100 केस दर्ज कर दो, मैं पीछे हटने वाला नहीं हूँ ऐसा ही पवन खेड़ा ने कहा था लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भागता फिरा अग्रिम जमानत के लिए

पवन खेड़ा को सुप्रीम कोर्ट ने article 21 का सहारा लेकर अग्रिम जमानत दे दी उसे जमानत देने से ही अजय राय को हिम्मत मिली प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपशब्द कहने की सत्य कहें तो सुप्रीम कोर्ट जिम्मेदार है प्रधानमंत्री का अपमान कराने के लिए

अभी अलका लांबा कह रही है कि वो डरती नहीं लेकिन जब 4 जून को कुछ भी सजा होगी तो उसके खिलाफ हाई कोर्ट सुप्रीम कोर्ट तक एड़ियां रगड़ेगी और कोई बड़ी बात नहीं कि सुप्रीम कोर्ट अंत में सजा को रद्द कर दे यह कह कर कि प्रदर्शन करना article 21 में मौलिक अधिकार है

कांग्रेस और विपक्ष के नेताओं की गालीबाजी पर लगाम लगाने के लिए, उन पर तुरंत केस दर्ज कर देने चाहिए जिससे पहले पुलिस और फिर अदालतों के चक्कर काटते रहें गाली बकने पर  तुरंत केस दर्ज किया जाए तो अक्ल ठिकाने आ जाएगी और फिर कहना बंद कर देंगे “हम नहीं डरते”

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