ईरान अमेरिका युद्ध में ईरान के लिए गीत गाने वालों की कमी नहीं है कि ईरान बड़ी बहादुरी से लड़ा और अमेरिका को घुटनों पर ला दिया। एक पत्रकार को मैं अभी सुन रहा था। वो कह रहे थे अमेरिका ईरान की सत्ता बदलने के लिए 100 लोग भी नहीं जुटा सका और पूरा ईरान एकजुट खड़ा है। अरे भाई तानाशाही के सामने तो डर के मारे सब एकजुट ही रहेंगे वरना क़त्ल कर दिए जाते हैं और यही हाल चीन में है।
ईरान जब बंदूक की गोली से जब 45,000 विरोधियों को मौत के घाट उतार देगा, तो विद्रोह कैसे होगा? कश्मीर से मुस्लिम 600 करोड़ रुपए और गहने लेकर खड़े हो गए थे ईरान को नज़राना देने के लिए। अनेक मुस्लिम भारत में कहते हैं कि उन्हें संविधान नहीं शरिया चाहिए। राजनीतिक दल तो मुस्लिम प्रेम में अंधे हो चुके हैं और उनके लिए वो हिंदुओं का कत्लेआम भी करने में पीछे नहीं हटेंगे जबकि बांग्लादेश में हुई हिंदुओं पर बर्बरता और कल भगवान राम की प्रतिमा के अपमान पर सब खामोश हैं। इतना ही नहीं फिलिस्तीन के नारे लगाते हैं और फिलिस्तीन का “पर्स” लेकर चलते हैं, “All Eyes on Rafah” और “All Eyes on Gaza” के पोस्टर लिए घूमते हैं ये रुदाली गैंग।
![]() |
| लेखक चर्चित YouTuber |
ईरान की गायिका Parastoo Ahmadi को और उसकी प्रोडक्शन टीम के 8 सदस्यों को ईरान की एक अदालत ने 74 कोड़े मारने की सजा दी है और दो वर्षों तक देश छोड़ने पर प्रतिबंध तथा दो वर्षों तक किसी भी कलात्मक गतिविधि में भाग लेने पर प्रतिबंध की सजा सुनाई है। यह कठोर दंड वर्ष 2024 में यूट्यूब पर वायरल हुए एक वीडियो के कारण दिया गया, जिसमें उन्होंने अनिवार्य हिजाब के बिना एक देशभक्ति गीत गाया था।
क्या कसूर था इन लोगों का? दिसंबर 2024 में परस्तू अहमदी ने एक ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम में प्रसिद्ध देशभक्ति गीत Az Khoone Javanane Vatan प्रस्तुत किया। इस दौरान उन्होंने हिजाब नहीं पहना था और बिना आस्तीन(स्लीवलेस) पोशाक धारण की हुई थी।
ईरान के Qom Province की एक आपराधिक अदालत ने उन्हें और उनकी टीम को "सार्वजनिक शालीनता का उल्लंघन करने" तथा इंटरनेट पर "अश्लील और अनैतिक सामग्री" प्रसारित करने का दोषी ठहराया और उन्हें 74 कोड़ों की सजा के अतिरिक्त, कलाकारों पर दो वर्षों तक विदेश यात्रा करने पर प्रतिबंध तथा दो वर्षों तक सभी प्रकार की कलात्मक गतिविधियों में भाग लेने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
सुना है कुछ मानवाधिकार संगठनों ने इस फैसले की कड़ी निंदा की है। उनका मानना है कि यह निर्णय कलात्मक अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और महिलाओं के मूलभूत अधिकारों का स्पष्ट उल्लंघन है।
इतना बहादुर है ईरान जो अपनी महिलाओं को हिज़ाब न पहनने के लिए कोड़े मारता है। लेकिन उसे कुछ फर्क नहीं पड़ने वाला क्योंकि इस्लामिक मुल्क अपने हिसाब से इस्लाम की व्याख्या करने में माहिर हैं।
और हमारे देश का सेक्युलर गिरोह ऐसे मामलों में खामोश रहना पसंद करता है। वो यहाँ मकबूल फ़िदा हुसैन की हिन्दू देवी देवताओं की बनाई गई नग्न पेंटिंग्स को अभिव्यक्ति की आज़ादी मानता है जो ईरान जैसे मुल्क में नहीं होनी चाहिए। यहाँ उसके वोट बैंक को सब कुछ मिल रहा है लेकिन NEET परीक्षा में उनकी लड़कियां बुरका पहन कर जाएंगी जबकि पेपर लीक के मामले के बाद आज पूरी स्वच्छता से परीक्षा हुई।

No comments:
Post a Comment