भारत की राजनीति में अरविन्द केजरीवाल, राहुल गाँधी और ममता बनर्जी ऐसे परकोटे हैं जो जो खेल खेलने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अभिषेक के लिए सहानुभूति बटोरने वाले बताएं कि "अभिषेक हेलमेट पहनकर क्यों निकला था?" मंशा साफ है सारा खेल पहले से ही सुनियोचित था। जहाँ तक कल्याण बनर्जी की बात है ये तो किसी ड्रामेबाज़ से कम नहीं। इसे तो किसी ड्रामा ट्रूप में या फिल्मों में चले जाना चाहिए। पागल सिर पर कहाँ खून था जो कपडा रख रहा था?
याद है 2 मई, 2021 को जब बंगाल के चुनाव नतीजे आए थे तो ममता की पार्टी के गुंडों ने हिंदुओं पर सामूहिक हमले किए थे, उनके घर जलाए गए, बहु बेटियों के बलात्कार किए गए और 80 हजार हिंदुओं को असम की तरफ पलायन करना पड़ा। जब 2020 में भाजपा अध्यक्ष नड्डा पर TMC के लोगो ने हमला किया तो अभिषेक बनर्जी ने कहा - "Nadda was in trouble today. What can I do? Outburst of people's anger is not my responsibility". महुआ मोइत्रा ने भी पल्ला झड़ते हुए कहा था, “ये कोई नई बात नहीं है, बंगालियों का खून गरम होता है, इसको आप राजनीतिक हिंसा के तौर पर मत देखिए, यह बंगाल के लोगो का इतिहास है”।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
हिंसा नहीं होनी चाहिए लेकिन आपने 15 साल क्या किया, उसे भी तो याद करो। आप क्यों भूल जाते हो कि 15 साल लेडी बगदादी बनकर ममता ने क्या क्या जुल्म किए हिंदुओं पर, उन्हें उनके त्योहार तक नहीं मनाने दिए। तब सारे बेशर्म विपक्षी नेता खामोश रहते थे लेकिन आज उन्हें लोकतंत्र खतरे में दिखाई दे रहा है।
कल कल्याण बनर्जी भी रोया है कि “मुझे मार गया, पत्थर फेंके गए, मेरे सिर में चोट लगी, मुझे भाजपा के लोगों ने मारने की कोशिश की, पुलिस ने कुछ नहीं किया”। ममता कल्याण को मिलने उसके घर गई। ममता को याद है ममता के राज में पुलिस TMC के गुंडों के साथ होती थी, पार्टी के नेता की अनुमति बिना रिपोर्ट तक नहीं लिखती थी, आज रो रहे हो।
कल्याण बनर्जी पर हमले को सब विपक्षी नेता संसद में भी रोएंगे लेकिन उस वक्त वो सब हंस रहे थे जब कल्याण बनर्जी उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ की मिमिकरी कर रहा था, उनके चलने की, बोलने की और एक्शन्स का मजाक उड़ा रहा था। कल्याण बनर्जी तुम पर जो हमला हुआ, उससे बड़ा हमला तो तुमने धनखड़ पर किया था।
इसी कल्याण बनर्जी ने नतीजे आने से 2 दिन पहले कहा था - “अमित शाह को मैं उल्टा लटका दूँगा, वो एक जल्लाद है, एक गुंडा है, गुंडागर्दी उसके खून में है और वह एक अत्यंत घटिया आदमी है”। नशे में धुत्त थे कल्याण क्योंकि सपने में भी नहीं सोचा था कि ममता हार जाएगी। ये शब्द असली पत्थरों से भी बड़े पत्थर थे जो आपने अमित शाह को मारे और ऐसे ही पत्थर अभिषेक बनर्जी ने मारे थे।
ममता की हताशा अभी और बढ़ेगी क्योंकि कर्मो का फल मिलना तो निश्चित होता है। आज पार्टी खंड खंड होती नज़र आ रही है। अभिषेक पर हुए हमले का विरोध करने के लिए विधायकों की बुलाई गई बैठक में 80 में से केवल 20 ही पहुंचे। मतलब है सारे 32 मुस्लिम विधायक भी नहीं पहुंचे।
क्या क्या अपराध नहीं किए ममता की पार्टी ने! आज एक सांसद के पार्टी कार्यालय पर तोड़फोड़ की खबर थी क्योंकि वह ऑफिस तालाब को पाट कर बनाया हुआ था। कांग्रेस और सी.पी.एम. के ऑफिस छीन लिए थे लेकिन भाजपा आने के बाद जब उन्हें वो ऑफिस मिल गए तब भी भाजपा का धन्यवाद नहीं किया।
एक नेता तो TMC का अपने आप को भाजपा का घोषित करके मजे करने लगा जिससे कोई उस पर हमला न करे। ऐसे लोगों से ही नहीं, तृणमूल कांग्रेस के लोगो को भाजपा में एंट्री देने से सावधान रहना चाहिए। क्या पता कौन किस अपराध से जुड़ा हुआ हो?
ममता उबलने की बजाय घर में बैठ कर याद करे पिछले 15 साल में क्या क्या किया जिसका दंड जनता ने दिया। अलबत्ता बांग्लादेशी अभी भी उम्मीद लगाए बैठे है कि जब ममता वापस आएगी तो हम फिर बंगाल में घुस सकेंगी।

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