भारत भूषण तिवारी की कथित मुठभेड़ में जान चली गई। यह घटना 17 जून की है। भारत तिवारी सोशल मीडिया पर activist था और बिहार के भोजपुर जिले के गांव बिलौती का रहने वाला था जो सोशल मीडिया पर विभिन्न मुद्दों को उठाने की वजह से प्रसिद्ध था। बाढ़, नदियों के कटाव और उसकी वजह से लोगों के विस्थापन आदि को उठाना उसका कार्यक्षेत्र था।
लेकिन मेरी नज़र में ये कोई ऐसे विषय नहीं हैं जिसकी वजह से उसे कोई जान से मारने की कोशिश करेगा जैसा आरोप लगाया जा रहा है। पुलिस मुठभेड़ में मौत सवालों के घेरे में है। पुलिस का कहना है कि जब उसे सूचना मिली कि उसके पास अवैध हथियार हैं और और वो पब्लिक में Firing करता है तो वह उसे गिरफ्तार करने गई थी लेकिन उसने पुलिस वालों पर गोली चला दी और पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई जिसमें उसकी मौत हो गई।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
राज्य सरकार ने थानाध्यक्ष समेत 4 लोगों को सस्पेंड कर दिया और जून 23 की खबर के अनुसार उनके खिलाफ FIR भी दर्ज कर दी गई है और सरकार ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच भी बैठा दी है।
ऐसे मामले में राजनीति न हो ऐसा तो हो नहीं सकता। प्रशांत किशोर ने तो मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक नंबर का गुंडा तक कह दिया। भाई अपने को देख बिहार में कैसे फेल हुआ और IPAC में कैसे फंसा था।
इस बीच जून 22 को ही वकील विशाल तिवारी केस की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया लेकिन कोर्ट ने तत्काल सुनवाई करने से मना कर दिया और विशाल तिवारी को कहा कि नियम कायदों के अनुसार चलिए। पहले कोर्ट की रजिस्ट्री के सामने तत्काल सुनवाई के लिए अर्जी लगाओ, तब देखेंगे।
ये राज्य का मामला था और विशाल तिवारी को पहले पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी चाहिए थी। विशाल तिवारी ने याचिका में सीबीआई जांच और पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। विशाल तिवारी याचिका में और आगे बढ़ गया। उसने “देश में कानून के शासन की रक्षा के लिए एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति बनाए जाने की मांग की जिसका अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट का कोई रिटायर्ड जज हो”।
जहां तक सीबीआई जांच का सवाल है, वह आदेश तो हाई कोर्ट भी दे सकता था और FIR की मांग तो राज्य सरकार ने स्वयं ही पूरी कर दी। लेकिन भारत तिवारी को लेकर विशाल तिवारी का पूरे देश में कानून का शासन नहीं है, यह कहना कहाँ तक उचित है?
पहले भी देखा है विशाल तिवारी उतावलेपन में अनेक विषय सीधे सुप्रीम कोर्ट में ले जाते रहे हैं, उत्तर प्रदेश की मुठभेड़ों का मामला भी ये सुप्रीम कोर्ट ले गए थे लेकिन कुछ नहीं मिला। भारत तिवारी के विषय को तो पहले हाई कोर्ट ले जाना ही उचित था।
अगर मुठभेड़ गलत तरीके से हुई है तो यह गंभीर विषय है लेकिन फिर भी मेरा मानना है कि किसी का सोशल मीडिया पर मुद्दे उठाना किसी को मारने का कारण नहीं बनता। राज्य सरकार के विरुद्ध तो बहुत लोग बहुत कुछ लिखते हैं। जनता की आवाज़ उठाना हर किसी की आज़ादी का विषय है। अभी खान सर की बिल्डिंग में गोलीबारी का मामला चल ही रहा था और ये एक और विषय खड़ा हो गया। देखते हैं जांच में क्या निकलता है और सुप्रीम कोर्ट क्या आदेश देता है? मेरे विचार में कोर्ट विशाल तिवारी को हाई कोर्ट जाने के लिए कहेगा।

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