हिंदुओं को जहरीला कह रहा अखिलेश का सांसद, सनातन विरोधियों "अगर माँ का दूध पिया है तो किसी अन्य मजहब के लिए ऐसा बोलकर दिखाओ?" फिर कैसे हिंदुओं की वकालत कर रहे अखिलेश?

सुभाष चन्द्र

समाजवादी पार्टी में जितने भी हिन्दू हैं आखिर कब तक अपने नेताओं के गुलाम बनकर सनातन का अपमान सहते रहोगे? अगर कालनेमि या जयचन्द हो बात दूसरी है और नहीं अगर रगों में हिन्दू खून है बिना किसी देरी के समाजवादी पार्टी को छोड़ सनातन के खिलाफ जहर उगलने को सबक बंगाल की तरह सबक सिखाना होगा। पूछो इन सनातन विरोधियों से "अगर माँ का दूध पिया है तो किसी अन्य मजहब के लिए ऐसा बोलकर दिखाओ?" 

अखिलेश यादव ने कुछ दिन पहले हिंदुओं के लिए ऐसा बयान दिया जो किसी के गले से नहीं उतर सकता।  उन्होंने कहा -

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“मैंने और पिताजी ने हिंदुत्व के लिए क्या नहीं किया, लेकिन मुझे कदम कदम पर यह अहसास कराया गया कि हम हिंदू नहीं शूद्र हैं, पर मैं अडिग हूँ, सनातन की राह नहीं छोड़ने वाला”

एक और बयान में अखिलेश ने कहा - “मैं हर दिन भगवान श्री राम, भगवान शिव और जितने भी देवी देवता हैं, उन्हें प्रणाम करके ही घर से निकलता हूँ और जिन बीजेपी वालों को लगता है कि ऐसा मैं नहीं करता, वे आके देख सकते हैं।”

कल राम मंदिर में हुई कथित चोरी की जांच पर अखिलेश ने कहा कि मंदिर के पंडितों की भी जांच की जाएगी जो ब्राह्मणों का घोर अपमान है। बड़ा दूध उतर रहा है ब्राह्मणों और हिंदुओं के लिए हिंदू वोट के लिए लेकिन क्या हिंदू तुम्हें वोट देंगे? उधर आपने सापाचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को खुला छोड़ रखा है मोदी और योगी को गाली बकने के लिए और फिर भी हिंदुओं का वोट चाहिए। 

आपने और पिताजी जी ने हिंदुओं के लिए जो किया वो किसी से छिपा नहीं है। अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाना भी तो हिंदुत्व की सेवा करना था न और उत्तर प्रदेश में दंगों में आप हमेशा मुस्लिमों के साथ खड़े रहे, गंगा जी में मुस्लिमों द्वारा इफ्तार पार्टी के दौरान गौमांस के टुकड़े और हड्डियां फेंकी गई लेकिन आपने उसकी निंदा करने की बजाय उसका समर्थन कर दिया और बात करते हो हिंदुत्व के लिए सेवा करने की

भगवान राम और भगवान शिव और देवी देवताओं को प्रणाम करके निकलते हो तो फिर आज तक श्री राम मंदिर के दर्शन करने क्यों नहीं गए? आपको रामलला की प्राणप्रतिष्ठा का निमंत्रण मिला लेकिन आप नहीं गए केवल इसलिए क्योंकि मुसलमान वोटर नाराज़ न हो जाए।

स्वामी प्रसाद मौर्य रामचरितमानस, भगवान राम और हिंदुओं के लिए जहर उगलता रहा लेकिन आपने सनातन का कथित सिपाही होने के बाद भी उसे कभी नहीं रोका

राजकुमार भाटी ने ब्राह्मणों को वेश्याओं से भी गया गुजरा कहा और इतने से भी दिल नहीं भरा तो आगे कहा कि गुर्जरों और जाट महिलाओं में एक से ज्यादा पति रखने की प्रथा है। दोनों बयानों के लिए उसने बाद में माफ़ी मांगी लेकिन अखिलेश जी आपने तो चूं तक नहीं की और न राजकुमार भाटी को कुछ कहा

आज आपके एक सिपहसालार जावेद अली ने हिंदुओं को “जहरीला” कहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा की वजह से हिंदू समाज “काफी हद तक जहरीला” हो गया है। हिंदू समाज ने जहर निगलना शुरू कर दिया है। उसने यह भी कहा कि मुलायम सिंह के समय में संभल में आपसी भाईचारा था जबकि 1978 के दंगों के बाद वहां हिंदू घटते चले गए जो आज केवल 20% रह गए और मुसलमान 80% हो गए

जावेद अली रोज रोज जबरन हिंदुओं के इस्लाम में धर्म परिवर्तन के षड़यंत्र सामने आ रहे है और “सर तन से जुदा” के नारे ही नहीं लगते, कर भी दिए जाते हैं। हिंदुओं को भोजन में थूक और पेशाब मिला कर खिलाने के किस्से आम हो गए है। उनसे कौन सा सौहाद्र बढ़ता है। हिंदू समाज को कह रहे हो कि जहर निगल रहा है तो मुस्लिम समाज कौन सा अमृतपान कर रहा है?

क्या अखिलेश यादव हिंदुओं को जहरीला कहने पर जावेद अली से कुछ कहेंगे या खुद उनके बयान के लिए माफ़ी मांगेंगे?

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