यह बड़ा गंभीर प्रश्न है कि आखिर राज्यों के मामले वकील लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट कैसे ले जाते हैं और सुप्रीम कोर्ट उन्हें Admission Stage पर ही खारिज क्यों नहीं करता। दो दिन पहले एक वकील विशाल तिवारी भारत भूषण तिवारी के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट चला गया था जबकि उसे पहले हाई कोर्ट जाना चाहिए था।
सुप्रीम कोर्ट जाना साबित करता है कि जो घोटाला हुआ है इसमें 2027 में योगी को हराने के लिए विपक्ष की भूमिका होने का शक है। सुप्रीम कोर्ट जाने वाले वकील चुनाव तक तारीख पे तारीख लेते रहेंगे, ताकि हिन्दुओं में बीजेपी के खिलाफ भड़काया जा सके।
आज राम मंदिर के चोरी के मामले को लेकर कुछ वकील सीधे सुप्रीम कोर्ट चले गए। उनमें ये वकील शामिल हैं -
-अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव। उन्होंने PIL दायर करके मांग की है कि FIR दर्ज की जाए; CCTV के रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं और समयबढ़ सीमा में सीबीआई के आधीन एक SIT जांच करे;
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-एडवोकेट नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने भी Digital Payment logs, CCTV footage और मंदिर की DVR रिकॉर्डिंग को सुरक्षित करने की मांग की है;
-Advocate-on-record अनूप प्रकाश अवस्थी ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मामले का संज्ञान लेने और अपनी निगरानी में CBI जांच और ट्रस्ट के खातों की Forensic Audit की मांग की है।
इन तीनो की याचिकाओं में कोई विषय ऐसा नहीं है जिस पर भारत का सबसे बड़ा हाई कोर्ट, इलाहबाद हाई कोर्ट निर्णय नहीं ले सकता लेकिन ये सभी लोग सीधे सुप्रीम कोर्ट भागे हैं। जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ ने तुरंत सुनवाई से इंकार कर दिया और कहा कि कोर्ट रजिस्ट्री के द्वारा मामलों को लिस्ट किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट लिस्टिंग बाद भी कह सकता है कि पहले हाई कोर्ट जाओ लेकिन ये आज ही कह देनी चाहिए थी। देश के High Courts को अगर नज़रअंदाज करके किसी भी मामले में सुप्रीम कोर्ट सीधे सुनवाई करता है तो वह अपनी सीमाओं को लांघने का काम करेगा और हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र का अतिक्रमण करेगा।
ये वकील लोग इतने उतावले क्यों थे? उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठित की थी जिसने अपनी अंतरिम रिपोर्ट में FIR दर्ज करने की संस्तुति की है। अब कुछ समय तो दीजिए राज्य सरकार को SIT की Recommendation पर अमल करने के लिए। लेकिन ये वकील तो ऐसा कर रहे हैं जैसे आसमान ही गिर गया हो क्योंकि योगी सरकार ने कुछ किया ही नहीं। क्यों भूल जाते हैं ये लोग, वो योगी है, चोरों की कब्रों में से भी उगाही करवा देगा?
सुप्रीम कोर्ट को दिशा निर्देश तय करने चाहिए कि कौन सा मामला पहले हाई कोर्ट जाएगा और कौन से मामले वह सीधे सुनेगा। केंद्र सरकार का आदेश अगर पूरे देश पर लागू होता है तो उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं; दो या उससे ज्यादा राज्यों का अगर एक ही मामला है तो वह भी सुप्रीम कोर्ट जा सकता है लेकिन जो मामला राज्य सरकार से ही संबंधित है वह पहले हाई कोर्ट ही जाना चाहिए।
मनमर्जी नहीं चलनी चाहिए जैसे चंद्रचूड़ ने कोरोना के विषय में किया था जब हर हाई कोर्ट को सुनवाई करने के लिए कह दिया और दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट में वो 24-24 घंटे में केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांग रहे थे। केंद्र और राज्यों की सरकार कोरोना से निबटे या अदालतों के चक्कर लगाती रहें, इसका ख्याल नहीं आया चंद्रचूड़ को और हर सर्कार को चकरी बना कर रख दिया था लेकिन फिर हुआ क्या, जो सबसे ज्यादा छातियां पीट रहा था ऑक्सीजन के लिए, वह केजरीवाल ही जरूरत से चार गुना ऑक्सीजन लिए बैठा था लेकिन उस पर कुछ नहीं बोले मीलॉर्ड।
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