राहुल गांधी की माफ़ी स्वीकार करना भाजपा की एक और बड़ी गलती

सुभाष चन्द्र

राहुल गांधी ने 2018 की चुनाव रैली में शिवराज सिंह चौहान के पुत्र कार्तिकेय सिंह का नाम लेते हुए आरोप लगाया था कि उनका नाम पनामा पेपर लीक्स में है। बयान में किसी और के नाम का जिक्र नहीं था जैसा अब राहुल ने कहा है कि वो छत्तीसगढ़ के रमन सिंह के पुत्र के बारे में कह रहे थे। उनके पुत्र का नाम अभिषेक सिंह है और दोनों के नाम में कोई समानता नहीं है। 

कार्तिकेय सिंह चौहान ने जब MP/MLA कोर्ट में  मानहानि का केस दर्ज किया तब कोर्ट ने राहुल गांधी को समन जारी किया तो उसके खिलाफ वो हाई कोर्ट चले गए और यह भी अर्जी लगाई कि केस को खारिज कर दिया जाए। 

राहुल जो official offender है की माफ़ी स्वीकार करना बीजेपी ने फिर भयंकर गलती की है। अगर स्थिति विपरीत होती कांग्रेस कभी माफ़ी स्वीकार करती। झूठ परोस कर जनता को गुमराह करना राहुल की आदत बन चुकी है। अगर माफ़ी स्वीकार करनी ही थी तो कोर्ट से अनुरोध करना था कि माफ़ी हर अख़बार और टीवी चैनल पर जाकर सार्वजानिक रूप से मांगनी चाहिए ताकि जनता को इस झूठे LoP की असलियत सामने आती।  

लेखक 
चर्चित YouTuber
 
परसों 24 जून को राहुल गांधी ने हाई कोर्ट में लिखत माफीनामा दाखिल कर दिया जिसे कार्तिकेय ने अपनी लीगल टीम की सलाह पर स्वीकार कर लिया और हाई कोर्ट ने mutual agreement के आधार पर MP/MLA कोर्ट में चल रहा केस बंद कर दिया

कार्तिकेय चौहान ने राहुल गांधी के खिलाफ IPC के section 500 के अंतर्गत मानहानि का आपराधिक केस दर्ज किया था जिसमें 2 वर्ष की साधारण कैद और 5000 रुपए का जुर्माना या दोनों हो सकते थे

राहुल गांधी चीख चीख कर कहता फिरता था कि मै  सच्चाई के लिए कभी माफ़ी नहीं मागूंगा

पहले राफेल मामले से जुड़े चौकीदार चोर है के बयान पर भी सुप्रीम कोर्ट में माफ़ी मांगी थी जब दावा कर दिया था कि सुप्रीम कोर्ट ने भी कह दिया है कि “चौकीदार चोर है” जबकि ऐसा कुछ नहीं कहा था सुप्रीम कोर्ट ने 

सवाल यह पैदा होता है कि जब हर बयान पर बाद में सफाई देनी पड़ती है और कोर्ट में अपना बचाव करना पड़ता है तो ऐसे उल्टे पुल्टे बयान देते ही क्यों हो और देते हो उन पर कायम रहो

 

“सारे मोदी चोर हैं” वाले बयान पर तो ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट ने 2 साल की सजा दे ही दी थी लेकिन कांग्रेस परिवार से आने वाले जस्टिस बीआर गवई ने राहुल गांधी को बचा लिया। तब राहुल गांधी ने माफ़ी नहीं मांगी थी क्योंकि उसे भरोसा था सुप्रीम कोर्ट में वो बच जाएगा

राहुल गांधी के खिलाफ अनेक केस चल रहे हैं लेकिन किसी को ट्रायल कोर्ट लटका कर रखते हैं, किसी को हाई कोर्ट और किसी को सुप्रीम कोर्ट लटका देता है

भाजपा की फिर माफ़ी स्वीकार करके गलती है और पहले भी की है। अरुण जेटली और गडकरी ने केजरीवाल का माफीनामा स्वीकार कर लिया था लेकिन अगर ऐसा न किया होता तो उसकी  राजनीति के गर्त में चली जाती। अब कार्तिकेय ने भी वही गलती की है। माफ़ी स्वीकार करने की बजाय कोर्ट से आग्रह करना चाहिए था राहुल के मानहानिकारक बयान के लिए उपयुक्त सजा मिले क्योंकि ऐसी बयानबाजी करना उसका “धंधा” बन चुका है। अगर केस में सजा होती तो एक बार फिर संसद से बाहर हो जाता। 

कांग्रेस माफीनामा स्वीकार करने का कोई एहसान नहीं मानेगी बल्कि मौका मिलने पर शिवराज चौहान और भाजपा पर वार करेगी जैसे वर्तमान मुख्यमंत्री पर हमला करके कर रही है

राहुल गांधी की किसी भी केस में किसी को माफ़ी स्वीकार नहीं करनी चाहिए और हर केस सजा दिलाने के लिए लड़ना चाहिए। जो व्यक्ति देश का अपमान करता है उसे जितनी जल्दी हो सके कानूनी तरीके से संसद से बाहर करना चाहिए

No comments: