योगी-मोदी विरोधियों ने लगता है राममन्दिर में चढ़ावे की चोरी करवाकर अपने पतन की पटकथा लिख दी है। इन राम विरोधियों शायद को नहीं मालूम कि एक योगी है तो दूसरा तपस्वी। इनके विरुद्ध रची हर साज़िश/षड़यंत्र का भंडाभोड़ हुआ है फिर भी कालनेमि हिन्दुओं को इन्हें वोट देने में जरा गैरत नहीं आती। पुरुषोत्तम श्रीराम का भव्य मन्दिर अनगिनत कष्ट झेलने के बाद निर्मित हुआ है। पुरुषोत्तम ने कभी अपने अंधभक्तों का साथ नहीं छोड़ा सच्चाई सामने लाने के लिए सभी का मार्गदर्शन करते रहे। और अब जो चोरी से योगी सरकार या बीजेपी को बदनाम करने का जो घिनौना काम किया है श्रीराम इन चोरों और इनके आकाओं को इनकी असली जगह पहुंचाएंगे। प्रभु धैर्य और संयम रखने की शिक्षा देते हैं जिसका उन्होंने स्वयं पालन भी किया था। ये चोरी ऐसे ही नहीं हुई है बहुत गहरा षड़यंत्र है। जिसको सामने आने में समय लगेगा।
राम मंदिर से चोरी प्रकरण में स्वरूपानंद सरस्वती के बनाए हुए रामालय ट्रस्ट से सोने और धन का मामला भी उजागर हुआ है। अगर संजय सिंह के 2020 के जमीन सौदों की गड़बड़ के आरोप की जांच SIT कर सकती है तो रामालय ट्रस्ट के धन और सोना कहां गया इसकी भी जांच कर सकती है और उसमें सपाचार्य अविमुक्तेश्वरानंद भी नप सकता है।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
वर्ष 2020 में सरकार द्वारा गठित ट्रस्ट की स्थापना के बाद रामालय ट्रस्ट द्वारा “स्वर्ण संग्रह सपर्या” अभियान चलाया गया जिससे 1008 किलो सोना गांवो से इकट्ठा करना था। मकसद था अस्थाई “बाल मंदिर और स्वर्ण मंदिर” बनाना। लेकिन वो तो बना नहीं, तो फिर इसकी ट्रस्ट का धन कहां गया?
गोविंदानंद ने रामालय ट्रस्ट के द्वारा एकत्र किए गए पैसे, सोने और हीरों के गबन की जांच SIT से कराने की मांग की है जबकि अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को सिरे से नकार दिया और कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी महाराज की जिम्मेदारी है कि मंदिर को दिए गए दान का ब्यौरा दें। मंदिर को मिले दान में गड़बड़ की तो जांच हो रही है और उसका हिसाब भी गोविंदगिरि दे रहे है। लेकिन तुमने पैसा कहां गायब किया, इसका जवाब तो तुम्हें ही देना पड़ेगा।
अविमुक्तेश्वरानंद कुछ ज्यादा ही श्याणे हैं। गोविंदानंद बात कर रहे हैं रामालय ट्रस्ट की ये खलीफा बात कर रहे हैं मंदिर को मिले दान की। गोविंदगिरि गिरी तो तब जवाबदेह थे जब अविमुक्तेश्वरानंद की रामालय ट्रस्ट ने एकत्र किया हुआ पैसा, सोना और हीरे मंदिर के ट्रस्ट के सुपुर्द किये होते।
अब समझ आया ये अविमुक्तेश्वरानंद मोदी और योगी पर कुकुर के तरह क्यों भौंकता फिरता है?
इसे लगता है आभास हो गया था कि योगी को इसके गड़बड़झाले की खबर लग गई थी और क्यों इसकी निकटता अखिलेश यादव से बढ़ रही है? ऐसा भी कह सकते हैं अपनी ट्रस्ट का पैसा ये अखिलेश की पार्टी को अगले चुनाव के लिए दे रहा है।
कुल मिलाकर लगता है, ये भी लपेटे में आएगा। जो होता है सब समय से होता है। ये चारों खाने चित हो जाएगा।

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