राम मंदिर से कथित चोरी पर वो छातियां पीट रहे हैं जो कहते थे मंदिर नहीं बनने देंगे; दक्षिण भारत के मंदिरों से तो सरकार लूटती हैं पैसा; उन मंदिरों से चोरी हुए सोने की बात नहीं करते सेकुलर नेता

सुभाषचन्द्र

आज रामविरोधियों का एकजुट होकर चील-कौओं की तरह इसलिए चिल्ला रहे हैं क्योकि कांड बीजेपी शासित उत्तर प्रदेश में हुआ है। लेकिन गैर-शासित राज्यों और यूपीए कार्यकाल में मन्दिरों से चोरी हुए सोने पर सब ऐसे चुप रहते हैं जैसे उनके घर कोई मातम हो गया है। कल(30 जून) को Republic Bharat पर एंकर राम मोहन शर्मा ने अपने शो महाभारत में दिल्ली की जामा मस्जिद और अजमेर में चिश्ती की मजार पर सवाल करने पर मुस्लिम कट्टरपंथी शो के आखिर तक टालते रहे। सवाल था: यहाँ आने वाला चढ़ावा कहां जा रहा है?        

किसी की नानी कहती थी कि मस्जिद तोड़ कर जो मंदिर बनाया गया उसमे जाना पाप है और आज वह गिरा हुआ आदमी उसी मंदिर में माथा रगड़ रहा है और अमृतसर में सीता माता और लव-कुश मंदिर बनाने का झांसा दे रहा है। जबकि जब तक मंदिर बनना शुरू होगा, तब तक मान सरकार का अंतिम संस्कार हो चुका होगा

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जो अखिलेश छाती ठोक कर कहता था कि “किसी हाल में राम मंदिर नहीं बनने देंगे” वो आज सबसे ज्यादा बवाल काट रहा है लेकिन रामालय ट्रस्ट के गबन की बात नहीं करता। जो राहुल गांधी भगवान राम को काल्पनिक कहता था, कांग्रेस ने वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दी सुप्रीम कोर्ट में मंदिर निर्माण  रोकने के लिए और उसके वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में मंदिर की सुनवाई रोकने की दलील दी, उस राहुल की पार्टी आज दहाड़ें मार रही है

मंदिर में कथित चोरी का आरोप सबसे पहले Mahipal Singh (a former supervisor of the temple trust's accounting team) ने लगाया लेकिन उसने यह नहीं बताया कि कितना पैसा चोरी हुआ? फिर अखिलेश ने किस आधार पर कह दिया कि 7 करोड़ की चोरी हुई? क्या महिपाल सिंह ने उसे गुप्त सूचना दी अगर नहीं तो अखिलेश को बताना चाहिए उसे रकम के बारे में कैसे पता चला?

जो वकील आज सुप्रीम कोर्ट गए है राम मंदिर की चोरी के मामले को लेकर, वो बताएं कि क्या वे सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई में मंदिर के पक्ष में खड़े थे या विरोध में?

दूसरी तरफ SIT ने मंदिर ट्रस्ट में CEO नियुक्त करने की सलाह देकर मंदिर प्रशासन को कार्यपालिका के सुपुर्द करने का अभियान चला दिया? दक्षिण भारत के मंदिरों में ऐसे ही राज्य सरकार Administrator (CEO जैसे) नियुक्त करके रखती है और उनके जरिए मंदिरों से जब मर्जी जितना मर्जी धन निकाल कर अपनी योजनाओं, मस्जिदों और चर्चों के लिए इस्तेमाल करती है। ये मंदिरों से चोरी नहीं बल्कि सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग से “वैध डकैती” है जिसके बारे में आज सेक्युलर नेता खामोश हैं

दक्षिण भारत में केरल के पद्मनाभ मंदिर से 2016 में 776 किलो सोना गायब हुआ। मुख्यमंत्री थे पिनराई विजयन। यह CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा लेकिन उसे गलत करार दे दिया गया। वर्ष 2026 में भी मंदिर परिसर में भारी सुरक्षा चूक और लगभग 78 ग्राम सोने के बिस्कुट/सिक्के और कुछ कीमती पुरावशेष (एंटीक) गायब होने के नए मामले सामने आए, जिसकी जांच चल रही है। मुख्यमंत्री थे विजयन;

र्ष 2016 में ही तमिलनाडु के कांचीपुरम के एकंबरनाथ मंदिर से 5.75 किलो सोना चोरी हुआ सरकार थी AIADMK की; तमिलनाडु सरकार की endowment trust के कमिश्नर M Veera shanmuga Moni और एक विदेशी पुजारी को गिरफ्तार किया गया लेकिन हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगा दी क्यों? अभी chargesheet को रद्द करने के केस चल रहे हैं जैसे कोई चोरी हुई ही न हो

वर्ष 2019 में सबरीमाला मंदिर 2019 -4.5 किलो सोना गायब हुआ। मुख्यमंत्री विजयन;

वर्ष 2022 में तमिलनाडु के विरुथागिरीश्वर (शिव मंदिर) मंदिर से 900 किलो के कलश चोरी हुए लेकिन 49 साल के पी संतोष को गिरफ्तार किया गया और उससे वो कलश बरामद हो गए  

इन मंदिरों में चोरी के मामले बताने का मेरा अभिप्राय यह है कि चोरी CEO/Administrator नियुक्त करने के बाद भी हो सकती है और कल को कोई उत्तर प्रदेश में “सेक्युलर सरकार” आ गई तो वह तो राम मंदिर के धन को लूट खाएगी जैसे लूट दक्षिण भारत के मंदिरों में होती है। अभी जो राम मंदिर ट्रस्ट है वो चाहे तो संगठन में बदलाव करे लेकिन उसमें CEO बिठाना ठीक नहीं है 

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