ईरान युद्ध चलता रहेगा; समझौता होना दूर की कौड़ी है

सुभाष चन्द्र 

चार दिन पहले ट्रंप ने नेतन्याहू को ईरान और लेबनान पर हमले न करने की सलाह दे रहे थे और उन्हें पागल तक कह दिया अगर सर्वे हो जाए कि पागल ट्रंप है या नेतन्याहू तो ट्रंप भारी बहुमत से जीत जाएंगे ट्रंप ने नेतन्याहू को यहाँ तक कह दिया कि मैं तुम्हे न बचाता तो तुम जेल में होते 

किसका पक्ष ले रहे थे ट्रंप, हिजबुल्लाह का जो ईरान का पालतू आतंकी संगठन है और ईरान का जो इज़रायल को ख़त्म कर देना चाहता है। 

लेखक 
चर्चित YouTuber 
लेकिन ईरान ने जब अपाचे गिरा दिया तो ट्रंप ने ईरान पर दनादन हमले कर दिए यानी इज़रायल को फालतू नसीहत दे रहे थे ईरान और हिज्बुल्ला इज़रायल पर हमले करेंगे तो क्या वो चुप बैठा रहेगा? ट्रंप के हमले के बाद ईरान ने तुरंत कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी अड्डों पर हमला कर दिया

हमारे मीडिया में बैठे मिलिट्री के बड़े बड़े रिटायर्ड अधिकारी कहते हैं कि ईरान बड़ी बहादुरी से लड़ा है जबकि ईरान की लड़ाई सीधे अमेरिका से तो हुई ही नहीं और न हो सकती क्योंकि उसकी कोई मिसाइल अमेरिका नहीं पहुँच सकती

वो बस आस पास के middle east के देशों में अमेरिकी Air Bases पर हमले कर रहा है 


ईरान ने सभी सुन्नी मुस्लिम देशों पर हमले किए

Bahrain, Kuwait, Qatar and the United Arab Emirates, Jordan, Oman किसी को नहीं छोड़ा और उनकी oil refineries पर भी हमले किए 

ईरान की भी Oil refineries पर कुछ जगह हमले किये अमेरिका और इज़रायल ने लेकिन Oil ही ईरान की backbone है ईरान को ठंडा करने के लिए उसकी Refineries को हमलों से बंद करना होगा ट्रंप ईरान के तेल का लालच छोड़ दे उसके पास तेल की कमी नहीं है और वेनेजुएला उसके कब्जे में है जो विश्व का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है वेनेजुएला से तेल भारत आने दो और भारत से refined oil लेते रहो

ईरान इतनी बहादुरी से लड़ा है कि अपने ही देश के 45 हजार लोग मार दिए क्योंकि वो खामनेई के खिलाफ बगावत कर रहे थे

इतनी बहादुरी से लड़ा है कि अमेरिका से बातचीत से पहले अपने नुकसान की भरपाई के लिए 24 बिलियन डॉलर मांग रहा है उसके नुकसान का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है लेकिन हमारा मीडिया उसके नुकसान की बात ही नहीं करता

ट्रंप अपने आप ही बयान देते रहते हैं जैसे आज कहा है कि ईरान न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न खरीदेगा लेकिन यह बात ईरान नहीं कहता नहीं खरीदेगा और न ही बनाएगा तो पाकिस्तान तो उसे या हिजबुल्लाह को उपहार में दे सकता है

और ईरान के पास परमाणु हथियार का मतलब है सबसे पहले इज़रायल का खात्मा यह ट्रंप और नेतन्याहू की सही सोच है कि ईरान के पास परमाणु हथियार दुनिया के लिए खतरा होंगे

मीडिया में कोई ईरान की होर्मुज को बंद करने के लिए निंदा नहीं करता लेकिन अमेरिका की नाकेबंदी को जरूर निशाने पर ले लेते हैं

अब सवाल उठता है कि क्या ईरान से कोई समझौता हो भी सकता है?

मुझे नहीं लगता ऐसा हो सकता है मुजताबा खामनेई ने हज के दौरान दुनिया भर के मुसलमानों का आह्वान किया कि हज में अमेरिका और इजरायल की मौत की कामना करें (Death to America and death to इज़रायल)

ये कॉल देख कर नहीं लगता कभी ईरान के साथ Permanent Peace Agreement हो सकता है और युद्ध भी रुक रुक कर चलता रहेगा युद्ध एक स्थिति में ख़त्म होगा मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूँ लेकिन इतना कह सकता हूँ कि क्योंकि ईरान सीधा अमेरिका से युद्ध नहीं कर सकता, इसलिए एक दिन वह अमेरिका पर 9/11 से भी बड़ा आतंकी हमला करेगा और तब वह अपने अंत को निमंत्रण देगा अमेरिका तब उसे जहन्नुम बना देगा और तब ही युद्ध बंद होगा

No comments: