जो राम मंदिर बनने नहीं देना चाहते थे और जो कभी मंदिर गए नहीं, वो आज कथित चोरी पर छातियां पीट रहे हैं और अयोध्या दौड़ रहे हैं

सुभाष चन्द्र

आज भारत में चोर शोर मचाकर जनता को गुमराह कर रहे हैं, लेकिन भूल रहे हैं कि विधि ने हर नियति का समय निश्चित किया हुआ। हर पाप-पुण्य का हिसाब होकर रहता है। मन्दिर में चढ़ावे में चोरी करने वालों को प्रभु राम छोड़ने वाले नहीं। शंका व्यक्त की जा रही है कि प्रभु राम की आस्था पर चोट पहुँचाने राम विरोधियों ने ही चोरों से साथ मिलकर घिनौना काम किया हो। सर्वविदित है कि हिन्दू मन्दिरों को विवादित बनाने में कांग्रेस का सबसे बड़ा योगदान है। इस चोरी कांड में भी राम विरोधियों की मिलीभगत सामने आएगी। प्रभु राम की महिमा देखो जितनी भी राम विरोधी पार्टियां है सभी धीरे-धीरे पाताल लोक में जा रही है। यही हालत मुस्लिम कट्टरपंथियों की भी होनी शुरू हो चुकी है। 

इतना ही नहीं क्या किसी ने मस्जिदों, दरगाहों और चर्चों में हो रहे घोटालों/घपलों के खिलाफ किसी को बोलते देखा। किसी ने इनके खिलाफ बोलने के लिए माँ का दूध ही नहीं पिया।       

वर्ष 2020 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने PM CARES Fund (Prime Minister's Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund)  March 28, 2020 को Covid से ग्रसित लोगों की सहायता के लिए बनाया था। उस फंड में सबसे पहले 1500 करोड़ की राशि दान करने वाले रतन टाटा थे

लेकिन जिन लोगों ने फंड में एक देहला नहीं दिया, सबसे ज्यादा हाय तौबा उन्हीं ने मचाया अनेक अदालतों और सुप्रीम कोर्ट तक में फंड को चुनौती दी ऐसे मक्कारों ने मजे की बात ये थी कि फंड की स्थापना होते ही उसके ऑडिट की मांग कर रहे थे यानी फंड में पैसा नहीं देंगे मगर लाखों रुपया अदालतों में लगा देंगे फंड को रोकने के लिए क्योंकि वह मोदी ने बनाया था उनका मकसद था लोग Covid से मर जाएं लेकिन मोदी से मदद न मिले जिससे मोदी बदनाम हो जाए

लेखक 
चर्चित YouTuber 
राम मंदिर का मुकदमा वर्षों सुप्रीम कोर्ट में चलता रहा और कांग्रेस, समाजवादी पार्टी समेत सभी विपक्षी दल मंदिर बनाए जाने के विरोध में थे राहुल गांधी ने तो मंदिर बनने के बाद यहां तक कह दिया था कि अगर हमारी सरकार होती तो हम सुप्रीम कोर्ट का निर्णय पलट देते कोई वहां अस्पताल बनाने को कहता था और कोई टॉयलेट तक बनाने की मांग कर रहा था केवल इसलिए क्योंकि वो भगवान राम का जन्मस्थान है

भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा के लिए विपक्ष के सभी नेताओं को निमंत्रण भेजा गया लेकिन मुस्लिम वोटों के खोने के भय से कोई नहीं गया। इतना ही नहीं, मंदिर बनने के बाद भी आज तक विपक्ष का कोई नेता रामलला के दर्शन के लिए नहीं गया 

आज मंदिर में कथित चोरी को लेकर सभी नेता छातियां पीट रहे हैं जबकि SIT की जांच चल रही है और रिपोर्ट अभी आनी बाकी है लेकिन ये नेता बस तड़प रहे हैं जैसे चोरी भाजपा ने ही करा दी, हिंदू बस भाजपा से दूर होकर उनके जाल में फंस जाएगा और उत्तर प्रदेश चुनाव में योगी हार जाएगा

आज खबर थी केजरीवाल राम मंदिर जाएगा, राहुल गांधी और अखिलेश यादव भी जाएंगे अब पता नहीं दर्शन के लिए जाएंगे या राजनीति करने जाएंगे लेकिन इतना याद रहे अगर दर्शन किए तो रामलला बिना कुछ कहे पूछेंगे जरूर कि मेरे मंदिर बनाने में रोड़े अटकाए थे, अब यहां क्यों आए हो?

राम मंदिर के दानपात्र से धन का कथित गबन करने वालों से ऐसा अपराध किया है जिसका दंड कानून तो देगा साथ में भगवान की लाठी भी पड़ेगी जिसने भी राममंदिर निर्माण में काटें बोए, उन सभी का हाल देख सकते हैं लालू प्रसाद ने सबसे पहले प्रहार किया था आडवाणी को गिरफ्तार करके लेकिन कालचक्र ऐसा पूरा हुआ कि खुद भी मिट्टी हो गया और पार्टी भी ख़ाक हो गई, समाजवादी अखिलेश सत्ता से दूर हुआ और अब सत्ता के लिए तड़प रहा है राहुल गांधी की पार्टी ने भगवान राम को काल्पनिक कहा, नतीजा ऐसा मिला कि तबियत साफ़ हो गई उधर स्टालिन, शरद पवार, उद्धव, ममता सबकी दुर्दशा चोरी करने वाले देख सकते हैं 

उससे भी बुरी दशा होगी ऐसे चोरों की राम की लाठी ऐसी पड़ेगी जिसकी आवाज़ सुनाई नहीं देगी अभी पता नहीं कौन कौन दोषी है लेकिन सुना है कुछ मंदिर के अंदर वालों के अलावा बैंक और उसके कर्मचारी भी इस चोरी में शामिल हैं। सबका हिसाब होगा 

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