आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर की वाणी; हिंदुओं को प्रवचन दे दिए, लेकिन चर्च, मस्जिदों और दरगाहों की अंधी कमाई के बारे में बोलने की हिम्मत दिखाओ

सुभाष चन्द्र

आर्ट ऑफ़ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने कहा है कि -

“मंदिरों में जो हजारों टन सोना पड़ा हुआ है आखिर वो कब काम आएगा, इस मुश्किल घड़ी में सरकार को सोचना चाहिए, राजधर्म कहता है कि हमारे देश के लोगों को कोई परेशानी नहीं आनी चाहिए” 

मेरी बातों का मतलब यह कतई नहीं है कि मैं श्री श्री रविशंकर का किसी तरह अपमान करना चाहता हूँ लेकिन उनकी बातों में दोहरापन दिखाई देता है। उन्होंने कभी इस विषय को नहीं उठाया कि दक्षिण भारत की राज्य सरकार मंदिरों का धन निकाल कर मस्जिदों और चर्चों पर खर्च करती हैं जबकि उनके पास धन की कोई कमी नहीं होती

श्री श्री रविशंकर जी चर्चों को छोड़िए, जहाँ धन का अम्बार है लेकिन दिल्ली की जामा मस्जिद, निजामुद्दीन दरगाह और अजमेर की दरगाह की रोज की कितनी कमाई है कभी उसके बारे में भी कुछ बोलिए। ये कमाई किसकी जेब में जा रही है? वक़्फ़ बोर्ड भी बोलने की हिम्मत नहीं करता। ये तो सिर्फ तीन बताए है। जिसको देखों हिन्दुओं को ही प्रवचन देकर अपने आपको पता नहीं क्या समझने लगता है। तनिक भी शर्म नहीं आती।   

लेखक 
चर्चित YouTuber 
आर्ट ऑफ़ लिविंग अपनी संपत्ति का ब्यौरा कभी घोषित नहीं करता लेकिन एक कथित एक विशाल वैश्विक मानवीय एवं शैक्षिक गैर-लाभकारी (Non-Profit) संस्था होने के कारण इसकी परिसंपत्तियाँ (Assets) और आय (Revenue) विभिन्न क्षेत्रीय इकाइयों में विभाजित हैं और  सामान्यतः संगठन के वैश्विक नेटवर्क और परिसंपत्तियों का मूल्यांकन सैकड़ों मिलियन डॉलर के स्तर पर किया जाता है भारत और विश्व में इसका आंकलन 200 से 1000 करोड़ के बीच लगाया गया है

अमेरिका स्थित आर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन द्वारा प्रस्तुत क्षेत्रीय वित्तीय विवरणों (जैसे IRS को प्रस्तुत अभिलेखों) के अनुसार, उसकी वार्षिक आय लगभग 1.2 करोड़ डॉलर से 2.3 करोड़ डॉलर के बीच तथा कुल परिसंपत्तियां लगभग 3.2 करोड़ डॉलर बताई गई हैं 

विभिन्न क्षेत्रीय संपत्ति एवं आध्यात्मिक नेताओं से संबंधित Publications में श्री श्री रविशंकर की  लगभग 1,500 करोड़ रूपए की अनुमानित व्यक्तिगत संपत्ति के साथ उल्लेख किया जाता है

मैं यह नहीं कहता कि आर्ट ऑफ़ लिविंग मानवीय सेवा परियोजनाओं, संघर्ष-समाधान(Conflict Resolution) तथा ग्रामीण विकास कार्यक्रमों में निवेश नहीं करता लेकिन यह भी सत्य है कि इसके अधिकांश आयोजनों में अमीर लोगों की संगत दिखाई देती है

इतनी अपार संपत्ति में से कुछ देश के लिए भी दान कर दीजिए अगर आपको मोदी जी की अपील में जरा सा भी दम दिखाई देता है और आप देश पर संकट मानते हैं

श्री श्री रविशंकर ने मुस्लिमों से नहीं कहा कि जब आप ईरान के लिए 600 करोड़ रुपया और गहने दान कर सकते हो तो देश के लिए भी कुछ करो  

श्री श्री रविशंकर 2007 से 2014 तक कई बार इराक गए जहां शिया सुन्नी मुस्लिम लीडरों से मिले उन्होंने वहां जोर देकर कहा कि शिया और सुन्नी इस्लाम की दो आँखे हैं और दोनों को एक हो जाना चाहिए ऐसी बात वे कई बार बोल चुके हैं दिल्ली के India Dialogue में उन्होंने कहा कि शिया सुन्नी एक हो जाएं जिससे उन पर Extremist होने का लगा दाग मिट सके

यह सोच है श्री श्री रविशंकर की जिसके लिए Shia-Sunni Unity Movement उन्हें उनके Global Peace Mission के लिए बधाई देता रहा है बेहतर होगा ईरान अमेरिका/इज़रायल की संधि कराने ही चले जाएं और नहीं तो कम से कम ईरान से कहें कि अपने सुन्नी भाइयों के देशों पर हमले मत करो

श्री श्री रविशंकर भूल गए कि वक्फ बोर्ड के पास देश भर में 9.4 लाख एकड़ भूमि है

Archbishop KP Yohannan(founder of the Believers Eastern Church in Kerala) भारत का wealthiest evangelist है जिसकी संपत्ति 175 मिलियन डॉलर है

इंडियन कैथोलिक चर्च के पास 17 करोड़ एकड़ भूमि है और गैर-कृषि संपत्ति 20,000 करोड़ से 100,000 करोड़ रुपए के बीच है

मुंबई के लोकल Roman Catholic Archdiocese अकेले की प्रॉपर्टी और real assets की कीमत 1.5 बिलियन डॉलर है

श्री श्री रविशंकर ने केवल हिंदू मंदिरों के सोने पर नज़र रखी लेकिन मुस्लिमों और ईसाइयों को अपार संपत्ति में से कुछ भी  देने के लिए नहीं कहा ये कैसा दोहरा मापदंड है?

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