भारत एक ऐसा अनूठा देश है जहां दो कानून चलते हैं। विधायिका के अलग और जजों के अलग। नेताओं के लिए अलग और आम नागरिक के लिए अलग। नमूना देखिए और खुद फैसला करिए:
मई 2 को सुप्रीम कोर्ट के 5 जजों को नियुक्त किया गया है चीफ जस्टिस द्वारा शपथ दिला कर। उनके नाम है।
नियुक्त हुए जजों के नाम हैं -
-पंजाब & हरियाणा हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस शील नागू;
-बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस श्री चंद्रशेखर;
-मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और
-J & K एवं लद्दाख हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अरुण पल्ली -
इनके अलावा सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील वी मोहना को भी नियुक्त किया गया है। कल तक सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाली आज उसी कोर्ट में मीलॉर्ड हो गई।
बड़ी अच्छी बात है लेकिन एक विडम्बना ये है कि कोई भी चीफ जस्टिस आ जाए वो नियुक्त होने वाले जजों को नियुक्ति से पहले अपनी Assets & Liability Return जमा करने को नहीं कहता।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने, कहते हैं कुछ नए कदम उठाए हैं, लेकिन एक यह कदम भी उठा लिए होते तो अच्छा होता। कहीं तो, कभी तो ये प्रथा भी शुरू कीजिए।
आज सुप्रीम कोर्ट में 37 जज हो गए हैं, इन नए नियुक्त हुए 5 जजों के अलावा भी जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस एन कोटेश्वर सिंह ने अभी तक अपनी Assets & Liability Return जमा नहीं की है (website पर upload नहीं की है) जबकि 30 जजों ने ऐसा किया है - शुरू में जब जजों द्वारा Assets & Liability Return जमा करने का निर्णय लिया गया था, तब भी केवल 21 जजों ने ऐसा किया था, बाकी ने बाद में किया है।
Assets & Liability Return सरकार के हर अधिकारी को जमा करना अनिवार्य होता है जिसमें से 20% की या कुछ विशेष की scrutiny भी की जाती है जिससे उसकी आय और संपत्ति का संतुलन समझा जा सके। इससे भ्रष्टाचार भी उजागर होता है। जब विसंगतियां बड़े पैमाने पर पाई जाती हैं तो उनकी गहन जांच भी होती है।
जस्टिस नागरत्ना ने कुछ दिन पहले नोटबंदी की और जजों के आय से अधिक खर्चों को भ्रष्टाचार से जोड़ कर यह कहते हुए निंदा की थी की ऐसे लोग (जज) भ्रष्ट तरीके अपनाते है। उन्होंने कहा था नोटबंदी कालेधन को बाहर लाने का दिखावा था और कोई काला धन नहीं निकला।
ऐसे “प्रवचन” देना बहुत आसान होता है लेकिन अपने ऊपर अमल भी करना चाहिए। जैसे जस्टिस नागरत्ना पब्लिक में प्रवचन देती हैं, वो Publicly ही बताएं कि उन्होंने Assets & Liability Return क्यों नहीं की। उनका ये विवरणी जमा न करना ही बताता है कि नोटबंदी उन्हें क्यों पसंद नहीं थी। ऐसा ही जस्टिस कोटेश्वर सिंह को भी बताना चाहिए।
चीफ जस्टिस से अनुरोध है कि कल शपथ ग्रहण किए सभी जजों से Assets & Liability Return जमा करने को कहें और भविष्य के लिए यह नियम बना दें कि शपथ लेने से पहले Assets & Liability Return जमा करना अनिवार्य होगा अन्यथा नियुक्ति नहीं की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट का आदेश तो अपने आप में ही कानून बन जाता है तो फिर एक कानून ऐसा भी बनाने की कोशिश कीजिए।
नवनियुक्त जस्टिस वी मोहना को देख कर याद आया कि जस्टिस के वी विश्वनाथन भी वकील थे और उनकी संपत्ति 120 करोड़ उन्होंने घोषित की थी। बस मोहना जी की संपत्ति का भी खुलासे से अंदाजा लग जायेगा सिबल जैसे वकीलों के पास कितना माल है? वैसे तो विश्वनाथन जी की संपत्ति से अंदाजा लग चुका है क्योंकि सिंघवी ने हाल ही में 2800 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी।

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