विधि का विधान है कि जिस घर में बुजुर्गों का अपमान होता हो, उस परिवार की दुर्दशा कोई नहीं रोक सकता। शिवसेना को अपने खून से सींचने वाले हिन्दुत्व सम्राट कहे जाने वाले बालासाहेब ठाकरे कहते थे कि मर जाऊंगा पार्टी को ख़त्म कर दूंगा लेकिन कांग्रेस से कोई समझौता नहीं करूँगा। लेकिन उनके दुर्योधन पुत्र ने कुर्सी के लालच में कांग्रेस के आगे घुटने टेक बालासाहेब की पार्टी की अर्थी निकाल दी। जो महाराष्ट्र में शिवसेना का दबदबा था इस दुर्योधन ने सब ख़त्म कर दिया। राज ठाकरे का भी सबकुछ ख़त्म। ये सब विनाशकारी संतान के होने के कारण। बुजुर्गों का अपमान करने वाली ऐसी संतान किसी को नहीं मिले।
सही में कभी कभी लगता है संजय राउत उद्धव की पार्टी में शकुनि का ही काम कर रहा है। धृतराष्ट्र पुत्र मोह में फंसे थे और पुत्र के पीछे लगा था शकुनि और इसलिए वो शकुनि से कुछ नहीं कह सकते थे। उधर उद्धव ठाकरे भी बिल्कुल धृतराष्ट्र बनकर संजय के हाथों पार्टी का क्षय देख रहे हैं लेकिन वे संजय को क्यों नहीं रोक सकते, इसका कारण समझ से परे है।
जून 17 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सामने संजय की दो भद्दी गालियां साफ़ सुनी जा सकती थी। एक शब्द बोला था BSDK और दूसरा G&U गिरी। कल भी यह गाली फिर दी है और अलग होने वाले सांसदों को G&U कहा कई कई बार कहा। ऐसा व्यक्ति क्या पब्लिक लाइफ में रहने लायक है?
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| लेखक चर्चित YouTuber |
वैसे गाली बकने का तो संजय राउत का पुराना रिकॉर्ड है। जब शिंदे के 40 लोग अलग हुए थे तब उसने धमकी दी थी कि गुवाहाटी से 40 लाशें मुंबई आएंगी। कंगना रनौत को “हरामखोर” कहा था और कल शिंदे सेना में शामिल होने वाले सांसदों को संजय राउत ने धमकी दी है कि उनका घर में रहना मुश्किल हो जायेगा। इसका मतलब साफ़ है कि वह उनकी हत्या तक करा सकता है। इसलिए सरकार ने उन सभी 6 सांसदों को Y प्लस सिक्योरिटी दे दी है।
इतना ही नहीं एक और बयान में संजय राउत ने कहा है कितने ही मुग़ल आए लेकिन मोदी सबसे बड़ा “औरंगजेब” बनकर आया है। कमोवेश कांग्रेस की “गाली ब्रिगेड” की ही भाषा बोल रहा है बल्कि उनसे भी दो कदम आगे।
संजय राउत ने कहा है कि इंडी गठबंधन में शामिल छोटी छोटी पार्टियों को कांग्रेस में शामिल हो जाना चाहिए (Merge कर जाना चाहिए)। यानी उद्धव की शिवसेना का अंतिम संस्कार करने का लक्ष्य पूरा हो जायेगा।
उधर शरद पवार के 8 सांसदों में भी कुछ गड़बड़ नज़र आ रही है। वो भी पार्टी छोड़ कर भाजपा में शामिल होने की फ़िराक़ में हैं। शरद पवार ने भी अपने सांसदों की मीटिंग बुलाई है। सुप्रिया सुले मोदी के खिलाफ कभी कुछ नहीं बोलती क्योंकि उसे भरोसा है मंत्री बनने का।
अब देखो उत्तर प्रदेश में जहां मंत्री ओपी राजभर ने दावा किया कि अखिलेश के चाचा रामगोपाल यादव ने अमित शाह को पत्र लिखा है कि कुछ समाजवादी पार्टी छोड़ भाजपा के साथ आना चाहते हैं। उपमुख़्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दावा किया है कि 25-26 समाजवादी सांसद पार्टी छोड़ना चाहते हैं और ये लोग 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपने आप ही पार्टी छोड़ देंगे।
राजभर के दावे पर रामगोपाल यादव ने खंडन करते हुए कहा ये सब बकवास है, उन्होंने कोई पत्र नहीं लिखा। लेकिन अमित शाह और उनके कार्यालय में से किसी ने भी अभी तक पत्र मिलने या न मिलने के बारे कुछ नहीं कहा। बस यही इंगित करता है कि दाल में कुछ काला जरूर है।
ममता बनर्जी की हार के बाद उसकी खुद की पार्टी और बाकी दलों के नेताओं को साफ़ दिखाई देने लगा है कि मोदी के साथ चलकर ही उनका कुछ कल्याण हो सकता है। लेकिन मैं फिर कहता हूँ कि ऐसे लोगों को भाजपा में शामिल करना चाहिए क्योंकि अगर अलग रहे तो फिर अपनी अपनी ढपली बजाएंगे और किसी मुद्दे पर सरकार का साथ देंगे और किसी पर विरोध करेंगे। अगर पार्टी में शामिल हो गए तो फिर बाहर निकलने का मार्ग बंद हो जाएगा और भाजपा सरकार के हर विधेयक का संसद में समर्थन करना पड़ेगा।

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