ममता बनर्जी का काफिला लुट गया गुबार देखती रही; बीजेपी किसी भी TMC सदस्य को स्वीकार नहीं करे

सुभाष चन्द्र

मुख्यमंत्री रहते जो ममता बनर्जी प्रधानमंत्री हो, महामहिम हो या फिर राज्यपाल किसी को कुछ नहीं समझती थी। बंगाल में ममता की हिटलरशाही चलती थी, लेकिन कालचक्र ऐसा घुमा चुनाव में चारों खाने चित होते ही तृणमूल कांग्रेस ही टूटने के कगार पर पहुँच गयी। खूब सनातन को अपमानित करने के साथ-साथ हिन्दुओं पर जानलेवा हमले और महिलाओं के बलात्कार पर चुप्पी साध लेने वाली ममता को बेचारी भी नहीं बोल रहा। संसद जाने के लिए युसूफ खान को सीट छोड़ने के लिए बोला उसने मना कर दिया यानि अब पार्टी में ही ममता की कोई नहीं सुन रहा। जिस तरह कांग्रेस में परिवार के चापलूस बचे हैं वही हालत तृणमूल कांग्रेस की है। इतना ही नहीं INDI गठबंधन को कमजोर करने में ममता ही का हाथ है। अगर नीतीश कुमार को गठबंधन का convener बनने देती शायद गठबंधन बीजेपी को टक्कर देने लायक होता लेकिन तानाशाह बनी ममता ने ऐसा नहीं होने दिया। लेकिन आज INDI गठबंधन के आगे माथा टेकने को मजबूर है। अब शायद वामपंथी अकेली और असहाय ममता को किसी उच्च पद पर आने से रोक सकता है।  

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जून 5 को ममता बनर्जी की सांसदों और विधायकों की बुलाई गई बैठक में मात्र 6 सांसद और 8 विधायक पहुंचे जबकि 58 विधायकों ने अलग पार्टी बना ली और उनका नेता ऋतब्रत बनर्जी विपक्ष का नेता बन गया

ममता बनर्जी की TMC के 13 सांसद राज्यसभा में हैं और 28 लोकसभा में हैं

जो 6 सांसद पहुंचे बैठक उनमें से 4 लोकसभा के 2 राज्यसभा के थे जिनके नाम है -

-अभिषेक बनर्जी (लोकसभा)

-सुदीप बंदोपाध्याय (लोकसभा)

-कल्याण बनर्जी (लोकसभा) और 

-माला रॉय (लोकसभा)

-डेरेक ओ ब्रायन  (राज्यसभा) और 

-डोला सेन  (राज्यसभा)

मजे की बात है सबसे बड़े बड़बोले और मोदी विरोध में अंधे हो रखे शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आज़ाद, महुआ मोइत्रा, सायानी घोष और सौगात रॉय भी नहीं गए ममता की बैठक में महुआ मोइत्रा तो मोदी विरोधी होने साथ साथ घोर हिंदू विरोधी भी है जो अक्सर हिंदू देवी देवताओं का अपमान करती रहती है इसके अलावा सायानी घोष की तो करतूत शिवलिंग का अपमान करने के लिए घोर निंदनीय थी

यानी लोकसभा के 28 में 24 और राज्यसभा के 13 में 11 सांसद गायब होने का मतलब है TMC की टूट दीवारों पर लिखी नज़र आ रही है दोनों सदनों में गायब होने वालों सांसदों की संख्या दो तिहाई से ज्यादा है और वो अगर TMC से अलग होते हैं तो दल बदल विरोधी क़ानून लागू नहीं होगा, जैसे “आप पार्टी” के 10 में से 7 सदस्यों के अलग होने से उन पर वह कानून लागू नहीं हुआ 

विधानसभा में 58 विधायकों के अलग होने का मतलब है कि TMC के सारे 32 मुस्लिम विधायक भी ममता के साथ नहीं रहे 17 मुस्लिम विधायक तो ऋतब्रत बनर्जी के साथ चले गए जिसका मतलब है बाकी 20 विधायकों में ममता के साथ 15 मुस्लिम विधायक हैं और 5 ही हिंदू हैं

कभी ममता के विश्वसनीय रहे सौमित्र खान (जो अब भाजपा सांसद हैं) का कहना है कि TMC के लोकसभा के 20 सांसद भाजपा के संपर्क में हैं

कुछ लोगों का कहना है कि अगर TMC के सांसद लोकसभा और राज्यसभा में TMC से अलग होते हैं तो उन्हें भाजपा में शामिल नहीं करना चाहिए मेरा मानना है कि उन्हें भाजपा में शामिल कर लेना चाहिए क्योंकि वो फिर भाजपा से टूट कर अलग नहीं हो सकेंगे क्योंकि वो किसी हाल में दो तिहाई सांसद नहीं हो सकेंगे जैसे “आप पार्टी” के 7 सदस्य अब भाजपा से इसलिए ही अलग नहीं हो सकते राज्यसभा वाले अगर भाजपा छोड़ते भी हैं तो वो कहीं से भी राज्यसभा में नहीं आ सकते

एक बात जरूर है कि सौगात रॉय को छोड़ कर शत्रुघ्न सिन्हा, कीर्ति आज़ाद, महुआ मोइत्रा और सायानी घोष को किसी हाल में भाजपा में नहीं लेना चाहिए क्योंकि इन लोगों ने जो मोदी के लिए जो आग ऊगली है, उसे नहीं भुलाया नहीं जा सकता

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