जो कहता है “मेक इन इंडिया” हो ही नहीं सकता, वो राहुल विन्ची भी विक्रम-1 के लिए Skyroot Aerospace को बधाई दे रहा है; स्पेस और डिफेंस में प्राइवेट सेक्टर क्या कर रहा है, बहुत लोगों को पता ही नहीं

सुभाष चन्द्र

Skyroot Aerospace के पवन कुमार चांदना और नागा भारत डाका को उनके सफल विक्रम -1 के लिए हार्दिक बधाई ये दोनों ISRO में 2012 से 2018 तक कार्यरत थे जब उन्होंने VRS ले लिया और अपने मिशन पर लग गए अभी सुनने में आया है कि ISRO और DRDO के करीब 100 इंजीनियर/बैज्ञानिक संस्थानों को छोड़ना चाहते हैं और प्राइवेट सेक्टर में में जाने को इच्छुक हैं क्योंकि वहां जयादा पैसा मिलता है। 

प्राइवेट सेक्टर आज तो ISRO और DRDO के वैज्ञानिकों को ज्यादा सैलरी देकर खींच रहा है लेकिन कल वह भी इस प्रवृत्ति से परेशान होगा जब उसके लोग भी ज्यादा सैलरी के लालच में दूसरी कंपनियों में जाएंगे 

विक्रम-1 पूरी तरह मेक इन इंडिया है और जिस दिन यह सफल हुआ, उस दिन भी खरदिमाग राहुल विंची ने कहा कि “मेक इन इंडिया” हो ही नहीं सकता जबकि आज सब कुछ भारत में ही बन रहा है भारत ने कई युद्धपोत तैयार कर लिए, ISRO ने चंद्रयान मिशन सफल कर दिया, दुनिया भर के satellite ISRO भेजता है, DRDO ने अनेक मिसाइलें बना दी, एयर डिफेंस सिस्टम बना दिए जो विदेशों में निर्यात हो रहे हैं लेकिन राहुल विंची एक गाना गाता है कि “मेक इन इंडिया” हो ही नहीं सकता ऐसा कहते हुए उसे शर्म भी नहीं आती उधर कॉकरोच बैठे हुए नारा लगा रहे हैं, मोदी सरकार निकम्मी है, ये सरकार बदलनी है इन लोगों में एक भी नहीं है जो पवन कुमार चांदना और नागा भारत डाका का मुकाबला कर सके

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भारत में स्पेस और डिफेंस में आज क्या हो रहा है जब से मोदी सरकार ने इन दोनों सेक्टरों को प्राइवेट कंपनियों के लिए खोला है

अंतरिक्ष एवं रक्षा क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी

भारत में वर्तमान में लगभग 400 निजी अंतरिक्ष (स्पेस) उद्यम तथा 430 से अधिक लाइसेंस प्राप्त निजी रक्षा कंपनियां कार्यरत हैं इनके अतिरिक्त हजारों सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी इन क्षेत्रों को सहयोग प्रदान कर रहे हैं चूँकि अनेक एयरोस्पेस कंपनियां रक्षा तथा अंतरिक्ष—दोनों क्षेत्रों के लिए उत्पाद एवं सेवाएं उपलब्ध कराती हैं, इसलिए इन दोनों क्षेत्रों में उल्लेखनीय समानता और परस्पर जुड़ी है

अंतरिक्ष क्षेत्र (Space Sector)

कुल स्टार्टअप/उद्यम:

IN-SPACe के अंतर्गत पंजीकृत लगभग 400 निजी स्पेस-टेक स्टार्टअप एवं कंपनियां-

प्रमुख कंपनियां:

स्काई रूट एयरोस्पेस (Skyroot Aerospace)

पिक्सेल (Pixel)

अग्निकुल कॉसमॉस (Agnikul Cosmos)

बेलाट्रिक्स एयरोस्पेस (Bellatrix Aerospace)

बाज़ार मूल्य:

भारतीय अंतरिक्ष क्षेत्र का अनुमानित बाज़ार मूल्य 8.4 अरब अमेरिकी डॉलर है-

रक्षा क्षेत्र (Defence Sector)

लाइसेंस प्राप्त निर्माता:

लगभग 430 सक्रिय निजी कंपनियां, जिनके पास रक्षा उत्पादन हेतु औद्योगिक लाइसेंस हैं-

एमएसएमई एवं उप-आपूर्तिकर्ता:

लगभग 10,000 से 16,000 सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs) तथा पुर्ज़े एवं घटक आपूर्तिकर्ता रक्षा उद्योग को सहयोग प्रदान करते हैं

प्रमुख औद्योगिक समूह एवं कंपनियां:

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (Tata Advanced Systems)

लार्सन एंड टुब्रो (L&T)

अडानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस (Adani Defence & Aerospace)

भारत फोर्ज (Bharat Forge)

डायनामेटिक टेक्नोलॉजीज (Dynamatic Technologies)

Direct employment: 4–6.5 lakh persons

Indirect employment: 8–12 lakh persons

Overall Employment Impact

A reasonable estimate is that the private space and defence ecosystem in India presently supports around 12 to 18 lakh jobs (direct and indirect combined)

अब सोचिए विपक्ष के नेता और कॉकरोच जो भारत में Gen Z को आंदोलन भड़काना चाहते है और बांग्लादेश/नेपाल जैसे तख्तापलट करना चाहते है, वो कैसे सोच सकते है कि 18 लाख लोग जो  प्राइवेट स्पेस/डिफेंस में कार्यरत हैं, वो Gen Z आंदोलन में शामिल होंगे

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