देश के विघटन के बाद 1947 से 2014 के 67 साल के कालखंड में जिसमें कांग्रेस ने 55 साल राज किया, चोरी हुई और तस्करी से विदेशों में भेजी गई मात्र 13 कलाकृतियां वापस आ सकी जबकि 2014 में मोदी के आने के बाद अभी तक 12 साल में 668 कलाकृतियां विदेशों से भारत लाई जा चुकी है - और ये कांग्रेस आज बिलख रही है राम मंदिर में चोरी को लेकर जबकि कांग्रेस ने हमेशा राम मंदिर बनाने का विरोध किया - कलाकृतियों का वापस आना मोदी की सफल कूटनीति का परिणाम है -
गौरतलब बात है कि जब कांग्रेस राज में सबरीमाला मन्दिर से सोने की चोरी होने पर सोनिया गाँधी पर आरोप लगा था, जिसे विपक्ष गोदी मीडिया ने कोई चौपाल नहीं बैठाई जिस तरह आज राममन्दिर में हुई चोरी को उछाल रहा है। राहुल की दोहरी नागरिकता पर, वक़्फ़ बोर्ड, मस्जिद, दरगाहों और मदरसों में हो रहे घोटालों पर सबको सांप सूंघ गया है। राहुल के आगे-पीछे डोलने वाला मीडिया राहुल विदेशों में जाकर किस-किस से मिल रहा है नहीं बताने की हिम्मत, क्यों? दूसरे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक जो 668 कलाकृतियां वापस लेकर आये हैं विपक्ष समर्पित मीडिया चुप है। कोई यह बताने को तैयार नहीं की ये कलाकृतियां किस तरह भारत से चोरी हुईं। लगता है मीडिया ने विपक्ष के आगे सरेंडर किया हुआ है।
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पुरावशेष लौटाने वाले प्रमुख देश
इन पुरावशेषों की वापसी में संयुक्त राज्य अमेरिका का सबसे बड़ा योगदान रहा है जिसने अकेले लगभग 578 पुरावशेष भारत को लौटाए हैं, जो कुल वापसी का लगभग 90 प्रतिशत है- इसके अतिरिक्त ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), कनाडा, सिंगापुर तथा नीदरलैंड ने भी भारत से चोरी कर ले जाए गए अनेक सांस्कृतिक धरोहरों को वापस किया है -
बरामद किए गए प्रमुख चोरी के पुरावशेष
1. अवलोकितेश्वर की प्रतिमा
लगभग 20 लाख अमेरिकी डॉलर मूल्य की यह दुर्लभ कांस्य प्रतिमा रायपुर स्थित महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय से चोरी कर अमेरिका तस्करी के माध्यम से पहुंच गई थी;
2. चोलकालीन कांस्य प्रतिमा-
तमिलनाडु के मंदिरों से चोरी की गई अत्यंत मूल्यवान चोलकालीन प्रतिमाओं में 12वीं शताब्दी की श्रीपुरंथन नटराज प्रतिमा तथा लगभग 500 वर्ष पुरानी तिरुमंगई आळवार प्रतिमा प्रमुख हैं;
3. माँ अन्नपूर्णा की प्रतिमा18वीं शताब्दी की यह ऐतिहासिक प्रतिमा लगभग एक शताब्दी पूर्व काशी के एक मंदिर से चोरी हो गई थी। बाद में इसे कनाडा से भारत वापस लाया गया;
2020 नवंबर की बात है. मन की बात कार्यक्रम का 29वां एपिसोड था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा था कि एक सदी पहले भारत से चोरी की गई देवी अन्नपूर्णा की मूर्ति को कनाडा से वापस लाया जाएगा. यह मूर्ति पीएम मोदी के वर्तमान संसदीय क्षेत्र वाराणसी से वर्ष 1913 के आसपास चोरी हुई थी और तस्करी कर कनाडा भेज दी गई थी.
4. नृत्यरत गणेश की प्रतिमा
मध्य प्रदेश के एक मंदिर से वर्ष 2000 में चोरी की गई यह बलुआ पत्थर की प्रतिमा अमेरिका में सक्रिय अवैध कला-तस्करी नेटवर्क के माध्यम से खोजी गई और सफलतापूर्वक भारत वापस लाई गई-
अब ऑस्ट्रेलिया ने भी तीन प्राचीन भारतीय पुरावशेष स्वेच्छा से लौटाने पर सहमति व्यक्त की है
ऑस्ट्रेलिया ने 11वीं और 12वीं शताब्दी के तीन प्राचीन भारतीय पुरावशेष भारत को स्वेच्छा से लौटाने का निर्णय लिया है - ये सभी पुरावशेष भारत से तस्करी के माध्यम से बाहर ले जाकर अवैध रूप से निर्यात किए गए थे-
भारत को लौटाए जाने वाले तीन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण पुरावशेष-
1. देवी भद्रकाली सहित कांस्य त्रिशूल
यह त्रिशूल मूलतः तमिलनाडु के तिरुवरूर जिले के कोल्लुमंगुडी स्थित श्री काशी विश्वनाथ स्वामी मंदिर का है - इसकी पहचान अमेरिका के एक कला-विक्रेता के माध्यम से हुई तथा जस्टिस क्रेनन द्वारा की गई उत्पत्ति (Provenance) संबंधी जांच में यह सिद्ध हुआ कि इसके निर्यात का कोई वैध इतिहास नहीं था;
2. नंदी की पाषाण प्रतिमा-
यह प्रतिमा तमिलनाडु के एक मंदिर से चोरी की गई थी। इसे वैध सिद्ध करने के लिए मेक्सिको और गोवा के माध्यम से एक विस्तृत फर्जी स्वामित्व (Provenance) दस्तावेज़ी श्रृंखला तैयार की गई थी, किंतु जांच में उसकी वास्तविक उत्पत्ति का पता चल गया;
3. षण्मुख (छह मुख वाले) भगवान कार्तिकेय की प्रतिमा
यह प्रतिमा भी अवैध कला-तस्करी नेटवर्क के माध्यम से विदेश पहुंचाई गई थी - जांच में यह प्रमाणित हुआ कि इसका मूल स्रोत 11वीं शताब्दी का नागनाथस्वामी मंदिर, मन बाड़ी (जिला तंजावुर, तमिलनाडु) है, जिसका निर्माण राजेंद्र चोल प्रथम ने कराया था-

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