जब से राममन्दिर चढ़ावे का मुद्दा उठा है लगता है मीडिया विपक्ष द्वारा परोसी बातों पर चील-कौओं की तरह चीख-चिल्ला रहा है। मीडिया पर वही बात परोसी जा रही है जो विपक्ष बक रहा है लेकिन मीडिया द्वारा अपनी छानबीन बिलकुल नहीं। जो फिर साबित कर रहा है यह गोदी मीडिया नहीं बल्कि विपक्ष गोदी मीडिया है। अगर मीडिया चंपत आदि के साथ-साथ विपक्ष की भी भूमिका की छानबीन कर समाचार दिखाए समूचा विपक्ष किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगा। मगर मीडिया को अपनी TRP और तिजोरी की चिंता है सच्चाई की नहीं। मोदी और योगी को चाहिए कि पुलिस को निर्देश दे कि तथाकथित आरोपियों पर थर्ड-डिग्री कानूनी कार्यवाही कर सच्चाई को सामने लाये वरना जनता का राममन्दिर ही नहीं हिन्दू आस्था से विश्वास उठ जाएगा। और मीडिया को सच्चाई सामने लाने के कहे विपक्ष द्वारा प्रायोजित समाचारों से लुभाने छोड़े।
यह खबर सोशल मीडिया पर आग की तरह फ़ैल चुकी है कि टिन्नू यादव लगातार अखिलेश यादव के संपर्क में था और फ़ोन पर बात करता था। गिरफ्तार होने के एक दिन पहले भी टिन्नू की बात अखिलेश के साथ हुई, ऐसा कहा गया है और कुल मिला कर 998 बार उन दोनों की बात हुई।
यह अपने आप में बहुत गंभीर मामला है जो इशारा करता है कि टिन्नू के किए गए घोटाले में अखिलेश यादव का भी हाथ रहा होगा या वो खुद ही टिन्नू यादव का मास्टरमाइंड था।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
मीडिया के टारगेट पर बस चंपत राय समेत 3-4 लोग हैं जबकि मीडिया ने एक बार भी मंदिर ट्रस्ट में बैठे 4 IAS अधिकारियों के बारे प्रश्न नहीं उठाया कि आखिर वो ट्रस्ट में क्या कर रहे थे और लगता है SIT ने भी उनसे कुछ पूछताछ करने की जरूरत नहीं समझी। उनका प्रशासनिक अनुभव क्या कर रहा था?
मैंने SIT को Email किया था कि रामगोपाल यादव को समन कर पूछें कि उसे कहां से पता चला कि 20,000 करोड़ रुपए का गबन हुआ है और उसके पास इसके क्या सबूत है लेकिन SIT को email डिलीवर ही नहीं हुआ।
मीडिया की हर बात पर विश्वास करना ठीक नहीं है। हर बात को “सूत्रों” की खबर बता देते हैं लेकिन टिन्नू यादव और अखिलेश यादव की बातचीत को “सूत्रों” की खबर भी कह कर नहीं बता रहे।
चर्चा में यह है कि जब पुलिस ने टिन्नू यादव के कॉल डिटेल्स निकाले तो उसमें टिन्नू-अखिलेश की बातचीत उजागर हुई। सोशल मीडिया की खबरों का पुलिस ने भी खंडन नहीं किया है। इसका क्या मतलब हो सकता है?

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