“अमन की आशा” के नाम पर तमाशा करने वाले 61 भारतीय लोगों को शर्म भी नहीं आई प्रधानमंत्री मोदी और शाहबाज शरीफ को 56 पाकिस्तानियों के साथ मिलकर लेटर में बातचीत शुरू करने की अपील करने में। इन 61 में कुछ तो ऐसे हैं जो हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़े रहते हैं। फारूक अब्दुल्ला, महबूबा मुफ़्ती, मीरवाइज़ उमर फारुकी, मणिशंकर अय्यर, मनोज झा और ए एस दुल्लत 61 में खास नाम हैं। कौन इन लोगों से परिचित नहीं है।
इन लोगों को दिखाई नहीं देता कि भारत का ऑपरेशन सिंदूर अभी जारी है। आज अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है और कोई नहीं जानता पाकिस्तान यात्रा में कब कैसे आतंकी हमला कर दे। इन लोगों को तकलीफ है कि भारत ने सिंधु जल समझौता रद्द कर दिया लेकिन ये लोग मोदी से बातचीत शुरू करने से पहले यह देखने के लिए अंधे हो चुके हैं कि पाकिस्तान का रक्षा मंत्री पानी के लिए युद्ध छेड़ने की धमकी दे रहा है। बिलावल भुट्टो भी कहता है कि पानी नहीं दिया तो चिनाब में खून बहेगा।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
इन्हे ये भी याद नहीं जुल्फिकार अली भुट्टो ने कश्मीर के लिए 1000 साल तक भारत से लड़ने की कसम खाई थी।
ये लोग भूल रहे हैं कि अटल बिहारी वाजपेयी शांति के लिए बस लेकर लाहौर गए थे और पाकिस्तान ने क्या सिला दिया। उसने भारत की पीठ में छुरा घोंप कर कारगिल में युद्ध छेड़ दिया और आप उस मुल्क से बात करने को कहते हो। अटल जी के दल में जाने वालों में दुल्लत भी था जो उस समय रॉ का मुखिया था जिसे भनक तक नहीं लगी कि पाकिस्तान कारगिल में शरारत कर रहा है और हो सकता है दुल्लत को जानकारी रही हो लेकिन उसने अटल जी अंधेरे में रख कर उनके साथ विश्वासघात किया। ये आदमी हर समय भारत को कोसने वाले राहुल गांधी की कथित “भारत जोड़ो यात्रा” में शामिल था।
इन कम्बख्तों को दिखाई नहीं देता भारत ने किस हद तक जाकर पाकिस्तान के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिश की लेकिन पाकिस्तान ने हमें 26/11 दिया। मोदी खुद नवाज़ शरीफ की बेटी की शादी में 25 दिसंबर, 2015 को गए लेकिन पाकिस्तान ने ठीक एक हफ्ते बाद पठानकोट में हमला किया और 9 महीने बाद 18 सितंबर, 2016 को उरी में हमला कर दिया।
कितने नेता पाकिस्तान के भारत को परमाणु बम चलाने की धमकी दे चुके है। और फारूक अब्दुल्ला बस उसके इसी परमाणु बम से डरने के लिए कहता है। कश्मीर का ही सईद अली शाह गिलानी गाना गाता था - “मेरी जान मेरी जान - पाकिस्तान पाकिस्तान”।
सिंधु जल समझौता नेहरू और अयूब खान के बीच भारत के हितों को नज़रअंदाज करने वाला और पाकिस्तान को जरूरत से ज्यादा पानी देने वाला गैर-कानूनी समझौता था जिसके लिए नेहरू ने खुद फैसला लिया और संसद समेत किसी से परामर्श नहीं किया।
एक बार ये 61 निकम्मे पाकिस्तान से कह कर तो देखें कि खुलेआम स्वीकार करे कि उनके नेताओं ने पाकिस्तान बना कर गलती की। उससे भी बड़ी गलती एक तिहाई कश्मीर हड़प कर और बाकी सारे कश्मीर को हड़पने की मंशा रखने में की। क्या ये खुद मानते हैं कि मुसलमानों ने पाकिस्तान लेकर गलती की?
आज वह पाकिस्तान दाने दाने को मोहताज़ है। हर किसी देश से भीख मांगता फिरता है। आवाम को देने के लिए खाना नहीं है और महंगाई ने बैंड बजा रखा है। लेकिन मंसूबे रखता है भारत में आतंकी हमले करने के और अब तो अफगानिस्तान से भी रोज तनातनी रहती है।
कवि प्रदीप का गीत हमेशा याद रखना चाहिए
“कहनी है इक बात हमें,
इस देश के पहरेदारों से,
संभल के रहना अपने घर में
छिपे हुए गद्दारों से”

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