आज जिसे देखो victim card खेलने का आदी हो गया है। अपनी गिरिवान में देखा नहीं जाता जिसे देखो भारत के अल्पसंख्यकों के शुभ चिंतक बन रहा है। इन लोगों को नहीं मालूम कि जितना अल्पसंख्यक यानि मुसलमान भारत में खुश है उतना सारे विश्व में नहीं यहाँ तक अपने मुस्लिम मुल्कों में भी नहीं। अगर देखा जाए तो मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं क्योकि जो देश की दूसरी सबसे बड़ी आबादी हो उसे अल्पसंख्यक कहना अल्पसंख्यक के नाम पर गाली है। इस कड़वी सच्चाई को समझना होगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 मई, 2026 को नीदरलैंड गए थे। वहां के प्रधानमंत्री Rob Jetten ने मोदी से मुलाकात से पहले कहा था कि नीदरलैंड और यूरोप के अन्य देश भारत के अल्पसंख्यकों खासकर मुसलमानों को लेकर चिंतित है।
उसके बाद अभी हाल ही में स्विट्ज़रलैंड ने UN में कहा “ we urge India to protect minorities & uphold Foe” जिसके जवाब में हमारे विदेश मंत्री डॉ जयशंकर ने लताड़ मारते हुए कहा कि “We offer to help Switzerland teckle Racism, Systematic Discrimation and Xenophobia (a fear or hatred of foreign people and cultures)”
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| लेखक चर्चित YouTuber |
अमेरिका भूल जाता है कि जो षड़यंत्र भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने के लिए चल रहा है, वो अमेरिका को भी इस्लामिक देश बनाने के लिए चल रहा है। अमेरिका और यूरोप को अमेरिकी मौलाना Uthman Farooq का बयान सुनना चाहिए जिसमें उसने कहा -”A MUSLIM EUROPE WILL COME TRUE AND AMERICA WILL BE A MUSLIM COUNTRY, ISLAM WILL ENTER EVERY HOUSE, THEY CAN BE AS MAD AS THEY WANT, I DON’T CARE”.
ऐसे बयान बहुत से अमेरिकी मौलाना देते रहते हैं और इसलिए ही शायद अमेरिका के कुछ राज्यों ने शरिया को बैन किया है। लेकिन जब भारत की बात आती है तो अमेरिका के दिल में भारत के मुसलमानों के लिए दर्द छलक जाता है। एक समय था भारत में आतंकवाद को अमेरिका हमारी Law & Order problem कहता था लेकिन 9/11 के बाद उसे पता चला आतंकवाद क्या होता है।
अब ब्रिटेन यूरोप का हिस्सा नहीं है लेकिन यूरोप के देशों को ब्रिटेन के Grooming Gangs द्वारा पिछले कुछ वर्षों में 2.5 लाख से ज्यादा अंग्रेज़ बच्चियों के बलात्कार याद रखने चाहिए और ये दुष्कर्म करने वाले अधिकांश पाकिस्तानी थे। जर्मनी और ग्रीस को पाकिस्तानियों द्वारा चलाई जा रही 60-60 मस्जिदों को बंद करना पड़ा है। फिर नीदरलैंड और स्विट्ज़रलैंड को भारत के मुसलमानों से इतनी मोहब्बत क्यों है? क्या अपने यहां भी वो यह सब कुछ देखना चाहते हैं?
नीदरलैंड और स्विट्ज़रलैंड को जर्मनी के Bishop Athanasius Schneider की बात सुननी चाहिए जिसमें उन्होंने कहा है -”ISLAMISTS ARE NOT REFUGEES, THEY ARE INVADERS WHO WANT TO ISLAMIZE EUROPE, THEY WANT TO DESTROY THE HISTORICAL CULTURE OF EUROPE”.
नीदरलैंड के प्रधानमंत्री Rob Jetten को अपने ही देश के Geert Wilders की भी बात सुननी चाहिए जिसमें उन्होंने कहा था -”ISLAM IS THE BIGGEST THREAT TO OUR SURVIVAL AND SHARIA SHOULD NOT BE MIXED WITH FREE SOCIETY”.
यूरोप के देशों को भारत के अल्पसंख्यकों के हित में बोलने से पहले नीदरलैंड, इटली, पेरिस, अमेरिका, स्वीडन, हंगरी, बुल्गारिया, स्पेन, बेल्जियम, डेनमार्क और ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिक दंगों में हुई आगजनी को याद करना चाहिए। जनवरी 2016 के फ्रांस में आगजनी करने वाले 90% नाबालिग थे।
स्विट्ज़रलैंड की आबादी करीब 90 लाख है जिसमें करीब 5 लाख (यानी 5-6%) मुस्लिम हैं। इसी तरह नीदरलैंड की आबादी 1 करोड़ 80 लाख है जिसमें करीब 6% मुस्लिम हैं जबकि भारत में मुस्लिम 15 से 20% हैं जिसमें पाकिस्तान, बांग्लादेश के और रोहिंग्या घुसपैठिये भी शामिल हैं।
स्विट्ज़रलैंड और नीदरलैंड या किसी भी अन्य यूरोप के देश को अपने यहां अल्पसंख्यक (मुस्लिम) बढ़ाने में रूचि है तो वह भारत से ले जा सकते हैं। वो वहां जाकर बहुत खुश रहेंगे क्योंकि एक रिपोर्ट के अनुसार यूरोप के 74 करोड़ लोगों में 6 से 8% यानी 5 करोड़ में से 4 करोड़ अपनी अपनी सरकार के Welfare aur Social Benefits पर जीते हैं।

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