ईसाई स्टालिन सरकार पहले ही हिंदुओं के खिलाफ थी और कार्तिकेय दीपम पर अदालतों के आदेशों की अवहेलना कर रही थी। उस सरकार के जाने के बाद विजय जोसेफ, दूसरा ईसाई 10 मई, 2026 को मुख्यमंत्री बना।
27 मई, 2026 को मद्रास हाई कोर्ट के Justice GR Swaminathan और Justice वी Lakshminarayanan की खंडपीठ ने राज्य में गायों और बछड़ों की हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया था। कोर्ट ने कहा था कि गौ हत्या इस्लाम में अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं है और राज्य को दूध उत्पादन व ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए 1976 के सरकारी आदेश को सख्ती से लागू करना चाहिए।
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कब और क्या कहा: हाई कोर्ट ने 27 मई 2026 को दिए अपने फैसले में स्पष्ट किया कि बकरीद या किसी भी अन्य दिन राज्य में कहीं भी गाय या बछड़े का वध नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 48 का हवाला देते हुए राज्य को 30 अगस्त 1976 के राज्य के सरकारी आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।
दो महीने बाद विजय जोसेफ सरकार हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई और 13 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट के Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta की पीठ ने हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी।
राज्य सरकार की दलील:
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी। सरकार ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट का यह निर्देश राज्य के मौजूदा 'तमिलनाडु पशु संरक्षण अधिनियम, 1958' के खिलाफ है, जो कुछ शर्तों के साथ पशु वध की अनुमति देता है।
आर्टिकल 48 और राज्य सरकार के 30 अगस्त, 1976 के आदेश में दुधारू और भार ढोने वाले पशुओं विशेषकर गायों बछड़ों के वध पर प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है।
देश में अनेक राज्यों में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध है जिसमें शामिल हैं -
दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक।
कुछ राज्यों में इन पशुओं के वध के लिए “Fit for Slaughter Certificate” होना आवश्यक है। ये राज्य हैं -अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम - दक्षिण भारत के राज्य हैं केरल और लक्षद्वीप।
जब इतने राज्यों में गोवध निषेध हो सकता है तो तमिलनाडु में क्यों नहीं जहां 87% हिन्दू आबादी है। लगता है विजय जोसेफ स्टालिन से भी एक कदम आगे है।
आशा की जाती है सुप्रीम कोर्ट विजय सरकार की अपील पर जल्द सुनवाई कर हाई कोर्ट के निर्णय को बरक़रार रखेगा।

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