“अंधभक्त” क्या होते हैं राहुल गांधी रामायण में भगवान राम के वचनों से समझने की कोशिश करो; राम ने जो कहा उससे तुम भी रावण ही लगते हो

सुभाष चन्द्र

नेता प्रतिपक्ष राहुल गाँधी को पप्पू ऐसे ही नहीं कहा जाता, लेकिन जुलाई 29 को राहुल ने साबित कर दिया कि वह पप्पू ही नहीं पप्पू का भी पप्पू है। प्रदर्शन में गोली चलने पर जो लोक सभा में सीधे-सीधे गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेकर विवाद खड़ा कर दिया। इस महा-पप्पू को इतना भी नहीं मालूम की लाठी चार्ज, tear gas और water canon आदि की इजाजत किसी मंत्री नहीं बल्कि मौके पर मौजूद DM या SDM द्वारा दी जाती है। अगर LoP को इतना भी नहीं मालूम तो राहुल को इस पद को तुरन्त छोड़ देना चाहिए। 

दूसरे, शाह पर आरोप लगाने पर जो संसद बाधित होने पर संसद के बाहर मीडिया के सामने जो कहा अगर वही बात शाह का नाम लेने की बजाए यही बात बोल दी होती संसद बाधित नहीं होती। फिर यह कहना कि बीजेपी और आरएसएस से कभी माफ़ी नहीं मांगूगा स्वीकार कर लिया की गलत बोला है। वैसे माफ़ी मांगने में केजरीवाल को भी पीछे छोड़ दिया है। इतना ही नहीं माइक चालू होते बोल दिया कि 'माइक बंद कर दिया' पूरी संसद तो क्या लाइव देखने वालों ने झूठ पकड़ लिया। आखिर पप्पू तो पप्पू ही होता है।       

फिर राहुल गांधी ने लोकसभा में कहा कि “मूर्ख को भगवान मानते हैं अंधभक्त” - ऐसे “अंधभक्त” शब्द का प्रयोग कांग्रेस और विपक्ष वाले अक्सर मोदी के समर्थकों के लिए करते आए हैं। जुलाई 28 को प्रियंका वाड्रा ने प्रोफेसर V Kamakoti का अपमान करते हुए उन्हें “गौमूत्र विशेषज्ञ” कहा था जबकि प्रियंका तो क्या वर्तमान पूरी कांग्रेस उनके मुकाबले में कुछ भी नहीं है
“अंधभक्त” क्या होते हैं राहुल गांधी, उसके लिए रामायण का एक प्रसंग सुनो -

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राम - रावण युद्ध में रावण ने श्री राम का उपहास करते हुए कहा कि वे अपनी वाणी से केवल भोले-भाले, अनपढ़ वानरों और भालुओं को ही प्रभावित या भ्रमित कर सकते हैं, लेकिन उसके जैसे विद्वान, ज्ञानी और पराक्रमी राजा को नहीं

भगवान राम ने रावण को उत्तर देते हुए कहा कि सच्ची भक्ति (भक्ति) का आधार निर्मल, निष्कपट और विनम्र हृदय होता है ऐसा पवित्र हृदय किसी अनपढ़ भक्त का भी हो सकता है, जबकि अपार सांसारिक ज्ञान, विद्वता और चतुराई के साथ भी किसी व्यक्ति का मन भ्रष्ट, दुष्ट और अहंकार से परिपूर्ण हो सकता है

भगवान राम ने अपने वचनों में रावण को विद्वान भी कह दिया लेकिन मन से भ्रष्ट, दुष्ट प्रवृत्ति का और अहंकार से परिपूर्ण भी कह दिया तुम्हें हम रावण भी नहीं कह सकते क्योंकि वो ज्ञानी और विद्वान था लेकिन तुम्हारे अंदर उसकी अन्य प्रवृत्ति हैं

आज के समय में जिनको तुम “अंधभक्त” कहते हो वो किसी मूर्ख को भगवान नहीं मान रहे बल्कि उस मोदी के प्रति श्रद्धा रखते है जिसने समस्त भारत को अपना परिवार समझा है जबकि तुम, तुम्हारे चाटुकार 

और कल पैदा हुए “कॉकरोच” उस मोदी को गाली देना ही अपना धर्म  समझते हैं

तुमसे कुछ न हो पाएगा तुम बस देश को तोड़ने की साजिश कर सकते हो विदेशियों के दम पर क्योंकि कांग्रेस की अब कोई औकात नहीं बची है 

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