आज राममन्दिर के विरुद्ध राम विरोधी जो कुछ बक रहे हैं कोई नई बात नहीं। पुरुषोत्तम श्रीराम के अयोध्या लौटने पर जब सुखी जीवन जी रहे थे राक्षस प्रवित्ति के लोगों को रास नहीं आया। लगा दिया सीता माता पर आरोप, लेकिन जब सीता माता ने धरती माता से शरण मांगी और धरती माता सीता माता को लेकर जा रही थी तब तत्कालीन उपद्रवियों को अपनी गलती का अहसास हुआ लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। लेकिन उन उपद्रवियों की मानसिकता सामने आ गयी। ठीक वही स्थिति आज कलयुगी कालनेमियों की होने वाली है। प्रभु राम अभी इन सबकी परीक्षा ले रहे हैं और जब प्रभु न्याय करने पर आएंगे उस पीड़ा को ये झेल नहीं पाएंगे।
कांग्रेस के नेता राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दिन संसद में “काले वस्त्र” पहन कर गए थे क्योंकि कांग्रेस की नज़र में तो भगवान राम थे ही नहीं, वो तो काल्पनिक चरित्र थे। मगर आज मंदिर से दान चोरी को लेकर राम राम जप रहे हैं जबकि राहुल गांधी और अन्य नेता केवल चुनाव के समय मंदिरों में भटकते हैं। जयराम रमेश को टॉयलेट मंदिर से ज्यादा पवित्र लगता है और वो राम मंदिर की जगह टॉयलेट बनाने की वकालत करते थे। ये बन गए आज के कालनेमि।
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| लेखक चर्चित YouTuber |
तीसरा कालनेमि केजरीवाल जिसकी नानी मस्जिद तोड़ कर बनाए गए मंदिर में जाना पाप कहती थी। केजरीवाल समेत कौन सा “आप” नेता है, जिसने मंदिर का विरोध न किया हो। लेकिन आज सुन्दर कांड की महिमा का बखान कर रहा है। राम मंदिर भी हो आया जबकि विपक्ष का कोई नेता प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण मिलने के बाद भी वहां नहीं गया। और आज भी मुस्लिम वोटों के खोने के डर से अखिलेश और राहुल विन्ची राम मंदिर जाने की हिम्मत नहीं कर रहे हैं।
मंदिर हिंदुओं का, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर बना मंदिर, उसके आदेश पर ट्रस्ट बना। आम लोगों समेत लाखों लोगों ने योगदान दिया। ये विपक्षी तो न तीन में थे न तेरह में लेकिन आज दान चोरी को लेकर ऐसे तड़पते हुए रामधुन गा रहे हैं जैसे इनके बाप का पैसा लुट गया हो।
सबसे बड़ी बात तो समाजवादी कह रहे हैं कि आज अगर कोई सनातनी पार्टी है तो वह समाजवादी पार्टी है। अब PDA में सनातन कहां और कैसे फिट होता है? ये पहाड़ में बैठे सच्चे कालनेमि हैं जो हनुमान जी का रास्ता रोकने गया था। डिंपल और केजरीवाल जिस वांगचुक के मंच पर गए वहां नारे लगे “लेकर रहेंगे ब्रामणवाद से आज़ादी” और राजकुमार भाटी कहता है कि ब्राह्मण वैश्यों से भी गिरे हुए होते हैं और ठाकुर महिलाएं एक से ज्यादा पति रखती है। फिर ठाकुर और ब्राह्मण वोट क्यों देंगे सपा को?
अगर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस (केजरीवाल को छोड़ो, उसकी कोई औकात नहीं है उत्तर प्रदेश में) सनातन का चोला ओढ़ कर चुनाव में जाएंगे तो मुसलमान इन्हें वोट क्यों देंगे? मुसलमान केवल अपना हित देख कर वोट देता है, लेकिन मोदी से सभी लाभ लेकर भी मोदी को वोट नहीं देता। अखिलेश मुंह की खाएगा और कांग्रेस मुसलमानों को क्या देगी जब वह अकेले सरकार ही नहीं बना सकेगी। फिर ओवैसी खड़ा होगा लेकिन अखिलेश, कांग्रेस और ओवैसी की हिंदू विरोधी राजनीति हिंदुओं को एकजुट कर देगी जैसे बंगाल में हुआ।
सारे कालनेमि योगी जैसे हनुमान के हाथों राजनीति के मुक्तिधाम भेजे जाएंगे। एक अविमुक्तेश्वरानंद बहुत उछल रहा है। उसे आजम खान और तौकीर रजा को याद रखना चाहिए।
उसका भी एक दिन वही हाल होगा जो उन दोनों का हुआ। और हां दान चोरी की जांच अभी लंबी चलनी है कुछ पता नहीं कौन सा छुपा हुआ चेहरा सामने आ जाए जैसे अखिलेश और टिन्नू यादव की बात 980 बार फ़ोन पर बात सामने आ गई।

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