जस्टिस उज्जवल भुईया कुछ तो ख्याल रखना चाहिए कि हिंदुओं का मानमर्दन करने वालों की वकालत करने से पहले

सुभाष चन्द्र

जुलाई 25 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुईया ने भारत में उन याचिकाओं के प्रति अदालतों के ढुलमुल और लापरवाह रवैये पर कड़ी आपत्ति जताई, जो उन नागरिकों द्वारा दायर की जाती हैं जिनके विरुद्ध असहमति व्यक्त करने या विरोध-प्रदर्शन करने के कारण आपराधिक कार्रवाई की जाती है। 

इस संदर्भ में उन्होंने हाल ही की उस घटना का उल्लेख किया जिसमें 14 मुस्लिम युवकों को रमजान के दौरान गंगा नदी में नाव पर रोजा खोलते समय चिकन बिरयानी खाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था

उन्होंने कहा,

"उदाहरण के लिए, कुछ युवकों का मामला लें, जो गंगा नदी पर नाव में रोजा खोलते समय चिकन बिरयानी खा रहे थे मुझे पूरा विश्वास है कि चिकन बिरयानी खाना कोई अपराध नहीं है। यह अपराध हो ही नहीं सकता गंगा नदी पर चिकन खाने पर रोक लगाने वाला कोई कानून नहीं है फिर भी उन्हें केवल इसी कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें तीन महीने तक जेल में रहना पड़ा"

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जस्टिस भुईया आप किसी भी कानून की व्याख्या अपनी मर्जी से कर सकते हैं क्योंकि आप सुप्रीम कोर्ट हैं लेकिन आप इस बात को भूल रहे हैं कि किसी धर्म की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए किया गया कार्य अपराध की श्रेणी में आता है

वो 14 मुस्लिम युवक आखिर रोजा खोलने गंगा जी पर गए ही क्यों, मांस का सेवन किया भले ही चिकन बिरयानी में किया उन पर आरोप था कि उन्होंने बचा खुचा खाना और हड्डियां गंगा जी में फेंकी इसके पीछे उद्देश्य हिंदुओं के लिए पवित्र गंगा माँ का अपमान करना था और हिंदुओं की भावनाओं को ठेस पहुंचाना था। लगता है आपकी रग रग में हिंदुओं को अपमानित करना भरा हुआ है और इसलिए ही आप उन मुस्लिम युवकों की वकालत कर रहे हैं धार्मिक विद्वेष फ़ैलाने का कार्य तो आपने भी कर दिया

जस्टिस भुईया के ऐसे बेतुके बयान आते रहते हैं 24 जनवरी, 2026 को उन्होंने कहा था कि UAPA के अत्यधिक उपयोग से हासिल नहीं हो सकता विकसित भारत का लक्ष्य उन्होंने कहा कि 2019 से 2023 के बीच इस एक्ट में दोषसिद्धि मात्र 5% है हजारों लोगों को गिरफ्तार किया गया लेकिन आरोप सिद्ध नहीं हो सके 

आप UAPA में 5% दोषसिद्धि को लेकर कानून पर सवाल उठा रहे हैं लेकिन CBI का Success Rate तो 76% होने पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह CBI के कार्यों की समीक्षा करेंगे - मतलब 5% भी पसंद नहीं और 76% भी पसंद नहीं

पिछले दिनों जस्टिस भुइयां ने कॉलेजियम की सिफारिशों के लिए केंद्र सरकार पर उंगली उठाते हुए कहा था कि केंद्र को कॉलेजियम की सिफारिशें खारिज करने का अधिकार नहीं है

बड़ी विडंबना है, पुलिस को सुप्रीम कोर्ट फटकार मारता है, प्रशासन को नहीं छोड़ता, सेना के कार्य में कमी निकालता है, केंद्र और राज्य सरकारों की तो बात ही छोड़ दो जब सभी में कमी निकालनी हैं तो सत्ता में आने का तरीका ढूंढिए

यानी सुप्रीम कोर्ट 1967 में बने UAPA कानून को विकसित भारत के बनने में रोड़ा समझता है मतलब कानून बनाने वाली संसद जैसे कोई पागलों की संस्था हो फिर तो एक लाठी में सभी आरोपियों पर से UAPA हटा दीजिए फिर चाहे वो आतंकी हो या दंगाई हों जिनकी वजह से सैंकड़ों लोगों की जान गई हो

शराब घोटाले में सभी लोगों को जमानत दे गई लेकिन केजरीवाल को जमानत देते हुए जस्टिस भुईया ने कहा कि  Article 20(3) के अनुसार किसी अभियुक्त को उसके स्वयं के खिलाफ गवाही देने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता फिर आरोप सिद्ध कैसे होगा क्योंकि केजरीवाल ही नहीं सभी आरोपी मुंह बंद करके बैठ जाएंगे 

सुप्रीम कोर्ट के जजों को अपनी निजी राय अपने तक ही सीमित रखनी चाहिए 

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