FCRA के नए नियमों को लेकर अमेरिकियों में खलबली है; फर्जी NGOs के जरिए धर्मांतरण के लिए पैसा जो आना बंद हो जाएगा

सुभाष चन्द्र

FCRA amendment bill, 2026 लोकसभा में 25 मार्च, 2026 को सरकार ने पेश किया लेकिन कांग्रेस और विपक्ष के विरोध के चलते बाद में इसे चर्चा के लिए स्थगित कर दिया मगर सरकार ने 22 जून, 2026 को इस बिल के मुख्य नियमों को Notify कर दिया जो अब लागू हो गए है। 

बिल के मुख्य प्रावधान हैं -

गतिविधि-विशिष्ट पंजीकरण (Activity-Specific Registration)

गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को भारत में अपने सटीक उद्देश्यों तथा कार्यक्षेत्रों का स्पष्ट उल्लेख करना होगा;

प्रत्येक गतिविधि श्रेणी तथा राज्य/केंद्र शासित प्रदेश (State/UT) के लिए अलग-अलग शुल्क देय होगा;

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वर्तमान में एफसीआरए के अंतर्गत पंजीकृत संगठनों को एक वर्ष में बताना होगा कि वे किन उद्देश्यों तथा किन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में अपना पंजीकरण बनाए रखना चाहते हैं;

धार्मिक गतिविधियां (Religious Activities)

विदेशी अंशदान का उपयोग पूजा-अर्चना, धार्मिक शिक्षा, धार्मिक विरासत के संरक्षण तथा सामुदायिक रसोई (Community Kitchens) के लिए किया जा सकेगा;

"धर्मांतरण (Proselytization)" पर स्पष्ट प्रतिबंध;

गैर-सरकारी संगठनों को विदेशी अंशदान का उपयोग धर्मान्तरण के लिए सख्ती से प्रतिबंधित होगा;

यह प्रावधान रेव. स्टेनिस्लॉस बनाम मध्य प्रदेश राज्य (1977) में उच्चतम न्यायालय के निर्णय के अनुरूप है, जिसमें न्यायालय ने कहा था कि धर्म के प्रचार (Propagate) का अधिकार, दूसरों का धर्म परिवर्तन कराने (Convert) का अधिकार नहीं है;

प्रमुख पदाधिकारियों (Key Functionaries) पर प्रतिबंध

जिन संस्थाओं के प्रमुख पदाधिकारी विदेशी नागरिक हों (भारतीय मूल के व्यक्तियों – Persons of Indian Origin (PIO) – को छोड़कर), उन्हें सामान्यतः एफसीआरए पंजीकरण या पूर्व अनुमति (Prior Permission) के लिए पात्र नहीं माना जाएगा;

अधिक कठोर वित्तीय अनुपालन (Strict Financial Compliance)

गैर-सरकारी संगठनों को अगली किस्त प्राप्त करने से पहले पूर्व में प्राप्त विदेशी अंशदान का कम-से-कम 75% उपयोग करना अनिवार्य होगा;

एफसीआरए पंजीकरण के नवीनीकरण (Renewal) के लिए यह आवश्यक होगा कि संगठन ने पिछले दो वर्षों में अनुमोदित गतिविधियों पर कम-से-कम ₹10 लाख व्यय किए हों;

बढ़ी हुई पारदर्शिता (Enhanced Transparency)

अंतिम (वास्तविक) दाता (Ultimate Donor) का विवरण अनिवार्य रूप से सार्वजनिक करना होगा

ये नए नियम देश की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए लागू किये गए हैं लेकिन अमेरिका और मानवाधिकार संस्था जैसे  Amnesty International और  International Commission of Jurists (ICJ) इसका विरोध कर रहे हैं, उनका मानना है कि  civil society के खिलाफ इसका हथियार के रूप में उपयोग होगा

अमेरिका में एक दूसरे के धुर विरोधी Democrats और Republicans  हमारे देश के कानून (नियमों) के खिलाफ तलवार लेकर खड़े हो गए हैं। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो कोलकाता में Missionaries of Charities में भारत के दौरे पर सबसे पहले 23 मई, 2026 को पहुंच गए। रुबियो का मकसद विचार विमर्श करना था कि कैसे नए नियमों से बचाव किया जाए

उसके बाद 22 जून, 2026 को भारत में अमेरिकी राजदूत Sergio Gor तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसफ विजय को स्वयं मिलने तमिलनाडु पहुंच गए। जीसेफ कह चुके हैं “मैं विश्वभर के मिशनरियों के संपर्क में हूँ और भारत को एक ईसाई राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से कार्य कर रहा हूँ। मैं अपने सभी द्रविड़ भाइयों और बहनों से आग्रह करता हूँ कि वे आगे आएँ और हमें सौंपे गए इस पवित्र उद्देश्य को साकार करने में सहायता करें”

Sergio Gor का जोसफ विजय से मिलना उसके मिशन को आगे बढ़ाने के लिए माना जा सकता है। लेकिन बताया है गया कि उनकी मुलाकात में भारत-अमेरिका के संबंधों को मजबूत करने और boosting economic partnerships, and expanding cultural ties के लिए थी लेकिन किसी और CM से नहीं हुई, क्यों?

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